ऑपरेशन सिंदूर आउटरीच: आतंकवाद के खिलाफ भारत का वैश्विक कूटनीतिक अभियान शुरू, संजय झा के नेतृत्व में भारतीय सांसदों का पहला प्रतिनिधिमंडल रवाना

पांच देशों की यात्रा पर गया सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल, पाकिस्तान की भूमिका उजागर करने की मुहिम

नई दिल्ली, 22 मई 2025:भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत संदेश देने के लिए “ऑपरेशन सिंदूर आउटरीच” नामक एक ऐतिहासिक कूटनीतिक पहल की शुरुआत की है। इस विशेष अभियान के तहत भारत ने बुधवार को सांसदों के पहले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को पांच देशों की यात्रा पर रवाना किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ सांसद संजय कुमार झा कर रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे प्रमुख देशों तक होगी। इसका उद्देश्य पाकिस्तान के आतंकवाद में प्रत्यक्ष और परोक्ष संलिप्तता को विश्व मंच पर उजागर करना है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह अभियान भारत की “जीरो टॉलरेंस टू टेररिज्म” नीति को प्रतिबिंबित करता है और वैश्विक समर्थन जुटाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी, सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास, तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी, पूर्व राजदूत मोहन कुमार सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं। यह पहल भारत के इतिहास में पहली बार इतने व्यापक पैमाने पर बहुपक्षीय विदेश संपर्क को लेकर की जा रही है।

21 मई से 5 जून तक चलेगा अभियान, 33 देशों की यात्रा करेंगे 59 सांसद
ऑपरेशन सिंदूर आउटरीच केवल एक दौरा नहीं, बल्कि भारत का रणनीतिक मिशन है। इस दौरान 59 सांसदों, पूर्व मंत्रियों और राजनयिकों के 7 अलग-अलग प्रतिनिधिमंडल कुल 33 देशों की यात्रा करेंगे। सभी प्रतिनिधिमंडल उन देशों की सरकारों, संसदों, मीडिया, नागरिक समाज और प्रवासी भारतीयों से संवाद कर भारत का पक्ष मजबूत तरीके से रखेंगे।

इन प्रतिनिधिमंडलों को पाकिस्तान की सेना और ISI की आतंकवादी गतिविधियों में भागीदारी से संबंधित ठोस दस्तावेज़ और खुफिया जानकारियाँ उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें हाल ही में नियंत्रण रेखा (LOC) के पार किए गए ऑपरेशन सिंदूर के प्रमाण भी शामिल हैं, जिसमें आतंकियों के अड्डों को निशाना बनाया गया था।

“आतंक के खिलाफ भारत अकेला नहीं”: विदेश सचिव विक्रम मिस्री
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सभी प्रतिनिधिमंडलों को रवाना करने से पूर्व ब्रीफिंग में कहा, “भारत पिछले चार दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है, लेकिन अब यह देश इसे रोकने के लिए निर्णायक नीति पर चल रहा है।” उन्होंने पाकिस्तान के हालिया संयुक्त जांच प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा, “यह ऐसा ही है जैसे चोर से उसके अपराध की जांच करवाई जाए।”

भारत का स्पष्ट संदेश:
ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में नर्मी की कोई गुंजाइश नहीं है। यह पहल वैश्विक समुदाय से अपेक्षा करती है कि आतंकवाद को किसी भी रूप में समर्थन देने वाले देशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाए।

संदेश सीधा है:
“आतंकवाद चाहे जहाँ हो, वह हर जगह शांति के लिए खतरा है। और भारत इस लड़ाई में अकेला नहीं है।”


 

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