
पटना | बिहार सरकार ने राज्य में टोल वसूली व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और सख्त बनाने के उद्देश्य से नई टोल नीति लागू कर दी है। पथ निर्माण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब राज्य के चयनित स्टेट हाईवे और 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले पुलों पर व्यावसायिक वाहनों से निर्धारित टोल टैक्स वसूला जाएगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से टोल वसूली को व्यवस्थित करना और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।
टोल चोरी करने पर लगेगा दोगुना जुर्माना
नई नीति के तहत यदि कोई वाहन चालक टोल प्लाजा से बिना भुगतान किए गुजरता है या जानबूझकर टोल देने से इनकार करता है, तो उससे सामान्य टोल शुल्क के साथ दोगुना जुर्माना वसूला जाएगा।
ऐसे मामलों में वाहन मालिक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ई-नोटिस भेजा जाएगा और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होगी।
72 घंटे में भुगतान किया तो जुर्माने से राहत
सरकार ने वाहन मालिकों को राहत देते हुए प्रावधान किया है कि यदि ई-नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर टोल शुल्क जमा कर दिया जाता है, तो अतिरिक्त जुर्माना नहीं लगेगा।
लेकिन यदि 15 दिनों तक भुगतान नहीं किया जाता, तो विभाग को राज्य में कहीं भी वाहन रोककर टोल और जुर्माने की राशि वसूलने का अधिकार होगा।
बीमा, PUC और ट्रांसफर जैसी सेवाओं पर भी रोक
लगातार भुगतान से बचने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी।
बकाया राशि जमा नहीं करने पर—
- वाहन का बीमा (Insurance) अपडेट नहीं होगा।
- प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) जारी नहीं होगा।
- एनओसी (NOC) नहीं मिलेगी।
- वाहन का स्वामित्व हस्तांतरण (Transfer) भी रोका जा सकता है।
इसके लिए टोल कलेक्शन सिस्टम को वाहन पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे डिफॉल्टर वाहनों की पहचान आसान होगी।
गलत नोटिस मिलने पर मिलेगी आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा
यदि किसी वाहन मालिक को लगता है कि जारी किया गया ई-नोटिस गलत है, तो वह 72 घंटे के भीतर राज्य सरकार के निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर आपत्ति दर्ज करा सकेगा।
संबंधित अधिकारी को 5 दिनों के भीतर शिकायत का निपटारा करना होगा। यदि तय समय में निर्णय नहीं लिया जाता, तो संबंधित बकाया राशि स्वतः समाप्त मानी जाएगी और रिकॉर्ड अपडेट कर दिया जाएगा।
चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू होगी व्यवस्था
पथ निर्माण विभाग के अनुसार विभिन्न जिलों में उन स्टेट हाईवे और पुलों की पहचान की जा रही है, जहां ट्रैफिक घनत्व और तकनीकी मानकों के आधार पर टोल वसूली की जाएगी।
कई स्थानों पर ट्रैफिक सर्वे पूरा हो चुका है और चरणबद्ध तरीके से पूरे बिहार में डिजिटल टोल प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी।
व्यावसायिक वाहनों पर रहेगा मुख्य फोकस
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई टोल नीति मुख्य रूप से व्यावसायिक वाहनों पर लागू होगी। डिजिटल निगरानी, ऑनलाइन भुगतान और वाहन डेटाबेस के एकीकरण के जरिए बिहार में टोल प्रबंधन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का लक्ष्य रखा गया है।


