
नई दिल्ली।देश की मौजूदा सुरक्षा और कूटनीतिक परिस्थितियों को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल 16 विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। इन दलों का कहना है कि हाल के पहलगाम आतंकी हमले, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संघर्ष विराम दावे जैसे मुद्दों पर संसद में तत्काल चर्चा होनी चाहिए।
क्यों उठ रही है विशेष सत्र की मांग?
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मामले पर पारदर्शिता नहीं बरत रही। दूसरी ओर, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी विपक्ष ने सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस अभियान की वास्तविक जानकारी देश के सामने रखी जानी चाहिए।
सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को लेकर है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को फोन कर संघर्ष विराम के लिए कहा था, और भारत ने तुरंत उसकी बात मान ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे देश के स्वाभिमान के साथ समझौता बताते हुए सरकार की आलोचना की है।
विपक्ष का साझा मोर्चा
इस बार कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, राजद, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) समेत 16 विपक्षी दल एक मंच पर आकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर इन मुद्दों पर संसद में चर्चा की मांग की गई है। टीएमसी के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि सरकार को जनता और संसद दोनों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा, “हम जानना चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किस देश ने भारत का समर्थन किया और किसने नहीं।” शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने भी संसद में इस पर चर्चा को ज़रूरी बताया है।
सरकार की चुप्पी
फिलहाल सरकार की ओर से विपक्ष की इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सरकार फिलहाल इन मुद्दों पर विशेष सत्र बुलाने के मूड में नहीं है।
राजनीतिक मायने
विशेष सत्र की यह मांग ऐसे समय पर आई है जब सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विश्व के विभिन्न देशों का दौरा करके लौट रहा है। जानकारों का मानना है कि यह विपक्ष की चुनाव पूर्व एकजुटता का संकेत है और सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति भी।


