
बगहा (पश्चिमी चंपारण), 11 अगस्त —बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा अनुमंडल के घोड़ाघाट गांव में सोमवार को वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) से भटके एक बाघ ने एक किसान पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। बाघ का पीछा करने गई वन विभाग की टीम पर भी जानवर ने हमला किया, जिसमें एक कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया।
धान के खेत में काम करते समय हुआ हमला
मृतक किसान की पहचान 65 वर्षीय मथुरा महतो के रूप में हुई है। वे गोवर्धन वन रेंज के अंतर्गत घोड़ाघाट गांव के पास अपने धान के खेत में काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक बाघ ने उन पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमले के दौरान बाघ ने महतो को बुरी तरह घायल कर दिया, उनका पेट फाड़ दिया और शव को पास के गन्ने के खेत में घसीट ले गया।
मृतक की बहू रेणु देवी ने बताया, “जब बाघ ने हमला किया, तब वे खेत में काम करने गए थे। मारने के बाद बाघ शव को मुंह में दबाकर पास में छिप गया।” वन विभाग की टीम के पहुंचने के बाद ही शव बरामद हो सका।
वन विभाग की टीम पर भी हमला
सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और बाघ ट्रैकर मौके पर पहुंचे। उनका उद्देश्य बाघ को जंगल की ओर खदेड़ना और शव को सुरक्षित निकालना था। लेकिन तलाशी के दौरान बाघ ने अचानक एक बाघ ट्रैकर पर झपट्टा मारा और उसकी जांघ पर गहरा घाव कर दिया। घायल ट्रैकर को तुरंत रामनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।
वन विभाग के बाघ ट्रैकर राम विनय उरांव ने बताया, “गन्ने में छिपा बाघ बेहद आक्रामक था। उसने हमारी टीम के एक साथी को घायल कर दिया। हम शोर मचाकर उसे भगाने में सफल रहे और घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाया।”
ग्रामीणों में दहशत, खेती से दूरी
इस घटना के बाद से आसपास के गांवों में दहशत फैल गई है। कई ग्रामीण अब खेतों में जाने से परहेज कर रहे हैं। VTR के वन संरक्षक-सह-निदेशक नेशामणि के. ने ग्रामीणों से अपील की है कि जब तक बाघ को पकड़कर जंगल में नहीं छोड़ा जाता, वे जंगली इलाकों में जाने से बचें।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में 54 बाघ
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 54 बाघ हैं। इनमें से कई का इलाका घोड़ाघाट और आसपास के जंगलों से सटा हुआ है, जिससे मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रहती हैं।


