
बिहार सरकार के ने मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना को लेकर प्रकाशित एक समाचार पर विस्तृत तथ्यात्मक स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट कहा है कि योजना के क्रियान्वयन, अनुश्रवण और अनुरक्षण व्यवस्था से जुड़ी कई जानकारियां अपूर्ण और भ्रामक तरीके से प्रस्तुत की गई हैं, जिससे लोगों के बीच गलत धारणा बन सकती है। विभाग ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और योजना का क्रियान्वयन व्यापक स्तर पर सफलतापूर्वक जारी है।
विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, दैनिक भास्कर के पटना संस्करण में 27 जून 2026 को प्रकाशित खबर में मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के संबंध में कुछ आंकड़ों और तथ्यों को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया। विभाग का कहना है कि इससे योजना की वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। इसी कारण पंचायती राज विभाग ने योजना की मौजूदा स्थिति और तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करना जरूरी समझा।
मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराना है, ताकि बिजली की निर्भरता कम हो और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा तथा सुविधा दोनों बढ़ाई जा सके। विभाग के अनुसार राज्यभर में इस योजना के तहत कुल 11,73,740 सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
विभाग ने बताया कि इस लक्ष्य के मुकाबले अब तक 11,25,606 सोलर स्ट्रीट लाइटों का सफलतापूर्वक अधिष्ठापन पूरा किया जा चुका है। यह कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 96 प्रतिशत है, जो योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है। विभाग का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में सोलर स्ट्रीट लाइटों का सफल इंस्टॉलेशन ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
समाचार में यह दावा किया गया था कि लगभग 2.16 लाख सोलर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। पंचायती राज विभाग ने इस दावे को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। विभाग के अनुसार 27 जून 2026 की CMS रिपोर्ट के आधार पर 72 घंटे से अधिक समय से खराब पड़ी सोलर स्ट्रीट लाइटों की संख्या मात्र 1,090 है। यह संख्या कुल स्थापित लाइटों की तुलना में बेहद कम है और इसे बड़े पैमाने पर खराबी के रूप में प्रस्तुत करना गलत है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि 26,580 सोलर स्ट्रीट लाइटें “Signal Loss” श्रेणी में दर्ज हैं। विभाग के अनुसार Signal Loss का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित लाइट बंद है या काम नहीं कर रही। इसका सीधा संबंध नेटवर्क या संचार व्यवस्था से होता है। कई बार तकनीकी कारणों, इंटरनेट कनेक्टिविटी या डेटा ट्रांसमिशन में बाधा के कारण किसी यूनिट का सिग्नल मॉनिटरिंग सिस्टम तक नहीं पहुंच पाता। ऐसी स्थिति में लाइट का वास्तविक संचालन प्रभावित हो यह आवश्यक नहीं है।
पंचायती राज विभाग ने योजना के अनुरक्षण तंत्र पर भी विस्तृत जानकारी दी। विभाग के अनुसार कार्यकारी एजेंसियों के साथ स्पष्ट सेवा स्तर समझौता यानी Service Level Agreement लागू किया गया है। इसके तहत यदि किसी सोलर स्ट्रीट लाइट में खराबी आती है और उसकी सूचना प्राप्त होती है, तो संबंधित एजेंसी को 72 घंटे के भीतर मरम्मत करना अनिवार्य है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि खराब उपकरण लंबे समय तक बंद न रहें।
विभाग ने यह भी बताया कि यदि तय समयसीमा के भीतर मरम्मत कार्य पूरा नहीं होता, तो अनुबंध की शर्तों के अनुरूप संबंधित एजेंसी पर आर्थिक दंड लगाया जाता है। यह व्यवस्था जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है ताकि रखरखाव में लापरवाही न हो। विभाग का कहना है कि इसी कारण अधिकांश तकनीकी समस्याओं का समाधान निर्धारित समय के भीतर कर लिया जाता है।
योजना में पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीकी साधनों का भी उपयोग किया जा रहा है। विभाग ने बताया कि MGSSLY_CMS नाम से एक मोबाइल ऐप विकसित किया गया है। इस ऐप के माध्यम से आम नागरिक सीधे शिकायत दर्ज कर सकते हैं यदि उनके क्षेत्र की कोई सोलर स्ट्रीट लाइट काम नहीं कर रही हो। शिकायत दर्ज होने के बाद उसकी ऑनलाइन निगरानी की जाती है और संबंधित एजेंसी को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं।
यह डिजिटल व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक आधारित निगरानी को मजबूत बना रही है। विभाग का कहना है कि इससे नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और समस्या समाधान की प्रक्रिया तेज होती है। यह व्यवस्था सरकार की डिजिटल गवर्नेंस नीति का भी हिस्सा है।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राज्य के सभी जिला समाहरणालयों में एलईडी टीवी भी लगाए गए हैं। इन स्क्रीन पर Centralized Monitoring System यानी CMS के माध्यम से ग्राम पंचायतों में स्थापित सोलर स्ट्रीट लाइटों की अद्यतन स्थिति लगातार प्रदर्शित की जाती है। इससे जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी वास्तविक समय में योजना की निगरानी कर सकते हैं।
विभाग ने बताया कि केवल डिजिटल मॉनिटरिंग पर ही निर्भर नहीं रहा जा रहा है, बल्कि क्षेत्रीय अधिकारी नियमित रूप से ग्राम पंचायतों का निरीक्षण भी करते हैं। निरीक्षण के दौरान वे सोलर स्ट्रीट लाइटों की कार्यशीलता, तकनीकी स्थिति और स्थानीय शिकायतों की समीक्षा करते हैं। जहां आवश्यकता होती है, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी योजनाएं केवल ऊर्जा बचत का माध्यम नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और सतत विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। रात के समय बेहतर रोशनी से ग्रामीण सड़कों पर आवागमन सुरक्षित होता है और सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।
पंचायती राज विभाग ने अंत में स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण अनुरक्षण, तकनीकी अनुश्रवण और पूर्ण पारदर्शिता के प्रति विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विभाग ने लोगों से अपील की कि किसी भी भ्रमित करने वाली जानकारी पर विश्वास करने से पहले आधिकारिक तथ्यों को जरूर देखें। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण बिहार में आधुनिक और टिकाऊ बुनियादी सुविधाएं हर पंचायत तक पहुंचें।


