हस्तशिल्प को नया जीवन: मधुबनी के झंझारपुर में शुरू हुआ 5 दिवसीय प्रचार-प्रसार कार्यक्रम

उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने किया उद्घाटन, बोले – मधुबनी पेंटिंग हमारी सांस्कृतिक धरोहर

पटना, 7 अगस्त।बिहार की गौरवशाली हस्तशिल्प परंपरा को नया आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने गुरुवार को मधुबनी जिले के झंझारपुर प्रखंड में 5 दिवसीय हस्तशिल्प प्रचार-प्रसार कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम झंझारपुर के 17 विभिन्न स्थानों पर एक साथ आयोजित हो रहा है और इसका उद्देश्य है — जीआई टैग प्राप्त मधुबनी पेंटिंग जैसी पारंपरिक कलाओं का संरक्षण, संवर्धन और समकालीन बाजार से जोड़ना।

सरकार का संकल्प: पारंपरिक कला को दें आधुनिक पहचान

उद्घाटन समारोह के दौरान मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा,
“जीआई टैग प्राप्त मधुबनी पेंटिंग बिहार की सांस्कृतिक पहचान है और इसे नया जीवन देने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।”
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि एक संस्कृति और कौशल के पुनर्जागरण का अभियान है।

क्या है कार्यक्रम का उद्देश्य?

इस हस्तशिल्प प्रचार-प्रसार अभियान के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • स्थानीय और ग्रामीण शिल्पकारों को मधुबनी पेंटिंग समेत अन्य जीआई टैग प्राप्त हस्तशिल्प की तकनीकी, विपणन और डिजाइन संबंधी बारीकियों से अवगत कराना
  • डिजिटल मार्केटिंग, नवाचार, ब्रांडिंग और निर्यात प्रक्रिया जैसे विषयों पर उन्हें प्रशिक्षित करना
  • शिल्पकारों को बाजार के अनुरूप कौशल से सुसज्जित करना और उनके उत्पादों की गुणवत्ता तथा पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना

विशेषज्ञों से मिलेगा प्रशिक्षण

कार्यक्रम के दौरान मधुबनी चित्रकला के साथ-साथ गुणवत्ता प्रबंधन, ब्रांडिंग रणनीति, डिजिटल प्रचार-प्रसार और अंतरराष्ट्रीय निर्यात की प्रक्रिया जैसे विषयों पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे। यह प्रशिक्षण शिल्पकारों के लिए एक व्यावसायिक अवसर का नया द्वार खोलेगा।

महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी

इस आयोजन में महिला शिल्पकारों की बड़ी भागीदारी रही, जो न सिर्फ इस कला की परंपरा को जीवित रखे हुए हैं बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर भी अग्रसर हैं। कार्यक्रम में जिले एवं प्रखंड स्तर के कई पदाधिकारी, प्रशिक्षक, हस्तशिल्प विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।


बिहार के लिए विशेष महत्व

यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोककला के पुनर्जीवन का एक संगठित प्रयास है। बिहार की परंपरागत हस्तशिल्प, विशेषकर मधुबनी पेंटिंग, को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है।


 

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