सिवान के पूर्व विधायक हेम नारायण साह की संपत्ति कुर्क करने का आदेश, 2002 के लूटपाट मामले में कोर्ट का सख्त रुख

सिवान, 1 जून 2025 :पूर्व जदयू विधायक हेम नारायण साह एक बार फिर कानूनी कार्रवाई के घेरे में आ गए हैं। सिवान की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने वर्ष 2002 के एक लूटपाट और मारपीट के मामले में उनकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई से न केवल कानूनी हलकों में बल्कि सिवान की सियासत में भी हलचल पैदा हो गई है।

क्या है मामला?

मामला कांड संख्या 418/2002 से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि हेम नारायण साह के इशारे पर 10 से अधिक लोगों ने एक पक्ष के घर में जबरन घुसकर मारपीट, लूटपाट, और हथियारों की चोरी की थी। लूटे गए सामानों में राइफल, गोलियां और नकदी शामिल थीं। पीड़ित पक्ष द्वारा दर्ज कराए गए परिवाद पत्र के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी।

कोर्ट की सख्ती: अनुपस्थिति पर कार्रवाई

हेम नारायण साह लगातार अदालत में अनुपस्थित रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए विशेष एमपी-एमएलए न्यायालय के न्यायाधीश अरविंद कुमार सिंह ने 24 अप्रैल को गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था। इसके साथ ही थाना प्रभारी को शोकॉज नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन इसका पालन नहीं होने पर कोर्ट ने अब संपत्ति कुर्की और इश्तेहार चस्पा करने का निर्देश दिया है।

11 अभियुक्तों पर कार्रवाई

इस मामले में हेम नारायण साह सहित 11 अभियुक्तों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा चल रहा है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया सभी को दोषी मानते हुए उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कठोर कदम उठाए हैं। अब इश्तेहार के माध्यम से सार्वजनिक सूचना दी जाएगी, जिसके बाद भी हाजिर न होने पर घोषित अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

राजनीतिक साख पर असर

हेम नारायण साह सिवान के चर्चित राजनेताओं में रहे हैं। जदयू से विधायक रहे साह का नाम कई बार विवादों में आ चुका है, लेकिन इस बार न्यायिक स्तर पर कड़ी कार्रवाई से उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर इसे “सत्ता और प्रभाव की सीमाओं को तोड़ता न्यायिक फैसला” माना जा रहा है।

आगे की प्रक्रिया

  • कुर्की की प्रक्रिया शुरू करने हेतु इश्तहार चस्पा किया जाएगा।
  • पेशी न होने पर घोषित अपराधी बनाने की प्रक्रिया संभव।
  • अभियुक्तों की संपत्ति की सूची और लोकेशन की जांच शुरू।

पूर्व विधायक हेम नारायण साह के खिलाफ कोर्ट की यह कार्रवाई दिखाती है कि न्यायिक प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों को भी जवाबदेह बनाया जा सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या साह अदालत में पेश होंगे या उनकी गैर-मौजूदगी से मामला और गंभीर होता जाएगा


 

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