
पटना, 20 मई 2026। बिहार सरकार के विभिन्न प्रशासनिक विभावों द्वारा राज्य की आर्थिक संचेतना, सुरक्षात्मक ग्रिड और अवसंरचनात्मक ढांचे को नया विन्यास प्रदान करने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय प्रक्रम मुकम्मल किया गया है। राजधानी पटना के मुख्य सचिवालय स्थित कैबिनेट हॉल में बुधवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की एक उच्चस्तरीय बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े कुल 13 नीतिगत प्रस्तावों (एजेंडा) को विधिक रूप से स्वीकृत किया गया।
बैठक के उपरांत मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सूचना भवन के प्रेस संभाग में मीडिया कप्तानों को संबोधित करते हुए इन स्वीकृतियों के व्यावहारिक और प्रशासनिक निहितार्थों की विस्तृत जानकारी साझा की। सरकार के इन दूरगामी फैसलों में जहां एक तरफ सुदूर क्षेत्रों तक स्वास्थ्य प्रणालियों को सुचारू बनाने के कड़े वित्तीय प्रबंध किए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ सूबे की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी और आंतरिक रक्षा प्रक्षेपों को अभेद्य बनाने के विधिक ब्लूप्रिंट को लाइव किया गया है।
औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन: नालंदा और कैमूर प्रक्षेत्रों की इकाइयों को मिली विधिक वित्तीय मंजूरी
राज्य के भीतर निजी पूंजी के एकीकरण और औद्योगिक विनिर्माण क्षमताओं के विस्तार को गति देने के लिए उद्योग विभाग के दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंत्रिपरिषद द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन क्लीयरेंस हस्तगत कराया गया है। इसके तहत नालंदा जिले के बेन अंचल के अंतर्गत अरावण प्रक्षेत्र में स्थापित संधारित होने वाली मेसर्स पटेल वेयरहाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड की अवसंरचना को बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली-2016 के नियम-7 के उप नियम (2)(iv) के तहत विधिक वित्तीय प्रोत्साहन की मंजूरी दी गई है।
इसी नियमावली के समान विनिर्देशों और नियम-7 के उप नियम (2)(iv) के दायरे में कड़ाई से कदम बढ़ाते हुए कैमूर जिले के कुदरा प्रक्षेत्र में कार्यरत मेसर्स ई एस ई एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के व्यावसायिक प्रतिष्ठान को भी वित्तीय प्रोत्साहन की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इन दोनों औद्योगिक विन्यासों को हरी झंडी मिलने से क्षेत्रीय स्तर पर कुशल और अकुशल कार्यबल के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के नए साधन लाइव मोड पर सृजित होंगे, जिससे अंचल से होने वाले श्रम पलायन को आंशिक रूप से ब्लॉक किया जा सकेगा।
आईएमसी गयाजी जलापूर्ति योजना: जलाशय निर्माण के लिए ₹428.083 करोड़ की भारी प्रशासनिक स्वीकृति
औद्योगिक विकास के लिए बुनियादी संसाधनों की उपलब्धता को नियमित करने के कड़े संकल्प के तहत जल संसाधन विभाग द्वारा एक बड़ा अवसंरचनात्मक ढांचा संरेखित किया गया है। गया जिले के डोभी प्रखंड के अंतर्गत विकसित हो रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC), गयाजी की भविष्य की गंभीर औद्योगिक आवश्यकताओं और जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
कैबिनेट द्वारा उद्योगों को निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशाल जलाशय के निर्माण और उससे जुड़ी कतिपय आवश्यक तकनीकी सहायक प्रणालियों के विकास के लिए कुल ₹428.083 करोड़ की भारी-भरकम प्रशासनिक एवं व्यय राशि को विधिक रूप से स्वीकृत किया गया है। यह जलाशय परियोजना वर्षा आधारित जलग्रहण क्षेत्रों के जल संचय के विन्यास पर कार्य करेगी, जिससे प्रक्षेत्र की औद्योगिक विनिर्माण इकाइयों को जल संकट के अवसादों से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकेगा।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और स्थानीय निकायों का सुचारू वित्तीय हस्तांतरण
पंचायती राज और वित्त विभाग के स्तर से ग्रामीण स्थानीय निकायों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण और प्राथमिक चिकित्सा ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए दो बड़े नीतिगत स्तंभों को लाइव किया गया है:
- हेल्थ सेक्टर ग्रांट: वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आलोक में ग्रामीण स्थानीय निकायों को भारत सरकार से हस्तगत होने वाली ‘Health Sector Grant’ मद की राशि को ससमय निर्गत करने के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से कुल ₹747,97,64,000 (सात सौ सैंतालीस करोड़ संतानवे लाख चौंसठ हजार रुपये) की विशाल अग्रिम राशि की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस पूंजी प्रवाह से ग्रामीण अंचलों में औषधियों और लाइफ-सपोर्ट प्रणालियों की उपलब्धता आसान होगी।
- षष्ठम राज्य वित्त आयोग का विस्तार: स्थानीय निकायों के दैनिक जन कल्याणकारी विकास कार्यों में किसी भी प्रकार के बजटीय अवरोध को पूरी तरह से ब्लॉक करने के उद्देश्य से वित्त विभाग के एक विशेष प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई है। इसके तहत षष्ठम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा अवधि के व्यावहारिक क्रियान्वयन को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधिक रूप से विस्तारित करने की स्वीकृति दी गई है, ताकि सप्तम आयोग की सिफारिशें प्राप्त होने तक नगर निकायों और पंचायतों को अनुदान हस्तांतरण का लूप निरंतर चालू संधारित रहे।
विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग का पुनर्गठन: लागू होगी नई ‘यंग प्रोफेशनल चयन नीति-2026’
विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के आंतरिक प्रशासनिक ढांचे को अधिक चुस्त, परिणामोन्मुख और आधुनिक बनाने के वास्ते पदों के युक्तिकरण का एक कड़ा सांगठनिक प्रक्रम स्वीकृत किया गया है। इसके तहत बिहार काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी, पटना और उसके अधीनस्थ क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए पूर्व में स्वीकृत कुल 94 पदों के विन्यास में से 87 पुराने पदों को पूरी तरह से प्रत्यर्पित (सरेंडर) करने का विधिक निर्णय लिया गया है। इस प्रत्यर्पण के साथ ही सुचारू व आधुनिक कामकाज के संचालन हेतु पदाधिकारियों और तकनीकी कर्मियों के कुल 53 नए अतिरिक्त पदों के सृजन को हरी झंडी दिखाई गई है।
इसके अतिरिक्त, विभाग और उसके नियंत्रण में संचालित विभिन्न तकनीकी संस्थानों के भीतर अत्याधुनिक विशेषज्ञ सेवाओं और तकनीकी इनपुट्स की त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से “यंग प्रोफेशनल चयन नीति-2026” के प्रारूप को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी गई है। इस नई नीति के लाइव होने से तकनीकी पृष्ठभूमि के प्रतिभावान युवाओं की बौद्धिक सेवाओं को न्यूनतम समय-सीमा के भीतर हासिल किया जा सकेगा, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव शोध और नवाचार प्रणालियों पर परिलक्षित होगा।
सुरक्षा व्यवस्था का आधुनिक चक्रव्यूह: आंतरिक रक्षा अभेद्य करने के लिए सृजित होगा ‘आईजी बॉर्डर’ का पद
गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने राज्य की बाह्य सीमाओं की संप्रभुता को पुख्ता करने और आंतरिक सुरक्षा तंत्र को अधिक धारदार बनाने के मोर्चे पर दो बहुत बड़े दूरगामी फैसले मुकम्मल किए हैं:
- आईजी बॉर्डर पद का सृजन: सूबे की अंतरराष्ट्रीय (नेपाल सीमा प्रक्षेप) और अंतरराज्यीय सीमावर्ती सुरक्षा प्रणालियों की कड़क निगरानी करने तथा खुफिया एवं आसूचना (Intelligence) ग्रिड को अत्याधुनिक व तकनीकी रूप से अधिक विकसित बनाने के उद्देश्य से विशेष शाखा (Special Branch) के तहत ‘पुलिस महानिरीक्षक, बॉर्डर’ (IG, Border) के 1 नए पद के सृजन को विधिक प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
- एसटीएफ प्रतिनियुक्ति का विस्तार: वामपंथी उग्रवाद (LWE) की बची-खुची कड़ियों पर प्रभावी नियंत्रण संधारित करने और उनके पूर्ण निरोध के वास्ते विशेष कार्य बल (STF) के आक्रामक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) को यह विधिक शक्ति प्रत्यायोजित की गई है कि वे विशिष्ट दक्षता, आसूचना संग्रहण कौशल और पूर्व ऑपरेशन्स का लंबा अनुभव रखने वाले चिन्हित 50 दक्ष पुलिस कर्मियों को अधिकतम 15 वर्षों की लंबी अवधि तक एसटीएफ के भीतर प्रतिनियुक्ति पर बनाए रख सकें।
खेल अवसंरचना का विस्तार: तीन जिलों में स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के लिए भूमि हस्तांतरण
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के कनिष्ठ खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर का खेल माहौल हस्तगत कराने के उद्देश्य से तीन अलग-अलग जिलों में खेल विभाग को बहुमूल्य सरकारी भूमि अंतर-विभागीय रूप से स्थायी तौर पर निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्तावों को विधिक रूप से क्लियर कर दिया है:
- अरवल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स: करपी अंचल के मौजा-झिकटिया (थाना संख्या-227, खाता संख्या-61, खेसरा संख्या-51) के अंतर्गत आने वाली कुल 06.81 एकड़ गैरमजरूआ मालिक परती कदीम भूमि को एक आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भवन के निर्माण हेतु खेल विभाग, बिहार को स्थायी तौर पर निःशुल्क हस्तांतरित किया गया है।
- औरंगाबाद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स: देव अंचल के विभिन्न भू-खंडों और मौजा के भीतर संधारित कुल 13.09 एकड़ भूमि को ‘स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, देव’ की स्थापना के लिए खेल विभाग को निःशुल्क सौंपने की प्रशासनिक संचिका स्वीकृत की गई है।
- सहरसा आउटडोर स्टेडियम: सलखुआ अंचल के मौजा-कबीरा (थाना संख्या-255, खाता संख्या-1025, खेसरा संख्या-522) के तहत अवस्थित कुल 06.61 एकड़ अनावाद बिहार सरकार की भूमि को मुख्यमंत्री विकास योजना के अंतर्गत एक विशाल आउटडोर स्टेडियम के निर्माण के वास्ते खेल विभाग को स्थायी रूप से स्थानांतरित करने की मंजूरी दी गई है।
सिविल विमानन: गयाजी-बैंकॉक सीधी अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवा के लिए इंडिगो का चयन, ₹10.40 करोड़ का वीजीएफ मंजूर
उड्डयन के क्षेत्र में बिहार की कनेक्टिविटी को अंतरराष्ट्रीय फलक पर प्रखर गति देने के लिए सिविल विमानन विभाग ने एक ऐतिहासिक कूटनीतिक और व्यावसायिक फैसला पटल पर रखा है। नए अंतरराष्ट्रीय वायु मार्गों पर सीधी हवाई संपर्कता का विस्तार करने की नीति के तहत आमंत्रित निविदा के आलोक में मेसर्स इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) का चयन नामांकन के आधार पर मुकम्मल किया गया है। इंडिगो एयरलाइंस द्वारा अब गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के लिए गैर-स्टॉप सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा लाइव की जाएगी।
इस अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग के सुचारू परिचालन को वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान करने और शुरुआती परिचालन घाटे को संतुलित करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने ‘व्यवहार्यता अंतर निधि’ (Viability Gap Funding – VGF) के रूप में अधिकतम 12 महीनों की समयावधि के लिए कुल ₹10,40,00,000 (दस करोड़ चालीस लाख रुपये) की संचयी राशि की प्रशासनिक एवं व्यय स्वीकृति प्रदान की है। इस सीधी उड़ान सेवा के प्रारंभ होने से वैश्विक बौद्ध सर्किट से जुड़े विदेशी श्रद्धालुओं का गयाजी, बोधगया, राजगीर और नालंदा आगमन सुगम हो जाएगा, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर हॉस्पिटैलिटी, होटल व्यवसाय, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प व्यापार को एक नया और प्रखर आर्थिक बूस्ट हस्तगत होगा।


