भागलपुर | 17 जुलाई 2025: बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ (ऐक्टू) ने ऐलान किया है कि 22 जुलाई को बिहार विधानसभा के समक्ष प्रदेशभर की विद्यालय रसोइया जोरदार प्रदर्शन करेंगी। यह आंदोलन सरकार की वादाखिलाफी, सम्मानजनक मजदूरी और अधिकारों की बहाली को लेकर किया जा रहा है।
“मिले 26000 रु. प्रतिमाह और सरकारी कर्मी का दर्जा” – सरोज चौबे
रसोइया संघ के राज्य महासचिव सरोज चौबे ने कहा कि:
“हमारी मांग है कि विद्यालय रसोइयों को सरकारी कर्मी का दर्जा दिया जाए, मानदेय को बढ़ाकर ₹26,000 किया जाए, और मध्याह्न भोजन योजना से NGO की भूमिका को समाप्त किया जाए।”
उन्होंने यह भी मांग की कि रसोइयों को साल भर (12 महीने) मानदेय दिया जाए और रिटायरमेंट पैकेज की व्यवस्था की जाए।
“10 महीने के काम पर भी सिर्फ ₹1650!” – मुकेश मुक्त
इस प्रदर्शन की जानकारी देते हुए ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने कहा:
“राज्य व केंद्र सरकारें स्वयं तय की गई न्यूनतम मजदूरी तक नहीं देतीं। साल में 12 की बजाय सिर्फ 10 महीने ही मानदेय दिया जाता है, वह भी मात्र ₹1650 प्रतिमाह — जो अपमानजनक है।”
उन्होंने केंद्र सरकार पर पिछले 10 वर्षों में एक रुपये भी वृद्धि नहीं करने का आरोप लगाया, वहीं राज्य सरकार पर “भरमाने और वादाखिलाफी” का आरोप लगाया।
राज्यभर में गुस्सा, आंदोलन को मिलेगा व्यापक समर्थन
रसोइया संघ का मानना है कि राज्य की लाखों महिला रसोइयों में गहरा आक्रोश है और इस बार बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान उनका गुस्सा सड़कों पर दिखेगा।
संघ ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि रसोइयों की मांगों की अनदेखी हुई, तो यह आंदोलन जिला और प्रखंड स्तर तक व्यापक रूप ले सकता है।


