बिहार में नई सरकार का गठन आधिकारिक रूप से हो गया है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गुरुवार को आयोजित भव्य शपथग्रहण समारोह में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
सुबह से ही गांधी मैदान में राजनीतिक हलचल तेज थी, क्योंकि यह शपथग्रहण सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि बिहार की सामाजिक और राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव लेकर आया है।
26 मंत्रियों को जगह, 19 पुराने मंत्रियों की छुट्टी
NDA की नई सरकार में इस बार
- BJP के 14 मंत्री
- JDU के 8 मंत्री
- LJP (रामविलास) के 2 मंत्री
- HAM के 1 मंत्री
- RLM (रालोमो) के 1 मंत्री
को शामिल किया गया है।
लेकिन बड़ा फैसला यह रहा कि पिछली सरकार के 19 मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जबकि 12 नए चेहरों को पहली बार मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया।
इसे हाल के चुनाव परिणाम, सामाजिक समीकरण और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया गया सबसे बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है।
कौन-कौन मंत्री नहीं बने? कई बड़े नाम गायब
नई सूची में कई चर्चित चेहरे अनुपस्थित हैं। सबसे बड़ा नाम है—
- रेणु देवी (पूर्व डिप्टी सीएम)
इसके अलावा इन मंत्रियों को भी इस बार मौका नहीं मिला—
- केदार गुप्ता
- नीतीश मिश्रा
- नीरज सिंह बब्लू
- कृष्ण कुमार मंटू
- जीवेश मिश्रा
- महेश्वर हजारी
- डॉ. सुनील कुमार
- शिला मंडल
- प्रेम कुमार
- हरि सहनी
- जनक राम
- राजू सिंह
- विजय कुमार मंडल
- रत्नेश सदा
- कृष्ण नंदन पासवान
- जयंत राज
चकाई के पूर्व मंत्री सुमित कुमार सिंह अपनी सीट हार गए थे, इसलिए उनका बाहर होना तय था।
रीगा के विधायक मोतीलाल प्रसाद को पार्टी ने टिकट ही नहीं दिया था, उनकी जगह नए उम्मीदवार को उतारा गया था।
कैबिनेट में शामिल 12 नए चेहरे — कौन हैं ये नेता?
नई कैबिनेट में जो 12 नेता पहली बार शामिल हुए हैं, उनमें प्रमुख नाम हैं—
BJP कोटे से:
- रामकृपाल यादव
- संजय सिंह टाइगर
- अरुण शंकर प्रसाद
- रमा निषाद
- लखेंद्र कुमार रौशन
- श्रेयसी सिंह
LJP (रामविलास) कोटे से:
- संजय कुमार
- संजय कुमार सिंह
RLM (रालोमो) कोटे से:
- दीपक प्रकाश कुशवाहा
इनके अलावा कुछ और नए चेहरे भी पहली बार मंत्रिपद पर पहुंचे हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा दीपक प्रकाश कुशवाहा की
रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश कुशवाहा इस मंत्रिपरिषद के सबसे चर्चित नए चेहरे हैं।
वे न तो विधायक हैं, न ही एमएलसी।
संविधान के अनुसार उन्हें 6 महीने के भीतर विधान परिषद का सदस्य बनना ही होगा।
उन्हें मंत्री बनाए जाने को “लव–कुश समीकरण” को मजबूत करने की रणनीति माना जा रहा है।
श्रेयसी सिंह — युवा शक्ति और महिला नेतृत्व का नया चेहरा
अंतरराष्ट्रीय शूटिंग खिलाड़ी और जमुई से दूसरी बार विधायक श्रेयसी सिंह को कैबिनेट में शामिल कर बीजेपी ने बड़ा दांव खेला है।
वे अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़, साफ-सुथरी छवि और युवा नेतृत्व की वजह से पहले ही सुर्खियों में थीं।
पार्टी उन्हें बिहार में महिला नेतृत्व का चेहरा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
57 हजार वोट से जीतने वाली रमा निषाद को भी मिला इनाम
मुजफ्फरपुर के औराई सीट से पहली बार विधायक बनीं रमा निषाद ने 57 हजार से अधिक वोटों की विशाल जीत हासिल की थी।
वे पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी हैं।
निषाद समाज को साधने की भाजपा की रणनीति में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।
मंत्रिमंडल गठन से निकले राजनीतिक संदेश
नई कैबिनेट की संरचना कई बड़े राजनीतिक संकेत देती है—
1. लव–कुश समीकरण को मजबूती
दीपक प्रकाश कुशवाहा की एंट्री से NDA ने साफ संदेश दिया कि कुशवाहा–कुर्मी समीकरण को प्राथमिकता दी जाएगी।
2. महिलाओं की बढ़ती भूमिका
श्रेयसी सिंह और रमा निषाद को कैबिनेट में शामिल करना इस दिशा में बड़ा कदम है।
3. नए चेहरों पर भरोसा
12 नए मंत्रियों को शामिल कर NDA ने भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।
4. परफॉर्मेंस के आधार पर निर्णय
पिछली सरकार के कई कमज़ोर प्रदर्शन वाले मंत्रियों को बाहर कर दिया गया है।
5. NDA की सामूहिक मजबूती
BJP—JDU—LJP(रा)—HAM—रालोमो
सभी को प्रतिनिधित्व देकर एकजुटता का संदेश दिया गया है।


