जल-जीवन-हरियाली अभियान से गांव-गांव में पानी की नई क्रांति
पटना, 9 अगस्त।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सही नीयत और ठोस रणनीति से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। इस बार बदलाव की कहानी है भूजल संरक्षण की, जिसमें गांव-गांव पानी के स्तर को बचाने के लिए कुओं के जीर्णोद्धार और सोख्ता निर्माण का अभूतपूर्व अभियान चलाया गया।
पंचायती राज विभाग के नेतृत्व में चल रहे जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम के तहत अब तक 25,254 कुओं का जिर्णोद्धार और 18,895 सोख्तों का निर्माण हो चुका है। यह आंकड़ा न केवल सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि ग्रामीण बिहार जल संकट से निपटने के लिए पहले से कहीं ज्यादा तैयार हो रहा है।
99% से ज्यादा लक्ष्य पूरा
राज्यभर में 25,466 कुओं के जिर्णोद्धार का लक्ष्य तय किया गया था। इसमें से 25,254 कुएं पूरी तरह तैयार होकर ग्रामीणों के उपयोग में आ चुके हैं—यानि 99% से भी ज्यादा सफलता।
इन कुओं से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जिससे खेती-किसानी में नया उत्साह आया है।
सोख्ता निर्माण में नालंदा टॉप पर
कुओं के नजदीक बनाए जाने वाले सोख्ता वर्षा जल को जमीन में समाने और भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए बेहद कारगर हैं।
सोख्ता निर्माण का लक्ष्य 19,542 तय था, जिसमें से 18,895 पूरे हो चुके हैं।
इस सूची में नालंदा जिला सबसे आगे है—जहां 1939 सोख्ता 100% पूरे किए गए।
लक्ष्य से आगे निकले कई जिले
कई जिलों में सरकारी लक्ष्य से भी ज्यादा काम कर यह साबित किया गया है कि जनभागीदारी से असंभव भी संभव हो जाता है।
अरवल, औरंगाबाद, बेगूसराय, लखीसराय और मधेपुरा जैसे जिलों ने अपने निर्धारित लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन किया है।
जिलावार सोख्ता निर्माण प्रगति
अररिया – 54, अरवल – 335, औरंगाबाद – 626, बांका – 637, बेगूसराय – 723, भागलपुर – 976, भोजपुर – 640, बक्सर – 535, दरभंगा – 513, गया – 270, गोपालगंज – 800, जमुई – 724, जहानाबाद – 606, कैमूर – 401, कटिहार – 112, खगड़िया – 133, किशनगंज – 41, लखीसराय – 188, मधेपुरा – 127, मधुबनी – 95, मुंगेर – 811, मुजफ्फरपुर – 390, नालंदा – 1939, नवादा – 731, पश्चिमी चंपारण – 638, पटना – 586, पूर्वी चंपारण – 1707, पूर्णिया – 107, रोहतास – 274, सहरसा – 235, समस्तीपुर – 997, सारण – 69, शेखपुरा – 247, सिहोर – 174, सीतामढ़ी – 489, सिवान – 631, सुपौल – 52, वैशाली – 282।
भविष्य के जल संकट से लड़ने की तैयारी
अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान से गांव-गांव में जल संरक्षण की अभूतपूर्व जागरूकता आई है। सरकार का लक्ष्य है कि हर पंचायत में जल संग्रहण की ठोस व्यवस्था हो, ताकि आने वाले वर्षों में किसी भी प्रकार के जल संकट से निपटना आसान हो।


