
मुंगेर, 20 जुलाई 2025 — केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने शनिवार को मुंगेर में आयोजित एक रैली के दौरान सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उन्हें “तोड़ने” में असफल रहने के बाद अब विरोधी उन्हें बम से उड़ाने की साजिश रच रहे हैं।
चिराग पासवान ने इस बयान के जरिए न केवल अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी परिस्थिति में झुकने वाले नहीं हैं। हालाँकि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके निशाने पर राजद और अपने अलग हुए चाचा पशुपति कुमार पारस स्पष्ट रूप से रहे।
“बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट से नाराज़ हैं कुछ लोग”
हाजीपुर से सांसद चिराग ने कहा,
“कई लोग मेरे ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ नारे से नाराज हैं। यह नारा उनकी जातिवादी राजनीति की जड़ों पर प्रहार करता है। जिन्होंने सत्ता में रहकर बिहार को गरीबी और पिछड़ेपन में झोंक दिया, वे अब झूठे वादों से जनता को बहकाने की कोशिश कर रहे हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चिराग का यह बयान सीधे तौर पर तेजस्वी यादव की ओर इशारा करता है, जो हाल में राज्य में एक बार फिर सक्रियता दिखा रहे हैं।
“राजनीतिक वनवास और तोड़ने की कोशिशें”
चिराग पासवान ने कहा कि पार्टी विभाजन के बाद उन्हें राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश की गई थी।
“मेरे विरोधियों ने मुझे घर से बाहर निकाल दिया, मेरी पार्टी को तोड़ दिया, और मुझे सड़कों पर छोड़ दिया। लेकिन मैं नहीं टूटा।”
उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन के बाद उन्हें फिर से राजनीतिक पहचान मिली और वह आज फिर मजबूती से खड़े हैं।
“अब बम से उड़ाने की साजिश”
अपने भाषण में चिराग ने आगे कहा,
“अब उन्होंने एक नई साजिश रची है। वे मुझे बम से उड़ाने की योजना बना रहे हैं। लेकिन वे भूल जाते हैं कि चिराग पासवान शेर का बेटा है। उसे डराना नामुमकिन है।”
क्या है धमकी का संदर्भ?
पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेश कुमार भट्ट ने इस बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह टिप्पणी संभवतः हाल में पटना साइबर थाना में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ी हो सकती है।
एक इंस्टाग्राम उपयोगकर्ता ने चिराग पासवान को बम से उड़ाने की धमकी दी थी, जिस पर पार्टी की ओर से कानूनी कार्रवाई की गई है।
चिराग पासवान का यह बयान बिहार की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बढ़ते तनाव और आक्रोश को दर्शाता है। उनकी ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ नीति जहां युवाओं में उम्मीद जगा रही है, वहीं उनके विरोधी इसे सीधी चुनौती मान रहे हैं।


