सुल्तानगंज (भागलपुर), 10 जुलाई 2025:गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर असाढ़ मास के अंतिम दिन बुधवार को अजगैबीनाथ धाम में श्रद्धा और भक्ति की अपार जनसागर उमड़ पड़ी। देश-विदेश से आए लाखों कांवरियों ने उत्तरवाहिनी गंगा में पवित्र डुबकी लगाई और गंगा जल लेकर बाबा भोलेनाथ के बैद्यनाथ धाम (देवघर) के लिए रवाना हुए।
105 किलोमीटर की आस्था यात्रा शुरू
कांवरियों ने गंगा स्नान के बाद बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाने के उद्देश्य से “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयकारों के साथ 105 किलोमीटर लंबी पदयात्रा प्रारंभ की। कुछ कांवरिया पैदल तो कुछ वाहन से रवाना हुए।
“गुरु पूर्णिमा के दिन डुबकी लगाकर यात्रा आरंभ करना पुण्यकारी माना जाता है। यह दिन भगवान शिव और गुरु के प्रति आस्था व्यक्त करने का सबसे पावन दिन है।”
— पंडित संजीव झा, स्थानीय पुजारी
गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में गुरु को भगवान के समकक्ष माना गया है। मान्यता है कि गुरु के मार्गदर्शन से ही मनुष्य ईश्वर तक पहुंचता है। ऐसे में गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर आशीर्वाद लेना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
कोलकाता से आए विशेष कांवर
इस वर्ष कोलकाता से आए कांवरियों ने विशाल गणेश कांवर के साथ यात्रा प्रारंभ की। उन्होंने बताया कि:
“हम हर वर्ष गुरु पूर्णिमा के दिन जल चढ़ाने के लिए अजगैबीनाथ धाम आते हैं। पिछले वर्ष बाबा भोलेनाथ का कांवर ले गए थे, इस बार उनके पुत्र भगवान गणेश का कांवर लेकर जा रहे हैं।”
सुरक्षा और सुविधा के व्यापक इंतजाम
कांवरियों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस बल, महिला पुलिस, निगरानी टीम, स्वास्थ्य शिविर और जल वितरण केंद्र की व्यवस्था की गई थी ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।
श्रावण माह का आगाज कल से
गुरु पूर्णिमा के अगले दिन से श्रावण माह की शुरुआत हो रही है। यह माह भगवान शिव को समर्पित होता है, जिसमें देश-विदेश से प्रतिदिन लाखों कांवरिया अजगैबीनाथ धाम पहुंचते हैं और वहां से देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम तक गंगा जल लेकर पदयात्रा करते हैं।
यह दिन श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का प्रतीक रहा, जहां गुरु, गंगा और भगवान शिव की महिमा के साथ एक विशाल जनसमूह ने धर्म और संस्कृति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।


