बिहार के बैंकिंग इतिहास में नया कीर्तिमान: पहली बार 60 प्रतिशत के पार पहुंचा सीडी रेशियो, विकास आयुक्त ने कृषि और प्राथमिक प्रक्षेत्रों में पूंजी प्रवाह बढ़ाने का दिया कड़ा निर्देश

पटना, 18 मई 2026। बिहार के आर्थिक विन्यास और वित्तीय प्रणाली के सुदृढ़ीकरण की दिशा में सोमवार को एक युगांतरकारी सफलता दर्ज की गई है। राज्य की धरती पर औद्योगिक गतिविधियों, व्यापारिक निवेश और बैंकिंग साख के विस्तार को रेखांकित करने वाला क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो (सीडी रेशियो) इतिहास में पहली बार 60 प्रतिशत की विधिक और रणनीतिक सीमा को पार कर गया है। योजना एवं विकास विभाग के मुख्य सभागार में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय राज्य स्तरीय बैंकिंग समीक्षा बैठक के दौरान सूबे के इस ऐतिहासिक बैंकिंग प्रदर्शन, ऋण वितरण प्रणालियों और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में वित्तीय प्रवाह की सघन और बिंदुवार समीक्षा की गई।

​बैठक के दौरान विभिन्न राष्ट्रीयकृत, निजी व्यावसायिक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के जमा-ऋण अनुपात के आंकड़े प्रस्तुत किए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों और नीतिगत कड़ाई के कारण बिहार के नागरिकों की जमा-पूंजी अब बड़े पैमाने पर राज्य के भीतर ही ऋण के रूप में री-सर्कुलेट हो रही है। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने इस बड़ी उपलब्धि को राज्य सरकार के विभिन्न प्रशासनिक विभागों, बैंकिंग संस्थानों और धरातल पर काम करने वाले आर्थिक समन्वयकों के सामूहिक प्रयासों का एक सुखद और दूरगामी परिणाम बताया।

छह लाख करोड़ के पार पहुंची संचयी जमा राशि, ऋण वितरण में आई अभूतपूर्व तेजी

​वित्तीय वर्ष 2025-26 की इस उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान जो आधिकारिक वित्तीय विलेख प्रस्तुत किए गए, वे बिहार की तेजी से सुदृढ़ होती आंतरिक अर्थव्यवस्था की गवाही दे रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, बिहार ने इस वित्तीय वर्ष में 60.21 प्रतिशत का संचयी सीडी रेशियो हासिल करने का गौरव प्राप्त किया है। अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के तहत इस अनुपात का 60 फीसदी से अधिक होना किसी भी राज्य के लिए एक अत्यंत सकारात्मक आर्थिक संकेतक माना जाता है, क्योंकि यह प्रमाणित करता है कि बैंकों में जमा होने वाले धन का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर ही कृषि, बुनियादी ढांचे और लघु उद्योगों को सशक्त बनाने के लिए ऋण के रूप में वितरित किया जा रहा है। इससे पूंजी के पलायन (कैपिटल फ्लाइट) पर प्रभावी रोक लगती है।

​वित्तीय विन्यास की गहराई में जाएं तो राज्य की विभिन्न बैंक शाखाओं में कुल जमा राशि (डिपॉजिट) छलांग लगाकर 6,15,428 करोड़ रुपये के विशाल स्तर पर पहुंच गई है। इसके समानांतर, बैंकों द्वारा किया गया कुल ऋण वितरण (क्रेडिट) भी बढ़कर 3,70,563 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलनात्मक कड़ियों की समीक्षा करने पर यह पाया गया कि राज्य में जमा राशि के ग्राफ में जहां 51,983 करोड़ रुपये की सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है, वहीं ऋण वितरण के मामले में भी 37,882 करोड़ रुपये का बड़ा उछाल आया है, जो राज्य के भीतर बढ़ती उद्यमशीलता और बाजार में पूंजी की तरलता को दर्शाता है।

2018 से 2026 तक का प्रगति चक्र: ग्रामीण और अर्ध-शहरी प्रक्षेत्रों को मिली नई ऊर्जा

​विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने बिहार के इस आर्थिक कायाकल्प के ऐतिहासिक चक्र को स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्ष 2018-19 के दौरान बिहार का सीडी रेशियो महज 44.09 प्रतिशत के अत्यंत आंशिक और निराशाजनक स्तर पर संधारित था। उस कालखंड में राज्य की पूंजी का एक बड़ा हिस्सा दूसरे औद्योगिक राज्यों के विकास में डाइवर्ट हो जाता था, जिसे रोकने के लिए राज्य सरकार ने पिछले वर्षों में कड़े नियम और निरंतर डिजिटल मॉनिटरिंग की प्रविधि अपनाई। पिछले सात-आठ वर्षों के भीतर लगातार की गई प्रशासनिक कड़ाई और नीतिगत सुधारों का नतीजा है कि यह अनुपात आज 60.21 प्रतिशत के ऐतिहासिक आंकड़े तक पहुंच सका है।

​ऋण प्रवाह के इस सुदृढ़ विन्यास के कारण राज्य के प्राथमिक प्रक्षेत्रों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME), ग्रामीण स्वरोजगार योजनाओं, महिला सशक्तिकरण के तहत काम करने वाले स्वयं सहायता समूहों, नए तकनीकी स्टार्टअप्स और कृषि से जुड़े सहायक व्यवसायों को एक नया जीवनदान प्राप्त हुआ है। पूंजी की इस सुलभ उपलब्धता ने बिहार के ग्रामीण और अर्ध-शहरी प्रक्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को एक नई और तीव्र गति प्रदान की है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

किसान क्रेडिट कार्ड प्रणालियों का सरलीकरण और ‘जन समर्थ’ पोर्टल के साथ डिजिटल एकीकरण

​ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार यानी किसानों की वित्तीय आवश्यकताओं की समीक्षा करते हुए विकास आयुक्त ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर सबसे अधिक बल दिया। उन्होंने बैंकों के वरिष्ठ प्रबंधकों को कड़े निर्देश जारी किए कि किसानों को उनकी फसलों और कृषि इनपुट्स के लिए समय पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, और इसमें किसी भी प्रकार की लिपिकीय ढिलाई या तकनीकी विलंब को विधिक रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता।

​सभी बैंकों को हिदायत की गई है कि वे केसीसी के नए आवेदनों की स्वीकृति और पुराने कार्डों के नवीनीकरण (रिन्यूअल) की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाएं। कृषि ऋणों की इस पूरी प्रविधि को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए यह बड़ा नीतिगत निर्णय लिया गया है कि किसान क्रेडिट कार्ड योजना को अब सीधे “जन समर्थ” पोर्टल के साथ एकीकृत (इंटीग्रेट) किया जाएगा। इस डिजिटल एकीकरण के बाद किसान बिना दफ्तरों के चक्कर काटे, ऑनलाइन माध्यम से अपनी पात्रता की जांच कर सकेंगे और सीधे उनके खातों में पारदर्शी तरीके से ऋण की राशि प्रेषित कर दी जाएगी।

19 मई से शुरू होगा ‘सहयोग शिविर’ का महाअभियान, हर 15 दिन पर सुलझेंगी समस्याएं

​आम जनता, किसानों और छोटे उद्यमियों को बैंकों के स्थानीय काउंटरों पर होने वाली व्यावहारिक प्रताड़ना और विसंगतियों से मुक्ति दिलाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के दिशा-निर्देशन में एक बड़े और क्रांतिकारी अभियान का खाका तैयार किया गया है। बैठक में यह आधिकारिक घोषणा की गई कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा स्वयं पहल करते हुए आम जनता की बैंकिंग और वित्तीय समस्याओं के ऑन-स्पॉट निवारण के लिए 19 मई 2026 से “सहयोग शिविर” का भव्य शुभारंभ किया जा रहा है।

​इस शुरुआती आयोजन के बाद, प्रत्येक 15 दिनों के नियमित अंतराल पर राज्य के विभिन्न प्रक्षेत्रों और ग्राम पंचायतों में इन विशेष शिविरों का आयोजन कड़ाई के साथ संधारित किया जाएगा। इन सहयोग शिविरों के भीतर मुख्य रूप से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से जुड़े लंबित आवेदनों, बैंक अधिकारियों द्वारा कागजी विलेखों में किए जा रहे अनावश्यक विलंब, नवीनीकरण की समस्याओं और आम उपभोक्ताओं की अन्य गंभीर बैंकिंग शिकायतों का आमने-सामने बैठकर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।

बेहतर वित्तीय प्रदर्शन करने वाले शीर्ष दस बैंकिंग संस्थानों का विवरण

​वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान बिहार की धरती पर ऋण वितरण के मामले में कुछ चुनिंदा बैंकों ने उत्कृष्ट और विस्मयकारी प्रदर्शन करते हुए निर्धारित लक्ष्यों से कहीं अधिक का सीडी रेशियो दर्ज किया है। इन संस्थाओं की सक्रियता की विकास आयुक्त द्वारा सराहना की गई:

  1. स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक: इस सहकारी संस्था ने पूरे राज्य में सबसे शीर्ष स्थान प्राप्त करते हुए 168.78 प्रतिशत का अभूतपूर्व सीडी रेशियो दर्ज किया है।
  2. बंधन बैंक: निजी क्षेत्र के इस बैंक ने ग्रामीण और महिला प्रक्षेत्रों में कड़ा ऋण प्रवाह दिखाते हुए 153.32 प्रतिशत का प्रदर्शन किया है।
  3. बैंक ऑफ महाराष्ट्र: राष्ट्रीयकृत बैंकों की कतार में इस बैंक ने 145.72 प्रतिशत के सीडी रेशियो के साथ अपनी मजबूत अवस्थिति दर्ज कराई है।
  4. एचडीएफसी बैंक: निजी बैंकिंग क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हुए इस संस्थान ने 95.87 प्रतिशत का सीडी रेशियो हासिल किया है।
  5. कोटक महिंद्रा बैंक: इस बैंक का प्रदर्शन भी 95.57 प्रतिशत के उच्च स्तर पर संधारित पाया गया।
  6. आईसीआईसीआई बैंक: इस संस्थान ने 82.37 प्रतिशत के सीडी रेशियो के साथ राज्य के विकास में अपना महत्वपूर्ण वित्तीय योगदान दिया है।
  7. एक्सिस बैंक: निजी क्षेत्र का यह बैंक 77.16 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर संधारित दर्ज किया गया।
  8. बिहार ग्रामीण बैंक: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के रूप में इस बैंक ने 64.95 प्रतिशत का सीडी रेशियो हासिल कर ग्रामीण साख को मजबूत किया है।
  9. पंजाब एंड सिंध बैंक: इस बैंक ने भी 64.26 प्रतिशत के साथ राज्य के औसत को बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाई है।
  10. जम्मू एंड कश्मीर बैंक: इस बैंकिंग संस्थान का सीडी रेशियो भी 63.11 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर संधारित पाया गया।

कम ऋण वितरण करने वाले बड़े बैंकों के रवैये पर जताई गई गहरी प्रशासनिक चिंता

​एक तरफ जहां कुछ सहकारी और निजी बैंकों ने शानदार प्रदर्शन किया है, वहीं दूसरी तरफ देश के कई सबसे बड़े और स्थापित राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा बिहार के भीतर ऋण वितरण के मामले में दिखाए गए उदासीन रवैये पर बैठक के भीतर गहरी प्रशासनिक चिंता और असंतोष व्यक्त किया गया। विकास आयुक्त ने इन बैंकों की डिफाल्टर प्रवृत्तियों को रेखांकित करते हुए उनके वरिष्ठ प्रबंधकों को कड़े विलेख जारी किए हैं। कम सीडी रेशियो वाले प्रमुख बैंकों की अवस्थिति इस प्रकार दर्ज की गई है:

  • इंडियन ओवरसीज बैंक: इस बैंक का सीडी रेशियो पूरे राज्य में सबसे निचले स्तरों में से एक यानी महज 42.20 प्रतिशत पर अटका हुआ है।
  • आईडीबीआई बैंक: निवेश के बड़े दावों के बावजूद यह बैंक बिहार में केवल 43.47 प्रतिशत का ही ऋण प्रवाह सुनिश्चित कर सका है।
  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI): देश के इस सबसे बड़े बैंकिंग नेटवर्क का बिहार के भीतर सीडी रेशियो महज 43.63 प्रतिशत पाया जाना बेहद चिंताजनक है, क्योंकि राज्य का एक बहुत बड़ा जमा धन इसी बैंक के विन्यासों में संचित रहता है।
  • बैंक ऑफ इंडिया: इस विशाल सरकारी बैंक का प्रदर्शन भी 43.73 प्रतिशत के अत्यंत निराशाजनक स्तर पर संधारित दर्ज किया गया है।
  • पंजाब नेशनल बैंक (PNB): इस बैंक का सीडी रेशियो भी केवल 44.57 प्रतिशत के स्तर को ही छू सका है।

​विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने इन सभी कम प्रदर्शन करने वाले बैंकों के शीर्ष नीति-नियंताओं को सख्त चेतावनी देते हुए निर्देश दिया कि वे अपनी ऋण वितरण प्रणालियों में तत्काल आमूलचूल सुधार लाएं। उन्होंने साफ किया कि बिहार की जनता से जमा के रूप में पूंजी एकत्र करके उसे राज्य के विकास में लोन के रूप में न लगाना एक गंभीर आर्थिक विसंगति है। इन बैंकों को आगामी तिमाही के भीतर कृषि, एमएसएमई और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अपने ऋण प्रवाह को दोगुना करने का कड़ा टास्क सौंपा गया है। इस महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय वित्तीय समीक्षा बैठक में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के मुख्य प्रतिनिधियों, विभिन्न बैंकों के महाप्रबंधकों, क्षेत्रीय निदेशकों और राज्य सरकार के वित्त व योजना विभाग के सभी वरीय नीतिगत अधिकारी उपस्थित रहे।

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