भागलपुर में ‘नशे’ की नो-एंट्री: DM का सख्त आदेश—ब्रेथ एनलाइजर से होगी सघन जांच; शराब पीकर सड़क पर उतरे तो सीधे जेल!

भागलपुर | 28 फरवरी, 2026: रंगों के त्योहार होली पर हुड़दंगियों और नशेड़ियों पर नकेल कसने के लिए भागलपुर जिला प्रशासन ने ‘ऑपरेशन क्लीन’ (Operation Clean) की रूपरेखा तैयार कर ली है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि होली के जश्न में कानून तोड़ने वालों और शराब पीकर सड़कों पर उत्पात मचाने वालों के खिलाफ प्रशासन कोई रियायत नहीं बरतेगा।

डीएम का ‘ब्रेथ एनलाइजर’ मास्टर प्लान

​जिलाधिकारी ने मद्यनिषेध विभाग और जिला पुलिस को हाई-अलर्ट पर रखते हुए विशेष निर्देश जारी किए हैं:

  • सघन जांच अभियान: शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, भीड़भाड़ वाले बाजारों और मुख्य सड़कों पर बैरिकेडिंग कर सघन वाहन जांच की जाएगी।
  • हाई-टेक मॉनिटरिंग: जांच केवल कागजी नहीं होगी; हर संदिग्ध चालक की ब्रेथ एनलाइजर से मौके पर ही जांच की जाएगी।
  • त्वरित कार्रवाई: यदि कोई व्यक्ति शराब के प्रभाव में पाया जाता है, तो उसे तत्काल हिरासत में लेकर जेल भेजा जाएगा।

सख्त कानून और भारी जुर्माना

​प्रशासन ने चेतावनी दी है कि उल्लंघन करने वालों पर बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी:

श्रेणी

संभावित कार्रवाई

पहली बार नशा

जुर्माना और चेतावनी (नियमों के अनुसार)।

वाहन चलाना (नशे में)

वाहन की जब्ती और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश।

हुड़दंग और हिंसा

गैर-जमानती धाराओं के तहत गिरफ्तारी और कानूनी मुकदमा।

मकसद: हादसों पर ‘फुल स्टॉप’

​डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि अक्सर होली के दौरान नशे में तेज रफ्तार ड्राइविंग के कारण जानलेवा सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। प्रशासन की इस सख्ती का उद्देश्य केवल डराना नहीं, बल्कि आम नागरिकों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने साफ संदेश दिया—“खुशियां मनाएं, लेकिन कानून के दायरे में रहकर।”

VOB का नजरिया: जश्न में ‘जाम’ नहीं, भाईचारा छलकाएं

बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, और होली जैसे संवेदनशील मौके पर प्रशासन की यह सख्ती स्वागत योग्य है। अक्सर कुछ लोगों की नशाखोरी पूरे मोहल्ले या शहर के सौहार्द को बिगाड़ देती है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ अपने पाठकों से अपील करता है कि प्रशासन का सहयोग करें। याद रखें, आपकी एक छोटी सी लापरवाही न केवल आपको जेल की हवा खिला सकती है, बल्कि किसी मासूम की जान भी जोखिम में डाल सकती है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

  • Related Posts