खाकी पर दाग लगाने वालों की अब खैर नहीं: सीतामढ़ी के गालीबाज थानेदार सस्पेंड, तो पटना के नौबतपुर थानेदार की बढ़ीं मुश्किलें; डीजीपी विनय कुमार का कड़ा संदेश

  • ​बिहार पुलिस मुख्यालय ने अनुशासनहीनता और जनता के साथ दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।
  • ​सीतामढ़ी जिले के भिट्ठा थाना के थानाध्यक्ष मनोज कुमार को फरियादियों और महिलाओं के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
  • ​पटना के नौबतपुर थानेदार पर पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी आधिकारिक जांच की जिम्मेदारी आईजी पटना को सौंपी गई है।
  • ​डीजीपी विनय कुमार ने स्पष्ट किया है कि वर्दी पहनकर जनता के साथ अमर्यादित व्यवहार करने वाले किसी भी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर तैनात हो।
  • ​सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो अब भ्रष्ट और बदतमीज अधिकारियों के खिलाफ सबसे बड़े साक्ष्य बन रहे हैं, जिससे पुलिस की कार्यशैली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ रही है।

पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।

वर्दी का गुरूर और जनता की बेबसी: जब रक्षक ही बन जाए भक्षक

बिहार में पुलिसिया कार्यसंस्कृति को बदलने और उसे ‘जन-मित्र’ बनाने के दावों के बीच कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं जो पूरे महकमे की साख पर बट्टा लगा देती हैं। सीतामढ़ी और पटना से आई हालिया खबरें इसी कड़वी सच्चाई को उजागर करती हैं। पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने बुधवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए साफ कर दिया कि वर्दी का मद अगर किसी अधिकारी के सिर चढ़कर बोलेगा, तो प्रशासनिक कोड़ा चलने में देर नहीं लगेगी। सीतामढ़ी के भिट्ठा थाना क्षेत्र का मामला तो मर्यादा की तमाम सीमाओं को लांघने वाला है, जहाँ न्याय की उम्मीद में आई महिलाओं को कानून के रखवाले ने गालियों का ‘प्रसाद’ दिया।

सीतामढ़ी का ‘गालीबाज’ दरोगा: जब वायरल वीडियो ने खोली बदतमीजी की पोल

सीतामढ़ी जिले के भिट्ठा थाना क्षेत्र में तैनात थानाध्यक्ष मनोज कुमार के लिए बीता बुधवार उनके करियर का सबसे बुरा दिन साबित हुआ। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक वीडियो बिजली की रफ़्तार से वायरल हुआ, जिसमें मनोज कुमार फरियादियों, विशेषकर महिलाओं के साथ अत्यंत ही अमर्यादित और गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग करते नजर आ रहे थे। वीडियो में देखा जा सकता था कि कैसे एक लोक सेवक अपने पद की गरिमा को भूलकर उन लोगों को अपमानित कर रहा था, जिनकी सुरक्षा और सहायता के लिए उसे तैनात किया गया है।

​डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि जैसे ही यह मामला मुख्यालय के संज्ञान में आया, इसकी गंभीरता को देखते हुए सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक (SP) को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। एसपी ने मामले की प्रारंभिक जांच में वीडियो को सही पाया और थानाध्यक्ष मनोज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह निलंबन उन तमाम पुलिसकर्मियों के लिए एक चेतावनी है जो थाने को अपनी निजी जागीर और फरियादियों को अपना गुलाम समझते हैं।

नौबतपुर थानेदार और लोकतंत्र का चौथा स्तंभ: आईजी पटना करेंगे दूध का दूध और पानी का पानी

राजधानी पटना के नौबतपुर थाने का मामला भी कम गंभीर नहीं है। यहाँ के थानेदार पर आरोप है कि उन्होंने पेशेवर कवरेज के लिए गए पत्रकारों के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि उनके साथ अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया के साथ इस तरह का व्यवहार पुलिस की छवि को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। पत्रकारों ने इस मामले की शिकायत सीधे पुलिस मुख्यालय और डीजीपी से की थी।

​डीजीपी विनय कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच का जिम्मा आईजी (IG) पटना को सौंपा है। आईजी स्तर के अधिकारी द्वारा जांच कराया जाना यह दर्शाता है कि मुख्यालय इस मामले में किसी भी तरह की लीपापोती के मूड में नहीं है। पत्रकारों के साथ बदसलूकी के आरोपों की सत्यता जांची जाएगी और यदि साक्ष्य सही पाए गए, तो नौबतपुर थानेदार पर भी गाज गिरना तय है। पुलिस और प्रेस के बीच का समन्वय कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनिवार्य है, और ऐसे में किसी अधिकारी का अहंकारी व्यवहार इस समन्वय को बिगाड़ने का काम करता है।

डीजीपी विनय कुमार का ‘हार्ड लाइन’ संदेश: “बदलो अपना व्यवहार, वरना होगी कार्रवाई”

प्रेस वार्ता के दौरान डीजीपी विनय कुमार के तेवर काफी सख्त नजर आए। उन्होंने दो टूक कहा कि पुलिसिंग केवल अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता के साथ आपका व्यवहार कैसा है, यह आपकी सफलता का असली पैमाना है। उन्होंने राज्य के सभी जिला पुलिस कप्तानों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में थाना स्तर पर व्यवहार कुशलता की निगरानी करें। डीजीपी ने कहा, “जनता थाने में तब आती है जब वह संकट में होती है। अगर वहां भी उसे अपमान और गालियाँ मिलेंगी, तो पुलिस पर से विश्वास उठ जाएगा। मुख्यालय ऐसी गतिविधियों को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।”

सोशल मीडिया: पुलिसिया अत्याचार के खिलाफ एक ‘डिजिटल’ ढाल

सीतामढ़ी के मामले में यह साफ हो गया है कि आज के दौर में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया जनता के लिए सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। पहले जो बदसलूकी थानों की चहारदीवारी के भीतर दबकर रह जाती थी, अब वह वीडियो के रूप में दुनिया के सामने आ रही है। डीजीपी विनय कुमार ने भी स्वीकार किया कि सोशल मीडिया के जरिए मुख्यालय को ऐसी शिकायतों की जानकारी तेजी से मिल रही है, जिससे दोषियों पर कार्रवाई करना आसान हो गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी अपील की कि लोग पुलिस का सहयोग करें, लेकिन जहाँ गलत हो रहा है, वहां आवाज उठाना भी जरूरी है।

प्रशासनिक सुस्ती बनाम त्वरित न्याय: एक बड़ी चुनौती

नीतीश सरकार के सुशासन के दावों के बीच पुलिस कर्मियों का ऐसा आचरण विभाग के लिए सिरदर्द बना हुआ है। सीतामढ़ी के दरोगा का निलंबन एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल निलंबन काफी है? क्या ऐसे अधिकारियों को संवेदनशीलता का प्रशिक्षण नहीं दिया जाना चाहिए? नौबतपुर के मामले में आईजी पटना की जांच रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन इस घटना ने पटना पुलिस की छवि को जरूर नुकसान पहुंचाया है।

निष्कर्ष: विश्वास की बहाली ही प्राथमिकता

बिहार पुलिस के लिए वर्तमान समय अपनी छवि सुधारने का है। एक ओर जहाँ मरीन इंजीनियर देवनंदन की मौत और भागलपुर जैसे जिलों में कानून-व्यवस्था की चुनौतियां हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग के भीतर के ‘काले भेड़’ पूरी व्यवस्था को शर्मसार कर रहे हैं। डीजीपी विनय कुमार की यह सख्ती एक नई शुरुआत हो सकती है, जहाँ पद और रसूख के बजाय कर्तव्य और शिष्टाचार को प्राथमिकता दी जाए। सीतामढ़ी के मनोज कुमार का निलंबन और नौबतपुर थानेदार के खिलाफ शुरू हुई जांच यह उम्मीद जगाती है कि बिहार पुलिस में अब ‘जंगलराज’ वाली मानसिकता के लिए कोई जगह नहीं बची है। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि थानों में सम्मान और सुरक्षा चाहती है।

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