
मुख्य बिंदु:
- घटनास्थल: अस्थावां थाना क्षेत्र का चुलिहारी गांव, जिला नालंदा।
- मृत्तक: एक वर्षीय अशोक, पिता राजू पासवान (उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी)।
- आरोपी: सगी मौसी सुमंत्री देवी, जो भाई की शादी में शामिल होने आई थी।
- विवाद की वजह: मोबाइल चोरी होने का शक और अंधविश्वास का मिला-जुला असर।
- वारदात का विवरण: गला दबाकर हत्या करने के बाद मासूम के शव को घर के पास के तालाब में फेंका।
- पुलिसिया कार्रवाई: आरोपी मौसी ने अपना जुर्म कबूल किया, पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजा।
नालंदा। बिहार के नालंदा जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की पवित्रता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ भाई की शादी की खुशियाँ परवान चढ़ रही थीं, वहीं दूसरी तरफ एक मामूली मोबाइल फोन के लिए ‘मौसी’ जैसा पवित्र रिश्ता ‘कातिल’ बन गया। अस्थावां थाना क्षेत्र के चुलिहारी गांव में एक महिला ने अपने ही सगी बहन के एक वर्षीय मासूम बेटे की गला दबाकर केवल इसलिए हत्या कर दी क्योंकि उसे शक था कि उसकी बहन ने उसका मोबाइल चुरा लिया है। शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 की सुबह जब तालाब से उस नन्हे मासूम का शव बरामद हुआ, तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। इस घटना ने साबित कर दिया है कि आज के भौतिकवादी युग में तकनीक की हवस और आपसी अविश्वास रिश्तों के खून से भी ज्यादा गाढ़ा हो गया है।
खुशियों वाले घर में मातम: शादी की तैयारियों के बीच ‘काल’ का साया
नालंदा के चुलिहारी गांव में जितेंद्र पासवान के घर में इन दिनों उत्सव का माहौल था। आगामी 21 तारीख को उनके छोटे भाई दिलखुश कुमार की शादी होने वाली थी। इसी मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनकी दो बहनें—मंझली बहन आरती और बड़ी बहन सुमंत्री देवी अपने-अपने ससुराल से मायके आई हुई थीं। आरती का पति राजू पासवान उत्तर प्रदेश के बरेली का रहने वाला है और आरती अपने एक साल के बेटे अशोक के साथ आई थी।
घर में मेहमानों की आवाजाही थी, हंसी-ठिठोली का दौर चल रहा था और शादी की खरीदारी की बातें हो रही थीं। लेकिन इसी बीच बड़ी बहन सुमंत्री देवी का मोबाइल फोन कहीं गुम हो गया। सुमंत्री को यह पक्का यकीन हो गया कि उसका फोन उसकी मंझली बहन आरती ने ही छिपाया या चुराया है। बस यही एक शक उस मासूम अशोक के लिए ‘डेथ वारंट’ बन गया, जिसे अभी रिश्तों की समझ तक नहीं थी।
मोबाइल का विवाद और अंधविश्वास का घातक मेल
मोबाइल गुम होने के बाद दोनों बहनों के बीच तीखी बहस हुई। सुमंत्री देवी लगातार अपनी बहन आरती पर दबाव बना रही थी कि वह उसका फोन वापस कर दे। चुलिहारी गांव के ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यह विवाद केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहा। सुमंत्री देवी ने अपनी बहन का ‘सच’ उगलवाने के लिए एक खतरनाक और अंधविश्वासी रास्ता चुना।
वह गांव की ही किसी महिला के पास गई और वहां से ‘पढ़ा हुआ पानी’ (मंतरित जल) लेकर आई। उसने घर के सभी सदस्यों को वह पानी पिलाया, यह सोचकर कि जो चोर होगा उसे वह पानी पीते ही कुछ हो जाएगा। घर के सभी लोगों ने वह पानी पी लिया, लेकिन आरती ने उस पानी को पीने से साफ इनकार कर दिया। आरती का यह इनकार सुमंत्री के शक की आग में घी का काम कर गया। उसे लगा कि आरती ने पानी इसीलिए नहीं पिया क्योंकि उसने ही मोबाइल चुराया है। इसी प्रतिशोध की आग में जलते हुए सुमंत्री ने वह खौफनाक योजना बनाई जिसे सुनकर रूह कांप जाए।
रात के सन्नाटे में वारदात: कमरे से गायब हुआ मासूम
शुक्रवार की रात करीब 10 बजे, जब पूरा परिवार सोने की तैयारी कर रहा था, अचानक आरती की चीखें गूंज उठीं। उसका एक साल का बेटा अशोक, जो कमरे में ही सोया हुआ था, अचानक गायब हो गया। परिजनों ने आनन-फानन में पूरे घर और आसपास की गलियों में खोजबीन शुरू की। घर में शादी की चहल-पहल की जगह चीख-पुकार ने ले ली थी।
पूरी रात परिजन और ग्रामीण मशालें और टॉर्च लेकर बच्चे को ढूंढते रहे, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। किसी ने सोचा भी नहीं था कि घर के ही किसी सदस्य ने बच्चे के साथ अनहोनी कर दी होगी। सुमंत्री भी इस दौरान ऐसे व्यवहार कर रही थी जैसे उसे कुछ पता ही न हो। लेकिन कुदरत को इस मासूम का इंसाफ मंजूर था। सुबह होते ही गांव के पास के एक तालाब में कुछ तैरता हुआ दिखा। जब ग्रामीण वहां पहुँचे तो देखा कि यह वही मासूम अशोक था, जिसकी तलाश पूरी रात की गई थी।
तालाब से बरामद हुआ शव: गला दबाकर की गई थी हत्या
शुक्रवार की सुबह तालाब से अशोक का शव बरामद होते ही अस्थावां पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को अपने कब्जे में लिया। प्रारंभिक जांच में ही यह साफ हो गया कि बच्चे की मौत डूबने से नहीं हुई है, बल्कि उसके गले पर उंगलियों के निशान और सूजन थी, जो गला दबाने की ओर इशारा कर रहे थे।
बच्चे के मामा जितेंद्र पासवान और मां आरती का रो-रोकर बुरा हाल था। आरती बार-बार एक ही बात कह रही थी कि उसका बच्चा तो अभी चलना भी ठीक से नहीं सीखा था, उसकी किससे क्या दुश्मनी हो सकती है। लेकिन जब पुलिस ने घर के सदस्यों से पूछताछ शुरू की और सुमंत्री के साथ आरती के मोबाइल विवाद की बात सामने आई, तो शक की सुई सुमंत्री देवी पर टिक गई। पुलिस ने जब कड़ाई से सुमंत्री से पूछताछ की, तो वह ज्यादा देर तक झूठ नहीं बोल पाई और उसने जो सच उबला, उसने सबके पैरों तले जमीन खिसका दी।
सगी मौसी का कबूलनामा: “मैंने ही मारा है”
अस्थावां थानाध्यक्ष ने मीडिया को बताया कि सुमंत्री देवी ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उसने बताया कि मोबाइल चोरी के शक में वह अपनी बहन आरती से इतनी ज्यादा नफरत करने लगी थी कि उसने उसे सबक सिखाने के लिए उसके सबसे प्यारे हिस्से यानी उसके बेटे को निशाना बनाया। सुमंत्री ने स्वीकार किया कि रात के अंधेरे में जब सब सो रहे थे, उसने बच्चे को कमरे से उठाया और चुपचाप घर के पीछे ले गई।
वहां उसने नन्हे अशोक का गला तब तक दबाए रखा जब तक उसकी धड़कनें शांत नहीं हो गईं। इसके बाद पकड़े जाने के डर से उसने शव को पास के तालाब में फेंक दिया। एक स्मार्टफोन, जिसकी कीमत चंद हजार रुपये होगी, उसके लिए एक सगी मौसी ने अपनी ही बहन की कोख उजाड़ दी। पुलिस ने सुमंत्री देवी को गिरफ्तार कर लिया है और उसे हत्या की धाराओं के तहत जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
सामाजिक विडंबना: तकनीक के गुलाम होते रिश्ते
नालंदा की यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे बदलते सामाजिक ताने-बाने की एक कुरूप तस्वीर है। आज स्मार्टफोन केवल संचार का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह इंसान की पहचान और उसकी सबसे कीमती संपत्ति बन गया है। इस हद तक कि एक मोबाइल के लिए इंसान अब अपनों का खून बहाने से भी पीछे नहीं हट रहा है।
साथ ही, यह घटना ग्रामीण इलाकों में आज भी जमे हुए अंधविश्वास की जड़ों को भी दिखाती है। ‘पढ़ा हुआ पानी’ पिलाकर सच जानने की कोशिश करना और फिर उस पर यकीन कर लेना कि जिसने पानी नहीं पिया वही अपराधी है, यह दर्शाता है कि शिक्षा के प्रसार के बावजूद वैज्ञानिक सोच की कितनी कमी है। सुमंत्री की कुंठित मानसिकता ने एक ऐसे मासूम की जान ले ली, जिसका मोबाइल या उस विवाद से कोई लेना-देना नहीं था।
निष्कर्ष: सुशासन के राज में इंसाफ की उम्मीद
अस्थावां पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को दबोच लिया है, लेकिन चुलिहारी गांव में इस साल जो शहनाइयां गूंजने वाली थीं, वहां अब केवल मातम का सन्नाटा है। जितेंद्र पासवान के घर में शादी की खुशियां अब आंसुओं में बह गई हैं। बरेली से आई आरती अब अपने बेटे का शव लेकर वापस जाएगी, और सुमंत्री जेल की सलाखों के पीछे अपनी इस घिनौनी करतूत पर पश्चाताप करेगी।
बिहार में कानून का राज स्थापित करने की दिशा में पुलिस की यह सक्रियता सराहनीय है, लेकिन समाज के तौर पर हमें यह सोचना होगा कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। क्या एक मोबाइल की कीमत एक इंसानी जिंदगी से ज्यादा हो गई है? नालंदा की यह ‘कातिल मौसी’ आने वाले समय में एक डरावनी मिसाल के रूप में याद रखी जाएगी, जिसने ममता और विश्वास के धागे को एक झटके में तोड़ दिया।


