
पटना, 18 मई 2026। बिहार सरकार के प्रशासनिक विन्यास को और अधिक उत्तरदायी तथा लोक-कल्याणकारी प्राथमिकताओं के प्रति सजग बनाने के उद्देश्य से वरिष्ठ स्तर पर महत्वपूर्ण दायित्वों का हस्तांतरण सुनिश्चित किया गया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2001 बैच के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी राजेश कुमार ने सोमवार को आधिकारिक रूप से बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के नए प्रधान सचिव के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया। विभाग के मुख्य मुख्यालय स्थित विकास भवन में इस प्रशासनिक प्रक्रम को बेहद कड़े और सुचारू विन्यास के तहत पूरा किया गया। राजेश कुमार के नए नेतृत्व में विभाग की कमान सौंपे जाने से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी प्रक्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति, नल-जल योजना के संधारण और जल गुणवत्ता निगरानी प्रणालियों को एक नई प्रशासनिक ऊर्जा और प्रखर गति प्राप्त होगी।
मुख्यालय के वरिष्ठ नीतिगत कप्तानों द्वारा भव्य अगवानी और विधिक अभिनंदन
पदभार ग्रहण करने के उद्देश्य से विकास भवन स्थित मुख्य कार्यालय में आगमन के उपरांत नए प्रधान सचिव राजेश कुमार का स्वागत विभागीय परंपराओं और प्रशासनिक शुचिता के अनुसार किया गया। विभाग के अभियंता प्रमुख-सह-विशेष सचिव (मुख्यालय) नित्यानंद प्रसाद और विशेष सचिव संजीव कुमार ने संयुक्त रूप से पुष्प गुच्छ भेंट कर नए प्रधान सचिव का आत्मीय अभिनंदन किया। इसके तुरंत बाद विभाग के मुख्य प्रशासनिक प्रभाग, तकनीकी विंग और वित्तीय प्रभाग के विभिन्न वरीय अधिकारियों, उपनिदेशकों और पटल सहायकों ने भी एक-एक कर प्रधान सचिव का स्वागत किया।
नए प्रधान सचिव ने उपस्थित सभी विभावों के कप्तानों के साथ औपचारिक परिचय विनिमय संपन्न किया और कार्यालयी व्यवस्थाओं की अवस्थिति को परखा। इस स्वागत प्रक्रम के दौरान अधिकारियों के भीतर नए नेतृत्व को लेकर एक नई कार्य-संस्कृति की उत्सुकता देखी गई, क्योंकि राजेश कुमार को पूर्व में राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण तकनीकी और विकासात्मक विभागों में कड़े अनुशासन के साथ कार्य करने का एक लंबा और प्रामाणिक प्रशासनिक अनुभव प्राप्त है।
पदभार संभालते ही उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, विभागीय योजनाओं का गहन तकनीकी मूल्यांकन
प्रशासनिक औपचारिकताओं को मुकम्मल करने के तुरंत बाद प्रधान सचिव राजेश कुमार पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने कार्यभार संधारित करने के कुछ ही मिनटों के भीतर विभाग के मुख्य विमर्श कक्ष में सभी प्रमंडलीय मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं और नीति योजनाकारों के साथ एक उच्चस्तरीय और सघन समीक्षा बैठक का विन्यास किया। इस महत्वपूर्ण सांगठनिक बैठक में अपर सचिव अरविंद कुमार सहित विभाग के विभिन्न विभावों के कप्तान पूरी कड़ाई के साथ उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान अभियंता प्रमुख और तकनीकी सलाहकारों ने एक विस्तृत डिजिटल प्रस्तुतीकरण और अद्यतन संचिकाओं के माध्यम से नए प्रधान सचिव को विभाग द्वारा राज्य भर में संचालित की जा रही विभिन्न मुख्यमंत्री पेयजल निश्चय योजनाओं, केंद्रीय जल जीवन मिशन के विलेखों और वर्तमान गतिविधियों की अद्यतन स्थिति से विस्तार से परिचित कराया। प्रधान सचिव ने एक-एक कर राज्य के सभी 38 जिलों में पाइपलाइन नेटवर्क की भौतिक अवस्थिति, जलापूर्ति केंद्रों की क्रियाशीलता और ग्रीष्म ऋतु के इस प्रचंड दौर में भूजल स्तर में आ रही गिरावट से निपटने के लिए तैयार किए गए आपातकालीन नियंत्रण कक्षों के आंकड़ों का गहन तकनीकी मूल्यांकन किया।
पेयजल की शुद्धता और आर्सेनिक-फ्لوराइड प्रभावित क्षेत्रों के लिए कड़े निर्देश
समीक्षा के क्रम में प्रधान सचिव राजेश कुमार ने जनहित को सर्वोपरि रखते हुए स्पष्ट किया कि प्रत्येक नागरिक तक शुद्ध और सुरक्षित पेयजल की समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना विभाग का सर्वोच्च विधिक दायित्व है। उन्होंने विशेष रूप से गंगा और कोसी प्रक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उन जिलों की कड़ियों की समीक्षा की, जो आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन जैसी भूजल विसंगतियों से गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
प्रधान सचिव ने मुख्य अभियंताओं को कड़े निर्देश जारी किए कि इन प्रभावित इलाकों में स्थापित की गई जल शोधन प्रणालियों (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स) और सामुदायिक सौर-चालित जल प्रणालियों के संचालन में किसी भी प्रकार की लिपिकीय शिथिलता या मानवीय लापरवाही को विधिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आदेश दिया कि सभी प्रमंडलों में स्थापित जल गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाओं (वाटर टेस्टिंग लैब्स) को पूरी क्षमता के साथ लाइव रखा जाए और नियमित अंतराल पर पानी के नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण संधारित किया जाए ताकि दूषित जल से होने वाली जल-जनित बीमारियों के खतरे को पूरी कड़ाई से ब्लॉक किया जा सके।
रखरखाव विन्यास का सुदृढ़ीकरण और शिकायतों के त्वरित डिस्पोजल का टास्क
ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइनों में होने वाले लीकेज और स्थानीय तकनीकी विसंगतियों पर गंभीर रुख अपनाते हुए प्रधान सचिव ने शिकायत निवारण तंत्र के आधुनिकीकरण पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि विभाग के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल्स पर आम उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज कराई जाने वाली विसंगतियों का ऑन-स्पॉट त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
प्रधान सचिव राजेश कुमार का विभागीय निर्देश विलेख:
“विभाग द्वारा निर्मित अवसंरचनाओं की सफलता उनके निरंतर और त्रुटिहीन रखरखाव पर टिकी होती है। ग्रामीण वार्डों में नल-जल की आपूर्ति में यदि किसी तकनीकी खराबी के कारण बाधा आती है, तो उसे स्थानीय स्तर पर प्रतिनियुक्त तकनीशियनों और अनुरक्षकों के माध्यम से तय समय-सीमा के भीतर दुरुस्त करना अनिवार्य होगा। फाइलों को अटकाने और तकनीकी बहानों के सहारे जनता को प्रताड़ित करने की प्रवृत्ति को पूरी कड़ाई से ब्लॉक किया जाएगा।”
उन्होंने सभी प्रखंड स्तरीय कनिष्ठ अभियंताओं को कड़ा टास्क सौंपा कि वे स्वयं क्षेत्रों का भौतिक दौरा करें और पंचायतों में आयोजित होने वाले विशेष प्रशासनिक शिविरों में प्राप्त होने वाले आवेदनों की सत्यता को परखकर रिपोर्ट सीधे मुख्यालय को प्रेषित करें।
ठेकेदारों की मनमानी पर रोक और वित्तीय बजटीय आवंटन का पारदर्शी उपयोग
बैठक के अंतिम चरण में बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं के निर्माण कार्यों की समयबद्धता की समीक्षा की गई। प्रधान सचिव राजेश कुमार ने कड़े शब्दों में संदेश जारी किया कि जो भी जलापूर्ति योजनाएं वर्तमान समय में निर्माणाधीन हैं, उन्हें निर्धारित टाइमलाइन के भीतर पूरी तकनीकी गुणवत्ता के साथ पूर्ण करना होगा। निर्माण कार्यों में लगी आउटसोर्सिंग कोशिकाओं और ठेकेदारों की मनमानी को रोकने के लिए उन्होंने कड़े सर्विलांस तंत्र को क्रियाशील करने की बात कही।
उन्होंने स्पष्ट किया कि घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग या समय पर काम पूरा न करने वाले डिफाल्टर ठेकेदारों के विलेखों की समीक्षा कर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की विधिक कार्रवाई तुरंत अमल में लाई जाएगी। इसके साथ ही, चालू वित्तीय वर्ष के बजटीय आवंटन का शत-प्रतिशत और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय सलाहकारों को कड़े दिशानिर्देश दिए गए। बैठक में उपस्थित अपर सचिव अरविंद कुमार ने नए प्रधान सचिव को आश्वस्त किया कि मुख्यालय से लेकर फील्ड स्तर तक के सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी निष्ठा और सांगठनिक अनुशासन के साथ इन नीतिगत निर्देशों का अनुपालन धरातल पर सुनिश्चित करेंगे ताकि सूबे के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के लक्ष्यों को एक नया और सुदृढ़ धरातल प्रदान किया जा सके।


