पप्पू यादव का ‘सिस्टम’ पर विस्फोटक प्रहार: “बेरोजगारी भत्ता नहीं, अब ‘सेक्स पेंशन’ शुरू करे सरकार”; नेताओं और अफसरों पर लगाए बेहद संगीन आरोप

न्यूज डायरी: पूर्णिया सांसद के बयानों से सियासी गलियारों में आया ‘भूचाल’

  • विवादित मांग: पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बेरोजगारी भत्ता और छात्रवृत्ति को बंद कर ‘सेक्स पेंशन’ और ‘सेक्स भत्ता’ शुरू करने की वकालत की है।
  • नेताओं पर हमला: सांसद का दावा है कि देश के 90% नेता और अधिकारी सेक्स रैकेट के दलदल में धंसे हुए हैं।
  • गोवा का जिक्र: गोवा में एक मंत्री और 20 लड़कियों से जुड़े कथित वायरल वीडियो का हवाला देकर नैतिकता पर उठाए सवाल।
  • बड़ी क्रांति की पुकार: पप्पू यादव ने कहा कि ड्रग्स से ज्यादा अब बच्चियों को नेताओं और अफसरों से बचाने के लिए ‘महाक्रांति’ की जरूरत है।
  • गैस संकट की चेतावनी: दिल्ली में गैस के लिए 5 किलोमीटर लंबी लाइनों और पांच राज्यों के चुनाव के बाद घरेलू गैस बंद होने की भविष्यवाणी।

पूर्णिया | 29 मार्च, 2026

​बिहार की राजनीति में अपनी बेबाकी और तल्ख तेवरों के लिए मशहूर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे देश के राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे की चूलें हिला दी हैं। पप्पू यादव ने सीधे तौर पर व्यवस्था को ‘चरित्रहीन’ करार देते हुए ऐसी मांग रख दी है, जिस पर बहस छिड़ना तय है। उन्होंने कहा कि जिस देश में रक्षक ही भक्षक बन जाएं, वहां बेरोजगारी के नाम पर पैसे बांटना बेमानी है। सांसद ने सार्वजनिक मंच से घोषणा की कि अब समय आ गया है जब सरकार को बेरोजगारी पेंशन जैसे तमाम भत्तों को बंद कर ‘सेक्स पेंशन’ और ‘सेक्स भत्ता’ शुरू कर देना चाहिए।

“90% नेता और अधिकारी सेक्स रैकेट में शामिल”: पप्पू यादव का सीधा वार

​पप्पू यादव ने अपने संबोधन में किसी का नाम लिए बिना सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों पर प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश में जो लोग नीति निर्धारण का काम कर रहे हैं, उनमें से 90 प्रतिशत नेता और बड़े अधिकारी खुद सेक्स रैकेट जैसी घिनौनी गतिविधियों में लिप्त हैं। उन्होंने इसे एक संगठित अपराध की तरह बताया जो सिस्टम की जड़ों को खोखला कर रहा है।

​सांसद ने गोवा के एक कथित मामले का जिक्र करते हुए सनसनी फैला दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में गोवा में एक ऐसा वीडियो चर्चा में है जिसमें एक प्रभावशाली मंत्री और करीब 20 लड़कियां शामिल हैं। पप्पू यादव के अनुसार, यह वीडियो इस बात का प्रमाण है कि सत्ता की हवस किस तरह से महिलाओं और बच्चियों के शोषण में तब्दील हो चुकी है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना वैश्विक स्तर पर चर्चित ‘जेफरी एपस्टीन’ मामले से करते हुए कहा कि भारत के कोने-कोने में अब ‘एपस्टीन’ जैसे लोग और उनके ठिकाने (कोने) फैल चुके हैं।

“ड्रग्स से ज्यादा डरावने हैं नेता और अफसर”: बच्चियों को बचाने की अपील

​पप्पू यादव ने समाज के सामने खड़ी चुनौतियों का एक नया खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि अब तक हम युवाओं को ड्रग्स और सूखे नशे (स्मैक, अफीम) से बचाने की लड़ाई लड़ने की बात कर रहे थे, लेकिन अब स्थिति उससे कहीं अधिक भयावह हो चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब लड़कियों को नशे से ज्यादा इन भ्रष्ट और रसूखदार नेताओं और अधिकारियों से बचाने की जरूरत है।

​सांसद ने समाज से एक ‘बड़ी क्रांति’ का आह्वान करते हुए कहा कि देश में हमारी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। जब कानून बनाने वाले और उसे लागू करने वाले ही शोषण के गिरोह चलाएंगे, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब सिस्टम का चरित्र ही ऐसा हो गया है, तो छात्रवृत्ति और बेरोजगारी भत्ता बांटने का कोई मतलब नहीं रह जाता; सरकार को खुलकर अपनी असलियत स्वीकार कर लेनी चाहिए।

गैस संकट और आर्थिक ‘लॉकडाउन’ की भविष्यवाणी

​भाषण के दूसरे हिस्से में पप्पू यादव ने देश की आर्थिक और रसद स्थिति पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने दावा किया कि देश में गैस (LPG) के लिए त्राहिमाम मचा हुआ है और सरकार इसे छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में गैस सिलेंडर पाने के लिए 5-5 किलोमीटर लंबी लाइनें लग रही हैं।

​सांसद ने इसे एक बड़े संकट की आहट बताते हुए कहा कि सरकार ने अभी केवल कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित की है, लेकिन यह तो बस शुरुआत है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि जैसे ही पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होंगे, सरकार आम लोगों (घरेलू उपभोक्ताओं) को भी गैस देना बंद कर देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी लाभ के लिए अभी तक सच्चाई को दबाकर रखा गया है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही आम आदमी की रसोई पर ताला लग जाएगा।

सांसद के बयानों का विश्लेषण: क्या यह हताशा है या चेतावनी?

​पप्पू यादव का ‘सेक्स पेंशन’ वाला बयान निश्चित रूप से विवादों को जन्म देगा, लेकिन इसके पीछे छिपे उनके गुस्से को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वे समाज की उस कड़वी सच्चाई की ओर इशारा कर रहे हैं जहाँ आए दिन ‘हनीट्रैप’ और ‘यौन शोषण’ के मामलों में रसूखदार लोगों के नाम सामने आते हैं।

  • राजनीतिक प्रतिक्रिया: पप्पू यादव के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज होने की संभावना है। जहां उनके समर्थक इसे ‘व्यवस्था पर चोट’ बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे ‘मर्यादाहीन राजनीति’ का हिस्सा करार दे रहे हैं।
  • प्रशासनिक साख: 90% अधिकारियों पर लगे इस गंभीर आरोप के बाद प्रशासनिक हलकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। सवाल यह उठता है कि क्या सांसद के पास इन आरोपों को पुख्ता करने के लिए कोई ठोस सबूत हैं?
  • गैस संकट की जमीनी हकीकत: दिल्ली और अन्य महानगरों में गैस की किल्लत की बात अगर सच है, तो यह आने वाले दिनों में सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, खासकर चुनावी मौसम में।

निष्कर्ष: सुशासन और सुरक्षा पर बड़ा सवाल

​पप्पू यादव ने अपनी इस ‘आग उगलती’ स्पीच से न केवल सरकार को घेरा है, बल्कि समाज के सामने एक आईना भी रखा है। बेरोजगारी भत्ता बंद करने की बात कहकर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि जब तक महिलाओं की सुरक्षा और नेताओं का चरित्र नहीं सुधरेगा, तब तक आर्थिक मदद बेअसर है। उनके द्वारा की गई ‘बड़ी क्रांति’ की बात क्या रंग लाती है और गैस संकट पर उनकी भविष्यवाणी कितनी सच साबित होती है, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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