बिहार बंद से पहले विपक्ष का विरोध प्रदर्शन तेज, मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया को बताया साजिश

पटना, 8 जुलाई 2025 — बिहार में चल रही विशेष मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया के खिलाफ विपक्षी दलों ने विरोध तेज कर दिया है। बुधवार को प्रस्तावित बिहार बंद से पहले मंगलवार को राज्य के विभिन्न जिलों में विपक्षी दलों ने मार्च निकालकर चुनाव आयोग और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

राजधानी पटना के अलावा गया, भोजपुर, पूर्वी चंपारण, बांका, और मोतिहारी सहित कई जिलों में महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध रैलियां निकालीं। नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एनडीए को फायदा पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार के इशारे पर कार्य कर रहा है और गरीब, दलित, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक समुदायों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रची जा रही है।

भोजपुर में भाकपा-माले के जिला सचिव जवाहरलाल सिंह ने ऐलान किया कि 9 जुलाई को बिहार बंद और चक्का जाम रहेगा। उन्होंने चार श्रम कोड, महंगाई और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले के खिलाफ भी आवाज बुलंद की।

बांका में राजद नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसले को “तुगलकी फरमान” बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। मोतिहारी के छौड़ादानो में पूर्व विधि मंत्री शमीम अहमद ने मशाल जुलूस निकाला और कहा कि आयोग की कार्रवाई एक “राजनीतिक साजिश” है, जिसका उद्देश्य वंचित समुदायों की वोटबंदी करना है।

गया में अंबेडकर पार्क से निकाले गए मशाल जुलूस में राजद सांसद डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि महागठबंधन मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया का पुरजोर विरोध करता है। उन्होंने सरकार पर आम मतदाता के अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया।

बिहार बंद और विरोध प्रदर्शन पर चुनाव आयोग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


 

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