बिहार में डालमिया समूह लगाएगा दो बड़ी सीमेंट फैक्ट्रियां, निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की बैठक में 2484 करोड़ के प्रस्तावों को मिली मंजूरी

पटना, 15 मई 2026। बिहार के औद्योगिक विकास को एक नई और अभूतपूर्व रफ्तार देने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़े कॉर्पोरेट निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की विधिक प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया गया है, जिसके तहत देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों में शुमार डालमिया समूह को बिहार में दो बड़े सीमेंट विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए हरी झंडी दे दी गई है। राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एसआईपीबी) की 67वीं उच्चस्तरीय बैठक में इस रणनीतिक निवेश को स्टेज-1 क्लीयरेंस प्रदान कर दिया गया। यह निवेश बिहार के दो अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों— उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर और सीमांचल के किशनगंज जिले की आर्थिक तस्वीर को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है। डालमिया समूह द्वारा किए जा रहे इस ₹1000 करोड़ से अधिक के पूंजी निवेश से न केवल राज्य की सीमेंट उत्पादन क्षमता में भारी इजाफा होगा, बल्कि भारी मात्रा में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन भी होगा।

मुजफ्फरपुर और किशनगंज में स्थापित होंगी 2.5M MTPA क्षमता की इकाइयां

​निवेश प्रोत्साहन बोर्ड से प्राप्त आधिकारिक विरण के अनुसार, डालमिया समूह बिहार के दो रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने जा रहा है। इन दोनों परियोजनाओं की विधिक और तकनीकी रूपरेखा को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है:

  • मुजफ्फरपुर (महवल औद्योगिक क्षेत्र): इस क्षेत्र में डालमिया भारत ग्रीन विजन लिमिटेड द्वारा एक विशाल सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल प्राक्कलित लागत ₹573.15 करोड़ निर्धारित की गई है। इस कारखाने की वार्षिक उत्पादन क्षमता 2.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (M MTPA) होगी। मुजफ्फरपुर के महवल में इस संयंत्र के आने से पूरे उत्तर बिहार में सीमेंट की आपूर्ति सुगम होगी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति मिलेगी।
  • किशनगंज परियोजना: सीमांचल और पूर्वोत्तर भारत के बाजारों को लक्षित करते हुए किशनगंज जिले में डालमिया सीमेंट (नॉर्थ ईस्ट) लिमिटेड द्वारा एक और बड़ा संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में डालमिया समूह ₹573.76 करोड़ का भारी-भरकम पूंजी निवेश करने जा रहा है। इस विनिर्माण इकाई की क्षमता भी 2.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (M MTPA) तय की गई है। किशनगंज में इस स्तर की औद्योगिक इकाई की स्थापना से इस सीमावर्ती क्षेत्र में औद्योगिक विकास का एक नया अध्याय शुरू होगा।

पारदर्शी और त्वरित विधिक प्रक्रिया से निवेशकों का बढ़ा भरोसा

​बिहार के औद्योगिक परिदृश्य में आ रहे इस सकारात्मक बदलाव को लेकर उद्योग विभाग के नीतिगत स्तर पर कड़े और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की बैठक के बाद उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि बिहार अब देश के भीतर बड़े उद्योगों के लिए एक पसंदीदा और सुरक्षित गंतव्य के रूप में तेजी से स्थापित हो रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की नीतियां पूरी तरह से पारदर्शी, समयबद्ध और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस प्रणाली पर आधारित हैं, जिससे निवेशकों को किसी भी स्तर पर लालफीताशाही या फाइलों की सुस्ती का सामना न करना पड़े। उद्योग मंत्री के अनुसार, उद्योगों की स्थापना के लिए न केवल जमीन और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं त्वरित गति से उपलब्ध कराई जा रही हैं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा के मोर्चे पर भी निवेशकों को पूरा प्रशासनिक संरक्षण दिया जा रहा है। यही कारण है कि देश-विदेश के बड़े औद्योगिक समूह अब बिहार के विभिन्न जिलों में अपनी विनिर्माण इकाइयां लगाने के लिए लगातार आगे आ रहे हैं।

बियाडा और आइडा का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बना निवेश का मुख्य आधार

​इस उच्चस्तरीय बैठक के प्रशासनिक और ढांचागत पहलुओं की जानकारी देते हुए उद्योग विभाग के सचिव सह बियाडा (BIADA) एवं आइडा (AIDA) के प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार ने कहा कि औद्योगिक समूहों का यह भरोसा अचानक नहीं आया है, बल्कि इसके पीछे पिछले कुछ वर्षों में बिहार के औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए किए गए कड़े प्रशासनिक प्रयास हैं। बियाडा के तहत आने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम, निर्बाध बिजली आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक और वैश्विक स्तर का बनाया गया है।

​कुंदन कुमार ने स्पष्ट किया कि राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की 67वीं बैठक में डालमिया समूह की दो बड़ी सीमेंट परियोजनाओं को मिली स्टेज-1 की स्वीकृति इस बात का स्पष्ट विधिक प्रमाण है कि बिहार अब केवल एक उपभोक्ता राज्य नहीं रह गया है, बल्कि उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत धाक जमा रहा है। किशनगंज और मुजफ्फरपुर में प्रस्तावित ये दोनों सीमेंट परियोजनाएं स्थानीय स्तर पर कच्चे माल की खपत और परिवहन उद्योग को एक नया आयाम देंगी, जिससे एक पूरा औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित होगा।

डालमिया के साथ अंबुजा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के कई बड़े प्रस्तावों को मंजूरी

​एसआईपीबी की इस 67वीं बैठक का दायरा केवल सीमेंट उद्योग तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसमें विविध प्रकार के 16 बड़े औद्योगिक निवेश प्रस्तावों को स्टेज-1 क्लीयरेंस प्रदान किया गया, जिनकी कुल विधिक निवेश राशि ₹2484.06 करोड़ है। इसके अतिरिक्त, ₹46.86 करोड़ की लागत वाली 4 अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं को अंतिम वित्तीय स्वीकृति (Financial Approval) भी दे दी गई।

​बैठक में स्वीकृत किए गए अन्य प्रमुख औद्योगिक प्रस्तावों और कंपनियों का विवरण इस प्रकार है:

  • अंबुजा सीमेंट: सीमेंट क्षेत्र की एक और बड़ी कंपनी अंबुजा समूह के निवेश प्रस्ताव को भी बोर्ड द्वारा सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की गई है, जो राज्य में अपनी क्षमता का विस्तार करेगी।
  • केएनएसजी एल्युमिनियम प्राइवेट लिमिटेड: मेटल और एल्युमिनियम प्रोसेसिंग क्षेत्र में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए इस कंपनी के प्रस्ताव को विधिक मंजूरी मिली है।
  • एस राजदेव बिल्ड्ज एलएलपी: इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट से जुड़े विनिर्माण क्षेत्र में निवेश के लिए इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया गया है।
  • आइकॉन स्पाइरल इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड: इलेक्ट्रॉनिक्स और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में बिहार को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से इस इकाई को स्टेज-1 क्लीयरेंस दिया गया है।
  • सीता एग्रो फूड प्रोडक्ट: बिहार के समृद्ध कृषि क्षेत्र को देखते हुए फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए इस एग्रो-फूड इकाई के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
  • एसएपीएल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड: टेक्सटाइल और अन्य विनिर्माण विधाओं से जुड़ी इस कंपनी को भी बोर्ड ने अपनी विधिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।

क्षेत्रीय आर्थिक संतुलन और रोजगार सृजन को मिलेगी अभूतपूर्व गति

​उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, निवेश प्रोत्साहन बोर्ड द्वारा दी गई इन सभी स्वीकृतियों के पीछे मुख्य विधिक दृष्टिकोण राज्य के भीतर क्षेत्रीय आर्थिक संतुलन स्थापित करना है। मुजफ्फरपुर जहां पूरे उत्तर बिहार के वाणिज्यिक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है, वहीं किशनगंज जैसे सीमावर्ती और सुदूर जिलों में भारी-भरकम उद्योगों की स्थापना से स्थानीय आबादी का पलायन पूरी तरह से थमेगा। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से स्थानीय स्तर पर हजारों कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों व तकनीकी विशेषज्ञों के लिए रोजगार के नए साधन पैदा होंगे। सीमेंट और एल्युमिनियम जैसे भारी उद्योगों के आने से स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक्स, ट्रक ट्रांसपोर्टेशन, पैकेजिंग मैटेरियल और अन्य सहायक कुटीर उद्योगों का एक व्यापक नेटवर्क तैयार होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सीधे तौर पर नकदी प्रवाह का लाभ मिलेगा। बैठक के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि इन स्वीकृत परियोजनाओं के भूमि आवंटन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्वीकृतियों जैसे अगले विधिक चरणों को भी एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पारदर्शी तरीके से पूरा कर लिया जाए ताकि फैक्ट्रियों के निर्माण का वास्तविक कार्य मैदानी स्तर पर अविलंब शुरू हो सके।

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