
मुख्य बिंदु:
- घटनास्थल: सनोखर थाना क्षेत्र के छोटी नाकी गांव (कहलगांव, भागलपुर)।
- मृतका: 20 वर्षीय निशा खातून, पति मो. शमशाद मंसूरी।
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: पति हैदराबाद में मजदूरी करता है; घर पर केवल वृद्ध सास-ससुर थे मौजूद।
- वारदात का समय: शुक्रवार दोपहर, जब सास-ससुर घर के बाहर बैठे थे।
- पुलिसिया कार्रवाई: थानाध्यक्ष पंकज किशोर के नेतृत्व में पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव बरामद किया।
- वर्तमान स्थिति: मामला प्रथम दृष्टया आत्महत्या का, मायके पक्ष की ओर से अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं।
कहलगांव (भागलपुर)। सुहाग की मेहंदी का रंग अभी ठीक से फीका भी नहीं पड़ा था कि भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल अंतर्गत सनोखर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। छोटी नाकी गांव में शुक्रवार की दोपहर खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब एक 20 वर्षीय नवविवाहिता का शव उसके ही कमरे में पंखे के हुक से लटकता हुआ पाया गया। यह खबर आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई और देखते ही देखते गांव में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। मृतका की पहचान निशा खातून के रूप में हुई है, जिसकी शादी मो. शमशाद मंसूरी के साथ बड़े अरमानों के साथ हुई थी। लेकिन किसे पता था कि डोली में विदा होकर आई निशा का जनाजा इतनी जल्दी इसी घर से उठेगा। घटना के समय मृतका का पति रोजी-रोटी की तलाश में हजारों मील दूर हैदराबाद में था, जबकि घर में मौजूद वृद्ध सास-ससुर इस बात से बिल्कुल बेखबर थे कि उनके आंगन की बहू भीतर मौत को गले लगा रही है।
दोपहर का सन्नाटा और मौत की आहट
शुक्रवार की वह दोपहर छोटी नाकी गांव के लिए सामान्य ही थी। गर्मी की तपिश के कारण अधिकांश लोग अपने घरों के भीतर या पेड़ों की छांव में सुस्ता रहे थे। निशा के सास और ससुर भी घर के मुख्य दरवाजे के पास बाहर बैठे हुए थे। निशा अपने कमरे में थी। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, दोपहर के वक्त निशा ने अपने कमरे का दरवाजा भीतर से बंद कर लिया। सास-ससुर को लगा कि शायद वह आराम कर रही होगी, इसलिए उन्होंने काफी देर तक उसे आवाज नहीं दी।
लेकिन जब घंटों बीत गए और कमरे के भीतर से कोई हलचल नहीं हुई, तो सास को कुछ अनहोनी का अंदेशा हुआ। उन्होंने खिड़की से झाँकने और आवाज देने की कोशिश की, लेकिन भीतर से कोई जवाब नहीं आया। बार-बार पुकारने और दरवाजा खटखटाने के बावजूद जब चुप्पी नहीं टूटी, तो घर में कोहराम मच गया। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण भी जमा हो गए। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर दरवाजा खोलने का प्रयास किया, लेकिन मजबूती से बंद किवाड़ नहीं खुले। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सनोखर थाना पुलिस को सूचित किया गया।
पुलिस की मौजूदगी में टूटा दरवाजा: मंजर देख कांप गई रूह
सूचना मिलते ही सनोखर थानाध्यक्ष पंकज किशोर दलबल के साथ छोटी नाकी गांव पहुँचे। पुलिस ने परिजनों और स्थानीय प्रबुद्ध लोगों की मौजूदगी में कमरे के दरवाजे को जोर का धक्का देकर तोड़ा। जैसे ही दरवाजा खुला, सामने का मंजर देख सबकी रूह कांप गई। निशा खातून अपने दुपट्टे का फंदा बनाकर पंखे से लटकी हुई थी। आनन-फानन में उसे नीचे उतारा गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।
पुलिस ने प्राथमिक छानबीन में पाया कि कमरे में किसी तरह के संघर्ष के निशान नहीं थे, जिससे प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का ही प्रतीत हो रहा है। हालांकि, आत्महत्या के पीछे का ठोस कारण अब भी रहस्य बना हुआ है। क्या यह मानसिक तनाव था, पति का दूर रहना या फिर कोई पारिवारिक कलह? इन सवालों के जवाब तलाशने में पुलिस जुट गई है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की, ताकि मृत्यु के वास्तविक समय और कारणों का वैज्ञानिक पता चल सके।
परदेस में पति और मायके में मातम
निशा का पति, मो. शमशाद मंसूरी, उन लाखों बिहारी युवाओं में से एक है जो अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए घर-बार छोड़कर दूसरे राज्यों में पसीना बहाते हैं। वह हैदराबाद में रहकर काम करता है। पत्नी की मौत की खबर जब उसे फोन पर मिली, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। एक तरफ पत्नी के जाने का गम और दूसरी तरफ हजारों मील की दूरी—शमशाद के लिए यह खबर किसी कयामत से कम नहीं थी।
वहीं दूसरी ओर, घटना की जानकारी मिलते ही निशा के मायके वाले, जो जलहा गांव के रहने वाले हैं, रोते-बिलखते छोटी नाकी पहुँच गए। बेटी का बेजान शरीर देखकर मां-बाप का जो हाल था, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। जलहा गांव से आए रिश्तेदारों की चीखों से पूरा वातावरण गमगीन हो गया। निशा के पिता और भाई इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रहे थे कि उनकी लाडली अब इस दुनिया में नहीं है। मायके पक्ष के लोग ससुराल वालों से भी पूछताछ कर रहे थे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि निशा ने इतना बड़ा कदम उठा लिया।
जांच के घेरे में ‘सुसाइड’ और कानूनी पेंच
सनोखर थानाध्यक्ष पंकज किशोर ने मीडिया को बताया कि अब तक इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित आवेदन या प्राथमिकी दर्ज करने की शिकायत नहीं दी गई है। कानून के जानकारों का कहना है कि शादी के शुरुआती वर्षों में अगर किसी महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होती है, तो यह मामला काफी संवेदनशील हो जाता है। पुलिस इस पहलू पर भी विचार कर रही है कि क्या निशा किसी दबाव में थी।
थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। यदि मायके पक्ष की ओर से दहेज उत्पीड़न या किसी अन्य तरह के मानसिक शोषण का आरोप लगाया जाता है, तो पुलिस तुरंत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई करेगी। फिलहाल, पुलिस मृतका के सास-ससुर और पड़ोसियों के बयान दर्ज कर रही है ताकि घटना से ठीक पहले की परिस्थितियों को समझा जा सके। मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड्स की भी जांच की जा सकती है ताकि यह पता चले कि निशा की आखिरी बार किससे और क्या बात हुई थी।
सामाजिक विडंबना: ‘प्रवासी पति’ और युवा दुल्हनों का अकेलापन
इस घटना ने एक गंभीर सामाजिक मुद्दे की ओर भी इशारा किया है। बिहार के ग्रामीण इलाकों में अक्सर देखा जाता है कि शादी के कुछ ही महीनों बाद पति काम के सिलसिले में दिल्ली, मुंबई या हैदराबाद जैसे महानगरों के लिए निकल जाते हैं। पीछे रह जाती हैं कम उम्र की बहुएं, जिन्हें नए घर में तालमेल बिठाने के साथ-साथ अकेलेपन से भी जूझना पड़ता है। 20 साल की निशा की शादी को अभी अधिक समय नहीं हुआ था। ऐसे में पति का साथ न होना और वृद्ध सास-ससुर के साथ घर की चारदीवारी में बंद रहना कई बार मानसिक कुंठा का कारण बन जाता है। हालांकि, निशा के मामले में यह केवल एक संभावना है, हकीकत जांच के बाद ही सामने आएगी।
न्याय का इंतजार
छोटी नाकी गांव में आज हर कोई स्तब्ध है। निशा खातून की मौत ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं। क्या उसने अपनी मर्जी से जान दी या उसे इस कदम के लिए मजबूर किया गया? यह जांच का विषय है। कहलगांव पुलिस के लिए यह मामला चुनौतीभरा है क्योंकि इसमें अब तक किसी ने भी सीधे तौर पर किसी पर आरोप नहीं मढ़ा है।
अक्सर ऐसे मामलों में समय बीतने के साथ मायके और ससुराल पक्ष के बीच आपसी समझौते या फिर कानूनी लड़ाइयों का लंबा दौर शुरू हो जाता है। लेकिन इन सबके बीच एक उभरती हुई जिंदगी खामोश हो गई। निशा के मायके वाले फिलहाल अपनी बेटी के शव के साथ अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे हैं, जबकि पुलिस प्रशासन गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने और मामले की तह तक जाने के लिए साक्ष्य संकलन में लगा है। आने वाले दिनों में शमशाद के हैदराबाद से लौटने और मायके पक्ष के लिखित बयान के बाद ही इस मामले में कोई बड़ा मोड़ आने की उम्मीद है।


