भागलपुर में पंचायत सचिवों का महासमागम, पांच सूत्री मांगों को लेकर सरकार को चेतावनी

भागलपुर, 28 अप्रैल 2026। बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ, जिला शाखा भागलपुर के तत्वावधान में सिकंदरपुर स्थित एक मैरेज हॉल में पंचायत सचिवों का एक बड़ा महासमागम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में भागलपुर और मुंगेर प्रमंडल के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पंचायत सचिव शामिल हुए। महासमागम का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर एकजुटता दिखाना और सरकार तक अपनी आवाज को मजबूती से पहुंचाना था।

कार्यक्रम के दौरान पंचायत सचिवों ने एक स्वर में अपनी पांच सूत्री मांगों को उठाया और स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब सरकार को इन मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए। महासमागम में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं को लागू करने में पंचायत सचिवों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।

बड़ी संख्या में जुटे पंचायत सचिव

इस महासमागम में भागलपुर प्रमंडल के अलावा मुंगेर प्रमंडल से भी पंचायत सचिवों की भारी भागीदारी देखने को मिली। सभा स्थल पर सुबह से ही पंचायत सचिवों का आना शुरू हो गया था। सभी ने अपनी-अपनी समस्याओं और अनुभवों को साझा किया और एक साझा रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम के दौरान मंच से वक्ताओं ने पंचायत सचिवों की भूमिका, उनके कार्यभार और वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पंचायत सचिव गांव स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त सुविधाएं और अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं।

पांच सूत्री मांगें बनीं केंद्र बिंदु

महासमागम का मुख्य आकर्षण पंचायत सचिवों की पांच प्रमुख मांगें रहीं, जिन्हें लेकर सभी ने एकजुट होकर आवाज उठाई। इन मांगों में अंतरजिला स्थानांतरण की सुविधा, शैक्षणिक योग्यता के आधार पर पदनाम परिवर्तन कर GPRO (ग्राम पंचायत राज पदाधिकारी) बनाना, ग्रेड-पे को 2000 रुपये से बढ़ाकर 4200 रुपये करना, 2000 रुपये का परिवहन भत्ता देना तथा BPRO पद पर प्रोन्नति के लिए उम्र सीमा 55 वर्ष की बाध्यता समाप्त करना शामिल है।

पंचायत सचिवों का कहना है कि इन मांगों के पूरा होने से न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी।

सरकार को दी चेतावनी

महासमागम के दौरान संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पंचायत सचिव लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो पंचायत सचिव आंदोलन को और व्यापक रूप देने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह महासमागम केवल एक शुरुआत है और आने वाले समय में आंदोलन को राज्य स्तर तक ले जाया जा सकता है।

एकजुटता का प्रदर्शन

कार्यक्रम में शामिल पंचायत सचिवों ने एकजुटता का मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे संगठित रहकर संघर्ष जारी रखेंगे।

सभा के दौरान कई वक्ताओं ने यह भी कहा कि पंचायत सचिवों को प्रशासनिक ढांचे में उचित सम्मान और सुविधाएं मिलनी चाहिए, क्योंकि वे सीधे तौर पर ग्रामीण जनता के संपर्क में रहते हैं और योजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाते हैं।

ग्रामीण विकास से जुड़ा मुद्दा

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत सचिवों की मांगें केवल उनके हित तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह ग्रामीण विकास से भी जुड़ी हुई हैं। यदि पंचायत स्तर पर कार्य करने वाले कर्मियों को बेहतर सुविधाएं और अधिकार मिलते हैं, तो योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकता है।

महासमागम में यह भी चर्चा हुई कि पंचायत सचिवों के कार्यभार में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन उसके अनुरूप संसाधन और सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई हैं। इससे कार्य में कठिनाई होती है और योजनाओं के समय पर क्रियान्वयन में बाधा आती है।

आगे की रणनीति

महासमागम के अंत में पंचायत सचिवों ने यह निर्णय लिया कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं करती है, तो वे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। इसमें धरना-प्रदर्शन, रैली और राज्य स्तर पर बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की योजना शामिल है।

संघ के नेताओं ने कहा कि वे सरकार के साथ संवाद के लिए तैयार हैं, लेकिन यदि उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे।

भागलपुर में आयोजित यह महासमागम पंचायत सचिवों की बढ़ती असंतुष्टि और उनकी एकजुटता का स्पष्ट संकेत है। पांच सूत्री मांगों को लेकर उठी यह आवाज आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन का रूप ले सकती है।

अब नजर सरकार पर है कि वह इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है—क्या पंचायत सचिवों की समस्याओं का समाधान होगा या फिर आंदोलन की राह और तेज होगी।

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