​लापरवाही पर बरसी गाज: भागलपुर वरीय पुलिस अधीक्षक ने जोगसर थानाध्यक्ष मंटू कुमार को किया निलंबित, नगर पुलिस अधीक्षक की जांच में खुली पोल

भागलपुर, 15 मई 2026। भागलपुर जिला पुलिस महकमे में विधि-व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली में पारदर्शिता व जवाबदेही तय करने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक बेहद कड़ा कदम उठाया गया है। जिले में लगातार बढ़ रहे आपराधिक मामलों के अनुसंधान में शिथिलता बरतने और वरीय अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने के गंभीर आरोप में जोगसर थाना के थाना अध्यक्ष मंटू कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह दंडात्मक कार्रवाई भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी एक आधिकारिक जिलादेश के माध्यम से की गई है। शहर के मध्य में स्थित जोगसर जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील थाने के प्रभारी पर हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद से पूरे जिला पुलिस बल के भीतर हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह निलंबन कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से मिल रही शिकायतों और नगर पुलिस अधीक्षक द्वारा गोपनीय तरीके से की गई एक उच्चस्तरीय विधिक जांच की रिपोर्ट मुख्य आधार बनी है।

अनुसंधान में घोर लापरवाही और वरीय अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना

​निलंबित किए गए थाना अध्यक्ष मंटू कुमार पर विभागीय स्तर पर कई गंभीर और अक्षम्य आरोप लगाए गए हैं। पुलिस मुख्यालय द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जोगसर थाने में दर्ज कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील आपराधिक कांडों में उनके द्वारा अपेक्षित रूप से प्रभार ग्रहण नहीं किया जा रहा था। विधिक नियमों के अनुसार, किसी भी थाने में दर्ज होने वाले गंभीर प्रकृति के मामलों, जैसे डकैती, लूट, हत्या, या महिला उत्पीड़न से जुड़े कांडों में थाना अध्यक्ष को स्वयं सक्रिय भूमिका निभानी होती है और अनुसंधान की कमान संभालनी होती है। परंतु, मंटू कुमार इन मामलों में प्रभार लेने से लगातार कतरा रहे थे, जिससे मामलों की कानूनी प्रगति पूरी तरह से बाधित हो रही थी।

​इसके अतिरिक्त, उन पर यह भी बड़ा आरोप है कि वे अपने अधीनस्थ सब-इंस्पेक्टरों और सहायक अवर निरीक्षकों द्वारा किए जा रहे केस के अनुसंधान (इन्वेस्टिगेशन) की समुचित और विधिक निगरानी नहीं कर रहे थे। किसी भी थाने के सुचारू संचालन के लिए थाना प्रभारी का यह मुख्य कर्तव्य होता है कि वह केस डायरी की नियमित समीक्षा करे और जांच कर रहे अधिकारियों को आवश्यक विधिक दिशा-निर्देश जारी करे। मंटू कुमार की इस कार्यशैली के कारण कई महत्वपूर्ण मामलों में समय पर आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल नहीं हो पा रहे थे, जिसका सीधा लाभ अपराधियों को कोर्ट में मिल रहा था। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि भागलपुर के वरीय पुलिस पदाधिकारियों द्वारा समय-समय पर अपराध नियंत्रण को लेकर दिए गए कई महत्वपूर्ण विधिक दिशा-निर्देशों और विशेष टास्क का उनके द्वारा खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा था, जिसे घोर अनुशासनहीनता माना गया है।

नगर पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट में प्रमाणित हुए सभी आरोप

​थाना अध्यक्ष मंटू कुमार के खिलाफ मिल रही इन प्रशासनिक और व्यावहारिक शिकायतों को भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक ने अत्यंत गंभीरता से लिया था। मामले की निष्पक्ष और विधिक जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी भागलपुर के नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) को सौंपी थी। नगर पुलिस अधीक्षक ने जोगसर थाने के पिछले कुछ महीनों के रिकॉर्ड्स, केस डायरियों, लंबित मामलों की सूची और वरीय कार्यालय से जारी किए गए आदेशों के तामील की स्थिति का बहुत गहराई से भौतिक और तकनीकी ऑडिट किया।

​इस विस्तृत जांच के दौरान नगर पुलिस अधीक्षक ने पाया कि न केवल कागजी कामकाज में बल्कि मैदानी स्तर पर भी थानाध्यक्ष द्वारा भारी लापरवाही बरती जा रही थी। आम जनता की शिकायतों का समय पर निवारण न होना और गंभीर कांडों की फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल देना उनकी नियमित कार्यशैली का हिस्सा बन चुका था। नगर पुलिस अधीक्षक ने अपनी जांच पूरी करने के बाद एक समेकित और विधिक रिपोर्ट वरीय पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से प्रमाणित और सही पाया गया। इसी जांच रिपोर्ट को मुख्य विधिक आधार मानते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंटू कुमार को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया।

सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर रहेंगे निलंबित, पुलिस लाइन में दी गई आमद

​निलंबन अवधि के दौरान मंटू कुमार के लिए कड़े प्रशासनिक और विधिक प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। जिलादेश के अनुसार, उन्हें तत्काल प्रभाव से जोगसर थाना अध्यक्ष के पद से हटाते हुए पुलिस केंद्र, भागलपुर (पुलिस लाइन) में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। निलंबन की इस पूरी अवधि के दौरान वे सामान्य जीवन-यापन भत्ता (Subsistence Allowance) पर रहेंगे। बिहार पुलिस नियमावली और प्रशासनिक विधिक प्रावधानों के तहत, जब किसी पुलिस अधिकारी को निलंबित किया जाता है, तो उसे उसके नियमित वेतन के स्थान पर केवल जीवन-यापन के लिए एक निश्चित अंशकालिक राशि ही देय होती है, और वह किसी भी मुख्यधारा की पुलिसिंग या फील्ड ड्यूटी का हिस्सा नहीं बन सकता है।

​इस निलंबन के साथ ही मंटू कुमार के खिलाफ एक नियमित विभागीय कार्यवाही (Departmental Proceedings) चलाने का भी रास्ता साफ हो गया है। पुलिस लाइन में उनकी आमद दर्ज होने के बाद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को इस विभागीय जांच का संचालन अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो उनके खिलाफ लगे आरोपों पर उनसे स्पष्टीकरण मांगेंगे। यदि विभागीय जांच में भी ये आरोप पूरी तरह सिद्ध हो जाते हैं, तो उनके सेवा रिकॉर्ड पर इसका बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसके अंतर्गत भविष्य में उनके प्रमोशन पर रोक या वेतन वृद्धि रोकने जैसी बड़ी विधिक सजाएं भी दी जा सकती हैं।

जिले के अन्य थानों के लिए वरीय पुलिस अधीक्षक का कड़ा संदेश

​जोगसर थाना अध्यक्ष पर की गई इस आकस्मिक और बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के माध्यम से भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक ने जिले के सभी शहरी और ग्रामीण थानों के प्रभारियों को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट विधिक संदेश दे दिया है। पुलिस मुख्यालय का साफ मानना है कि जनता की सुरक्षा और विधिक अनुसंधान के कार्य में किसी भी स्तर पर की गई कोताही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वर्तमान समय में जब भागलपुर पुलिस द्वारा “स्वस्थ युवा स्वस्थ भागलपुर” जैसी विशेष मुहिम चलाई जा रही है और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है, ऐसे में पुलिस अधिकारियों का स्वयं लापरवाह होना विभाग की छवि को धूमिल करता है।

​वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (SDPO) और अंचल निरीक्षकों को भी यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के थानों का नियमित और औचक निरीक्षण करें। थानों में लंबित पड़े पुराने केसों की समीक्षा की जाए और यदि कोई अन्य थाना अध्यक्ष भी अनुसंधान में रुचि नहीं ले रहा है या वरीय कार्यालय के आदेशों को हल्के में ले रहा है, तो उसकी रिपोर्ट भी तुरंत जिला मुख्यालय को भेजी जाए। जोगसर थाने के सुचारू संचालन और वहां कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जिला मुख्यालय द्वारा बहुत जल्द ही एक नए और मुस्तैद पुलिस अधिकारी को वहां का नया थाना अध्यक्ष नियुक्त करने की विधिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है, ताकि आम जनता को अपनी शिकायतों के निवारण के लिए किसी प्रकार की व्यावहारिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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