शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक एक तरफ शिक्षा व्यवस्था सुधारने का हरसंभव प्रयत्न कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर विद्यालय का हाल खस्ता

भागलपुर के पुरैनी में उत्क्रमित विद्यालय हैं जहां बच्चों को बैठने तक के लिए बेंच डेस्क तक नहीं है। तीन साल पहले ये मध्य विद्यालय से उच्च विद्यालय बना। साल भर पहले इसे प्लस टू का भी दर्जा मिल गया। शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सूबे में डेंगू के कहर से लोग कराह रहे है और भागलपुर डेंजर जोन में है। सभी जगह साफ सफाई रखने की हिदायत दी गई है। लेकिन स्कूल प्रबंधन इससे बेखबर है। विद्यालय परिसर में गंदगी फैली हुई है पानी का जल जमाव है।

इस पानी में मच्छर का लार्वा पनप रहा है। शिक्षक या बच्चे कोई भी डेंगू का शिकार हो सकते हैं। इस संबंध में स्कूल के प्रधानाचार्य महेश कुमार और अध्यक्ष ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मुखिया को सूचित कर दिया मगर ब्लीचिंग नहीं मिला। स्कूल में एमडीएम भोजन खाने के बाद बच्चों से प्लेट धुलवाया जा रहा है। इतना ही नहीं प्रधानाचार्य को पानी पिलाने के लिए बच्चे बाल्टी में पानी भरकर ले जा रहे हैं। स्कूल के प्रधानाचार्य कहते हैं कि प्लस टू बनने के बाद एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है।

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