नीतीश सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 54 अधिकारियों का तबादला, 7 अनुमंडल पदाधिकारी बने जिला परिवहन पदाधिकारी

पटना, 12 अगस्त।बिहार सरकार ने एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक ऊकरते हुए राज्य प्रशासनिक सेवा के 54 अधिकारियों का ट्रांसफर और पोस्टिंग किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मंगलवार को जारी अधिसूचना के अनुसार इस फेरबदल में सात अनुमंडल पदाधिकारियों (SDO) को हटाकर जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) के पद पर पदस्थापित किया गया है। इसके अलावा, कई ऐसे अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारी दी गई है जो अब तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में थे।

कौन-कौन SDO से बने DTO
नीतीश सरकार के इस आदेश के तहत जिन सात अनुमंडल पदाधिकारियों को जिला परिवहन पदाधिकारी बनाया गया है, उनके नाम और नए पदस्थापन इस प्रकार हैं—

  1. अमनप्रीत सिंह – पालीगंज के अनुमंडल पदाधिकारी, अब अरवल के जिला परिवहन पदाधिकारी।
  2. दीक्षित श्वेतम – कटिहार जिले के बारसोई अनुमंडल पदाधिकारी, अब किशनगंज के जिला परिवहन पदाधिकारी।
  3. राकेश कुमार सिंह – मोहनिया के अनुमंडल पदाधिकारी, अब रोहतास के जिला परिवहन पदाधिकारी।
  4. राहुल सिंह – शेखपुरा के अनुमंडल पदाधिकारी, अब नालंदा के जिला परिवहन पदाधिकारी।
  5. अमित कुमार – मुजफ्फरपुर (पूर्वी) के अनुमंडल पदाधिकारी, अब भोजपुर के जिला परिवहन पदाधिकारी।
  6. अविनाश कुमार – पूर्वी चंपारण के पकड़ी दयाल अनुमंडल पदाधिकारी, अब जहानाबाद के जिला परिवहन पदाधिकारी।
  7. सुनंदा कुमारी – खगड़िया के गोगरी अनुमंडल पदाधिकारी, अब औरंगाबाद के जिला परिवहन पदाधिकारी।

पदस्थापन की प्रतीक्षा में बैठे अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
इस सूची में कई ऐसे नाम भी शामिल हैं जो लंबे समय से पदस्थापन की प्रतीक्षा में थे। सरकार ने उन्हें अब विभिन्न जिलों में जिम्मेदारी सौंपकर प्रशासनिक ढांचे को दुरुस्त करने का प्रयास किया है।

जिला परिवहन पदाधिकारी का महत्व क्यों बढ़ा
बिहार में सड़क परिवहन, वाहन पंजीकरण और यातायात नियंत्रण से जुड़ी जिम्मेदारियां जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) के पास होती हैं। परिवहन विभाग से राज्य सरकार की राजस्व आय का बड़ा हिस्सा आता है, ऐसे में इस पद पर योग्य और अनुभवी अधिकारियों की तैनाती को सरकार ने प्राथमिकता दी है।

फेरबदल के पीछे का मकसद
सरकार के सूत्रों का कहना है कि इस फेरबदल का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यक्षमता बढ़ाना, जिलों में विकास योजनाओं की रफ्तार तेज करना और परिवहन विभाग में पारदर्शिता लाना है। साथ ही, जिन अधिकारियों को लंबे समय से एक ही जगह पदस्थापित रखा गया था, उन्हें नई जगह भेजकर प्रशासनिक ताजगी लाने की कोशिश की गई है।

आगे और हो सकते हैं बदलाव
सूत्रों का यह भी कहना है कि आने वाले महीनों में और जिलों में भी बड़े स्तर पर तबादले हो सकते हैं, खासकर उन विभागों में जहां विकास परियोजनाएं धीमी गति से चल रही हैं।


 

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