पटना। अब गांवों में बनने वाली सड़कों पर भी शहरों जैसी सुरक्षा व्यवस्था होगी। ग्रामीण कार्य विभाग ने तय किया है कि अब सभी ग्रामीण सड़कों के निर्माण और मरम्मत में रोड सेफ्टी स्टैंडर्ड का पालन अनिवार्य होगा।
इस फैसले के तहत
- स्कूल और अस्पताल के पास जेब्रा क्रॉसिंग बनेगी
- तीखे मोड़, पुल-पुलिया और घुमावदार रास्तों पर स्पीड लिमिट बोर्ड लगाए जाएंगे
- खतरनाक स्थानों पर चेतावनी संकेत और रोड मार्किंग होगी
हादसों की बढ़ती संख्या बनी वजह
पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण इलाकों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है।
एक समय जहां ग्रामीण क्षेत्रों में सालाना तीन हजार से कम दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब चार हजार हो गई है।
राज्य में होने वाली कुल सड़क दुर्घटनाओं का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अब गांवों से जुड़ा है। इसी को देखते हुए सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है।
सचिव ने दिए सख्त निर्देश
ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव दिवेश सेहरा ने सभी अभियंताओं को निर्देश दिया है कि वे निर्माण एजेंसियों के साथ समन्वय कर हर सड़क पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि
- सुरक्षा मानकों की स्वतंत्र निगरानी कराई जाएगी
- हर परियोजना की कार्ययोजना तैयार कर विभाग को सौंपनी होगी
- अगली समीक्षा बैठक में इसकी प्रगति रिपोर्ट देखी जाएगी
एमआईएस में बनेगा अलग कॉलम
स्कूल और अस्पताल के पास जेब्रा क्रॉसिंग सुनिश्चित करने के लिए विभागीय एमआईएस सिस्टम में अलग कॉलम जोड़ा जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि कहां-कहां सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
बिहार में 1.18 लाख किमी से ज्यादा ग्रामीण सड़कें
राज्य में फिलहाल एक लाख 18 हजार किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कें हैं। इनमें से कई सड़कें मेला-हाट, पंचायत और प्रखंड मुख्यालयों को जोड़ती हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने
- ग्रामीण सड़कों को चरणबद्ध तरीके से दो लेन में बदलने
- और शहरों की तरह सात साल तक मेंटेनेंस कराने का निर्णय लिया है।
अब एआई से होगी निगरानी
ग्रामीण सड़कों की निगरानी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से भी की जा रही है, ताकि समय रहते खराब सड़कों की पहचान हो सके और मरम्मत में देरी न हो।
यह फैसला गांवों में सड़क हादसों पर लगाम लगाने और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


