गांधी मैदान से सम्राट चौधरी ने 80 हाई-टेक दमकल वाहनों को दिखाई हरी झंडी: एआई नियंत्रण कक्ष का उद्घाटन, जन-शिकायतों पर लापरवाह अफसर होंगे सस्पेंड

पटना, 18 मई 2026। बिहार में आपदा प्रबंधन प्रणालियों के आधुनिकीकरण, ढांचागत सुदृढ़ीकरण और प्रशासनिक जवाबदेही को वैश्विक मानकों के समकक्ष ले जाने की दिशा में सोमवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ा गया। राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित एक भव्य और तकनीकी रूप से सुसज्जित राजकीय समारोह के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार अग्निशमन सेवा के बेड़े में शामिल किए गए 80 नए अत्याधुनिक और हाई-टेक अग्निशमन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर प्रदेश की जनता को समर्पित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रिमोट कंट्रोल के डिजिटल विन्यास के माध्यम से राज्य के पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित आधुनिक अग्निशमन नियंत्रण कक्ष का विधिक उद्घाटन भी संपन्न किया।

​समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अग्निशमन सेवा के जवान केवल सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वे विपरीत परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर नागरिकों की जीवन सुरक्षा करने वाले वास्तविक वीर योद्धा हैं। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और सुशासन को कड़ाई से लागू करने के उद्देश्य से कल (19 मई) से शुरू हो रहे पंचायत स्तरीय सहयोग शिविरों को लेकर अधिकारियों को एक अत्यंत कड़ा और अभूतपूर्व अल्टीमेटम जारी किया है, जिसके तहत तय समय-सीमा में काम न करने वाले अधिकारियों को सीधे सस्पेंड करने का प्रावधान किया गया है।

प्रशासनिक व्यय में कटौती के लिए सभी सरकारी विभावों को ‘एआई’ अपनाने का निर्देश

​समारोह के मुख्य नीतिगत सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शासन व्यवस्था में आधुनिकतम तकनीकों के समावेशन पर विशेष बल दिया। उन्होंने घोषणा की कि वर्तमान युग पूरी तरह से डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, जिसे ध्यान में रखते हुए बिहार अग्निशमन सेवा ने अपने नियंत्रण कक्षों में इसके उपयोग की एक क्रांतिकारी शुरुआत की है। एआई आधारित यह नया नियंत्रण कक्ष राज्य भर से आने वाली आगजनी की आपातकालीन सूचनाओं का वास्तविक समय (रियल-टाइम) में विश्लेषण करने, घटना स्थल की सटीक भौगोलिक अवस्थिति (जीपीएस मैपिंग) ट्रैक करने और नजदीकी दमकल केंद्र से त्वरित वाहन रवाना करने की प्रविधियों को स्वचालित रूप से संधारित करेगा।

​तकनीकी दक्षता के आर्थिक आयामों को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के सभी प्रशासनिक विभागों के लिए एक दूरगामी और कड़ा निर्देश जारी किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी विकास योजनाओं और निर्माण कार्यों के बजटीय आकलनों (इस्टिमेट्स) में पारदर्शिता लाने और वित्तीय भ्रष्टाचार को ब्लॉक करने में एआई तकनीक एक अचूक हथियार साबित हो सकती है।

मुख्यमंत्री का नीतिगत निर्देश विलेख:

“यदि किसी विकास कार्य का सरकारी इस्टिमेट 1 लाख रुपया निर्धारित होता है और उसमें एआई प्रणालियों की मदद ली जाती है, तो तकनीकी शुद्धता के कारण लगभग 5 से 6 प्रतिशत तक की ‘कॉस्ट कटिंग’ (लागत में कमी) सुनिश्चित की जा सकती है। अतः भविष्य में बिहार का कोई भी सरकारी विभाग बिना एआई तकनीक से तकनीकी स्क्रूटनी और विधिक जांच कराए किसी भी बजटीय इस्टिमेट की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान नहीं करेगा।”

 

अत्याधुनिक अग्निशामक उपकरणों की प्रदर्शनी और वाटर सैल्यूटिंग का भव्य शो

​गांधी मैदान के मुख्य प्रांगण में बिहार अग्निशमन सेवा द्वारा नवीनतम वैश्विक तकनीकों पर आधारित एक व्यापक और ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया था, जिसका मुख्यमंत्री ने गहन अवलोकन किया। इस दौरान विभाग की महानिदेशक शोभा अहोतकर और वरिष्ठ तकनीकी कमांडरों ने मुख्यमंत्री को प्रदर्शनी में शामिल अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों की कार्यप्रणाली से विस्तार से अवगत कराया।

​निरीक्षण के दौरान जिन हाई-टेक उपकरणों के संबंध में विस्तृत तकनीकी इनपुट्स साझा किए गए, उनमें मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए प्रयुक्त होने वाला न्यूमेटिक एयरलिफ्टिंग बैग, संकरे द्वारों को तोड़ने के लिए सिंगल एक्टिंग कॉम्पैक्ट हाइड्रोलिक डोर ओपनर, जहरीली गैसों के बीच ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने वाला सेल्फ कंटेंड ब्रीदिंग एपरेटस (SCBA) और जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए हाइड्रोलिक डिवॉटरिंग पंप शामिल थे। इसके अतिरिक्त, भीषण गर्मी के दौरान जवानों को झुलसने से बचाने वाले कूलिंग वेस्ट, तीव्र दबाव वाले हाई प्रेशर पोर्टेबल पंप, ढांचागत सुरक्षा के लिए पावर शोरिंग सिस्टम, अंधेरे प्रक्षेत्रों को रोशन करने वाली 65,000 ल्यूमेंस की रिमोट एरिया लाइटिंग, जहरीली गैसों की पहचान करने वाली मल्टी गैस डिटेक्टर बैटरी, ऑपरेटेड मिनी कटर और धुएं को बाहर खींचने वाले स्मोक एग्जॉस्टर जैसे विश्वस्तरीय उपकरणों की विवरणी प्रस्तुत की गई।

​इसके उपरांत, विभाग के जांबाज कमांडो दस्ते ने अत्यंत अनुशासित और कड़े शारीरिक कौशल का प्रदर्शन करते हुए आपातकालीन रेस्क्यू ऑपरेशनों का सजीव डेमो प्रस्तुत किया। समारोह के अंतिम चरण में दमकल वाहनों द्वारा हवा में पानी की भव्य बौछारें छोड़कर ‘वाटर सैल्यूटिंग शो’ का विन्यास प्रदर्शित किया गया, जिसने वहां उपस्थित जनसमूह और आला अधिकारियों को विभाग की ताकत, साहस, शक्ति और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण का सीधा दिग्दर्शन कराया।

चौदह करोड़ की आबादी की सुरक्षा का दायित्व: औद्योगिक गलियारों की रणनीतिक कड़ियां

​प्रादेशिक और भौगोलिक अवस्थिति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की कुल आबादी का लगभग दसवां हिस्सा अकेले बिहार की पावन धरती पर निवास करता है। वर्तमान समय में सूबे की जनसंख्या करीब 14 करोड़ के आंकड़े को स्पर्श कर रही है। भौगोलिक और मौसमी विचलनों के कारण बिहार एक बहु-आपदा प्रवण क्षेत्र है, जहां अलग-अलग मौसमों में अग्निकांड, विनाशकारी बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की विसंगतियां निरंतर सामने आती रहती हैं। ऐसी विकट अवस्थितियों के बीच बिहार अग्निशमन सेवा के वर्तमान में कार्यरत 8000 से अधिक प्रशिक्षित जांबाज जवान, जिनमें महिला अग्निशामक कर्मी भी पूरी मुस्तैदी से शामिल हैं, अपनी कार्यकुशलता और दक्षता के बल पर चौबीसों घंटे सूबे की सुरक्षा संधारित कर रहे हैं।

​मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के भीतर न्याय के साथ विकास की जो सुदृढ़ नींव रखी थी, वर्तमान सरकार उसी विजन को और अधिक प्रखर गति से आगे बढ़ा रही है। आज बिहार में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और निर्बाध बिजली जैसी मूलभूत अवसंरचनाओं के निरंतर विस्तार के समानांतर ही बड़े पैमाने पर कल-कारखाने और भारी उद्योग स्थापित करने की दिशा में तीव्र नीतिगत विलेख तैयार किए जा रहे हैं। औद्योगिक विकास के इस दौर में सुरक्षा मानकों को अभेद्य बनाने के लिए अग्निशमन विभाग को अपनी तैयारियों का दायित्व और अधिक कड़ा करना होगा।

​औद्योगिक सुरक्षा प्रणालियों को और अधिक मजबूती प्रदान करने के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बिहार के किशनगंज प्रक्षेत्र में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का एक अत्याधुनिक ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने के ऐतिहासिक निर्णय की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसके साथ ही, उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से एक रणनीतिक आग्रह करते हुए कहा कि चूंकि राज्य सरकार द्वारा गयाजी में एक विशाल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का विन्यास तैयार किया जा रहा है, अतः निवेश की सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्रालय गया में भी सीआईएसएफ का एक अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की दिशा में सकारात्मक पहल करे।

​मुख्यमंत्री ने अपने 1 माह और 3 दिन के संक्षिप्त सेवा काल की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए प्रवासी बिहारियों और देश के बड़े औद्योगिक घरानों से अपनी जन्मभूमि पर निवेश करने की पुरजोर अपील की। उन्होंने संकल्प दोहराया कि नई सरकार के गठन के एक वर्ष पूरा होने की निर्धारित अवधि यानी 20 नवंबर 2026 तक बिहार की धरती पर 5 लाख करोड़ रुपये का औद्योगिक निवेश धरातल पर उतारना उनका मुख्य और सर्वोच्च लक्ष्य है, जिसके लिए निवेशकों को पूर्ण विधिक और सुरक्षात्मक संरक्षण हस्तगत कराया जा रहा है। सुशासन के मानकों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों को पुलिस उन्हीं की भाषा में कड़ा जवाब दे रही है, और इसके लिए पुलिस प्रशासन के हाथ पूरी तरह से खोल दिए गए हैं।

सहयोग शिविर के लिए सख्त 30-दिवसीय कानून: 31वें दिन सीधे सस्पेंड होंगे अधिकारी

​समारोह के अंतिम तकनीकी सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार की प्रशासनिक प्रणालियों में जवाबदेही और लोक सेवकों के आचरण को लेकर अब तक का सबसे कड़ा और ऐतिहासिक विधिक एलान किया। उन्होंने सूचित किया कि राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में कल (19 मई) से बहुप्रतीक्षित “सहयोग शिविर” कार्यक्रम की भौतिक और वास्तविक शुरुआत होने जा रही है। इस अभियान की गंभीरता को प्रमाणित करने के लिए वे स्वयं कल सारण जिले के सोनपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाली किसी एक ग्राम पंचायत में आयोजित होने वाले सहयोग शिविर में व्यक्तिगत रूप से शामिल होकर धरातलीय गतिविधियों, काउंटरों के विन्यास और जन-सहभागिता का औचक प्रशासनिक ऑडिट संधारित करेंगे।

​पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले इन नियमित सहयोग शिविरों की कार्यप्रणाली को विधिक रूप से बाध्यकारी बनाते हुए मुख्यमंत्री ने समय-सीमा का एक अत्यंत कड़ा और गैर-समझौतावादी टाइम-फ्रेम घोषित किया है:

  • 30 दिनों की विधिक समय-सीमा: शिविर के भीतर नागरिकों द्वारा राशन, पेंशन, भूमि सुधार, केसीसी या बिजली से जुड़ी जन-शिकायतों के जितने भी आवेदन प्रेषित किए जाएंगे, उनका अधिकतम 30 दिनों के भीतर हर हाल में अंतिम विधिक निष्पादन (डिस्पोजल) करना अनिवार्य होगा।
  • 31वें दिन स्वतः निलंबन का विलेख: यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बिना किसी विधिक या न्यायिक कारण के 30 दिनों के भीतर शिकायत का निपटारा करने में असफल पाया जाता है, तो किसी स्पष्टीकरण या जांच के इंतजार के बिना, 31वें दिन संबंधित अधिकारी को मुख्यमंत्री सचिवालय के सीधे आदेश से तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया जाएगा।
  • 10वें और 20वें दिन का प्रोग्रेस सर्विलांस: आवेदन प्राप्त होने के प्रथम 10 दिनों के भीतर संबंधित लोक सेवक के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह मामले के निष्पादन हेतु आवश्यक विधिक नोटिस निर्गत करे। इसके उपरांत, आवेदन के 20वें दिन भी द्वितीय नोटिस प्रेषित कर कार्य की प्रगति रिपोर्ट को अपडेट करना होगा, ताकि 30वें दिन तक अंतिम विधिक आदेश निर्गत किया जा सके।

​मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि माननीय न्यायालयों के अधीन विचाराधीन मुकदमों को छोड़कर आम जनता के किसी भी जायज काम या आवेदन को फाइलों के जाल में अटकाने, भटकाने या टालने की मानसिकता को पूरी कड़ाई से ब्लॉक कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय के स्तर से विकसित किए गए विशेष “सहयोग पोर्टल” के माध्यम से प्राप्त होने वाले हर एक आवेदन की कड़ाई के साथ ‘रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग’ निरंतर संधारित की जाएगी, जिससे बिचौलियों और भ्रष्ट कड़ियों को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।

समारोह में उपस्थित शीर्ष राजनीतिक और प्रशासनिक अमले की कड़ियां

​गांधी मैदान में आयोजित इस अत्यंत गरिमापूर्ण और उच्चस्तरीय समारोह को बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी संबोधित किया, जिन्होंने तकनीकी समावेश के माध्यम से आपदा प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ करने के सरकार के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के विन्यास को सफल बनाने में राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र के शीर्ष कप्तानों ने अपनी भौतिक उपस्थिति दर्ज कराई।

​मंच पर मुख्य रूप से माननीय सांसद देवेश चंद्र ठाकुर, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष उदयकांत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी पूरी कड़ाई के साथ मुस्तैद रहे। इसके अतिरिक्त, गृह विभाग और पुलिस स्थापना के आला अधिकारी जैसे मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD) डॉ. गोपाल सिंह, पटना प्रमंडल के आयुक्त मयंक वरवड़े तथा पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (IG) जितेंद्र राणा सहित विभिन्न विभावों के अनेक वरीय नीति-नियोजक और बिहार अग्निशमन सेवा के सैकड़ों जांबाज जवान पूरी सांगठनिक निष्ठा के साथ इस ऐतिहासिक विलेख के साक्षी बने।

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