
पटना, 15 मई 2026। बिहार में मानसूनी सीजन के आगमन से पहले प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन और कृषि सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के भौगोलिक परिदृश्य में उत्तर बिहार जहां हर वर्ष भीषण बाढ़ की विभीषिका झेलता है, वहीं दक्षिण बिहार के कई जिलों में अल्प वृष्टि के कारण सुखाड़ की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इन दोनों विपरीत और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने और कृषि कार्य को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग ने अपनी विधिक और तकनीकी तैयारियां तेज कर दी हैं। सिंचाई भवन, पटना स्थित मुख्य सभागार में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में संभावित बाढ़ सुरक्षात्मक कार्यों और आगामी खरीफ फसल की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय स्तर के सभी मुख्य अभियंताओं के साथ रणनीतिक विमर्श किया गया और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
समय सीमा से पहले गुणवत्तापूर्ण कार्य पूरा करने की विधिक हिदायत
उच्चस्तरीय बैठक के विधिक तकनीकी सत्र का संचालन करते हुए उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने सभी प्रमंडलीय और क्षेत्रीय अभियंताओं को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि वे बाढ़ और सुखाड़ से जुड़े सभी सुरक्षात्मक और बुनियादी कार्यों को तय समय-सीमा से काफी पहले पूरा करना सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य समाप्ति की अंतिम तिथि की प्रतीक्षा करने की विभागीय सुस्ती अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय से पहले कार्य पूरा होने का सबसे बड़ा विधिक लाभ यह होता है कि आवश्यकता पड़ने पर तकनीकी विशेषज्ञ उन कार्यों का पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) कर सकते हैं और यदि संरचनाओं में कोई कमी या तकनीकी त्रुटि पाई जाती है, तो उसे समय रहते दुरुस्त किया जा सकता है।
विभाग के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए यह घोषणा की गई कि जो भी अधिकारी और अभियंता फील्ड में मुस्तैदी दिखाकर उत्कृष्ट और पारदर्शी तरीके से कार्य संपन्न कराएंगे, उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके विपरीत, जिन क्षेत्रों में जानबूझकर कोताही बरतने, वित्तीय अनियमितता करने या बाढ़ पूर्व सुरक्षात्मक कार्यों में ढिलाई बरतने की बात सामने आएगी, वहां संबंधित अभियंताओं और संवेदकों (कॉन्ट्रैक्टर्स) के खिलाफ कड़ी दंडात्मक और विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में निर्माण और मरम्मति की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
तटबंधों की चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग और स्थानीय लोगों से समन्वय का निर्देश
राज्य के बाढ़ प्रवण (फ्लड प्रोन) क्षेत्रों की गहन समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने नदी कटाव निरोधी कार्यों की प्रगति, तटबंधों की मरम्मति एवं उनके नियमित अनुरक्षण की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि मानसून की अवधि शुरू होते ही सभी संवेदनशील और अति-संवेदनशील स्थलों पर बाढ़ सुरक्षात्मक सामग्रियों (जैसे सैंड बैग्स, जियो बैग्स, बोल्डर्स आदि) का पर्याप्त भंडारण पहले से ही सुनिश्चित कर लिया जाए ताकि किसी भी आपातकालीन दरार या रिसाव की स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
बाढ़ के समय सबसे बड़ी जिम्मेदारी तटबंधों की सुरक्षा की होती है। इस संदर्भ में निर्देश दिया गया कि बाढ़ प्रवण नदियों के किनारे बने तटबंधों की पूरी लंबाई पर क्षेत्रीय अभियंताओं और सुरक्षा दलों द्वारा चौबीसों घंटे सघन पेट्रोलिंग (गश्ती) की जाए। लगातार भौतिक निरीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि तटबंधों में कोई ऐसा छोटा सुराख या क्षति न रह जाए जो बाद में बड़ी आपदा का रूप ले ले। इसके लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे केवल कागजी दावों पर निर्भर न रहकर स्वयं फील्ड में उतरें और स्थानीय ग्रामीणों व जिला प्रशासन के साथ निरंतर संवाद और लाइव संपर्क बनाए रखें। स्थानीय लोगों का सहयोग बाढ़ प्रबंधन में सबसे बड़ा हथियार साबित होता है क्योंकि वे जमीनी बदलावों को सबसे पहले भांप लेते हैं।
नहरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना प्राथमिकता, अतिक्रमण पर कड़ा रुख
सुखाड़ की संभावित स्थिति और आगामी खरीफ फसल के लिए पानी की मांग को देखते हुए बैठक में सिंचाई प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य की सभी मुख्य और उप-नहर प्रणालियों का अंतिम छोर (टेल एंड) तक भौतिक निरीक्षण किया जाए। सरकार का मुख्य विधिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पानी की अंतिम बूंद भी खेतों तक पहुंचे ताकि किसानों को सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर न रहना पड़े और उनकी कृषि लागत को कम किया जा सके।
इस संबंध में सभी मुख्य अभियंताओं को आदेश दिया गया कि वे ऐसे क्षेत्रों और नहरों की एक विशेष सूची तैयार करें, जहां पिछले वर्ष किन्हीं कारणों से अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाया था। उन क्षेत्रों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर जलमार्गों की गाद सफाई (सिल्ट सफाई) और आवश्यक मरम्मति का कार्य तुरंत शुरू किया जाए और इसकी प्रगति रिपोर्ट सीधे पटना मुख्यालय को भेजी जाए। नहरों के जल प्रवाह में बाधा उत्पन्न करने वाले अतिक्रमण (एन्क्रोचमेंट) या अन्य स्थानीय जटिल मामलों के त्वरित निपटारे के लिए संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों (डीएम) और जिला प्रशासन के साथ मजबूत समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है ताकि विधिक रूप से अतिक्रमण हटाकर जल प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके।
शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और तकनीकी निगरानी का रोडमैप
इस उच्चस्तरीय और महत्वपूर्ण बैठक की शुरुआत में जल संसाधन विभाग के सचिव चंद्रशेखर सिंह ने उप मुख्यमंत्री का स्वागत किया और एक विस्तृत प्रजेंटेशन के माध्यम से राज्यभर में चल रही योजनाओं की वर्तमान विधिक और भौतिक स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने आश्वस्त किया कि विभाग बाढ़ सुरक्षा, तटबंध अनुरक्षण और नहरों के पुनर्स्थापन से संबंधित सभी तकनीकी कार्यों को मानसून की पहली बारिश से पहले हर हाल में पूरा करने के लिए पूरी क्षमता के साथ काम कर रहा है ताकि किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति का मुकाबला पेशेवर तरीके से किया जा सके।
सिंचाई भवन के सभागार में आयोजित इस विमर्श में विभाग के विशेष सचिव के.डी. प्रौज्जवल, अभियंता प्रमुख वरुण कुमार, अभियंता प्रमुख ब्रजेश मोहन, अभियंता प्रमुख अनवर जमील सहित बाढ़, जल-निकासी और सिंचाई प्रक्षेत्र के सभी मुख्य अभियंता प्रत्यक्ष रूप से और बिहार के विभिन्न जिलों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन जुड़े रहे। बैठक में यह भी तय किया गया कि आने वाले दिनों में मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं विभिन्न जिलों का औचक निरीक्षण करेंगे ताकि धरातल पर हो रहे कार्यों की वास्तविक गुणवत्ता को परखा जा सके और किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी तात्कालिक समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट विधिक समाधान निकाला जा सके।


