बिहार में लीची की नई क्रांति: सबौर कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित की सीडलेस ‘बेदाना लीची’

भागलपुर, 28 मई 2025: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर, भागलपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने लीची उत्पादन में बड़ी सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने एक नई किस्म की सीडलेस लीची तैयार की है, जिसे ‘बेदाना लीची’ नाम दिया गया है। यह लीची आकार में बड़ी, रस से भरपूर और बीज रहित (या अत्यंत छोटे बीज वाली) है।

बिहार देश में लीची उत्पादन का लगभग 50% योगदान देता है और शाही लीची को पहले ही GI टैग प्राप्त है। अब विश्वविद्यालय ने बेदाना लीची के लिए भी GI टैग की मांग की है। कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने भारत सरकार को इस संबंध में अनुरोध पत्र भेजा है।

बेदाना लीची की विशेषताएँ:

  • शाही लीची से आकार में बड़ी
  • गूदा अधिक और स्वाद में बेहतर
  • बीज बहुत छोटा या बिल्कुल नहीं
  • एक्सपोर्ट और प्रोसेसिंग के लिए आदर्श

डॉ. डी.आर. सिंह ने जानकारी दी कि पहले विश्वविद्यालय में केवल 50 बेदाना लीची के पेड़ थे, अब 250 से 300 पौधों को तैयार किया जा रहा है। इससे अगले कुछ वर्षों में यह किस्म व्यावसायिक खेती के लिए उपलब्ध होगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए अपार संभावनाएं

शाही लीची की तरह बेदाना लीची भी विदेशी बाजार में लोकप्रिय हो सकती है। कम बीज और ज्यादा पल्प होने के कारण इसकी मांग जूस, कैंडी और प्रोसेसिंग उद्योगों में अधिक हो सकती है। इसके जरिए बिहार के किसानों को नई आमदनी के रास्ते मिल सकते हैं।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय की यह पहल बिहार को न सिर्फ लीची उत्पादन में अग्रणी बनाएगी, बल्कि राज्य के फल उत्पादन में नवाचार की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।


 

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