महाप्राण ‘निराला’ की याद में गुंजायमान हुआ न्यू फरक्का स्टेशन: मालदा मंडल ने मनाई प्रख्यात साहित्यकार की जयंती; कवियों ने फागुन और होली के रंगों से सजाई महफिल

न्यू फरक्का/मालदा | 26 फरवरी, 2026 रेलवे स्टेशन केवल यात्रा के पड़ाव नहीं, बल्कि कला और साहित्य के संगम भी बन सकते हैं। इसकी एक जीवंत बानगी न्यू फरक्का रेलवे स्टेशन परिसर में देखने को मिली। पूर्व रेलवे के मालदा मंडल के राजभाषा विभाग के तत्वावधान में मंगलवार, 24 फरवरी को छायावाद के आधार स्तंभ और प्रख्यात साहित्यकार सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की जयंती अत्यंत गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर साहित्यकारों और रेल अधिकारियों ने निराला जी के कालजयी कृतित्व को याद करते हुए उन्हें सामाजिक चेतना का अग्रदूत बताया।

DRM के मार्गदर्शन में साहित्यिक समागम

​यह आयोजन मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यू फरक्का के सहायक अभियंता सह ‘लोको राजभाषा कार्यान्वयन समिति’ के अध्यक्ष श्री विपुल राय शर्मा ने की।

  • पुष्पांजलि: समारोह का शुभारंभ निराला जी के तैलचित्र पर श्रद्धासुमन और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
  • सम्मान: अध्यक्ष महोदय ने दूर-दराज से आए आमंत्रित विद्वानों और वक्ताओं को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया।

साहित्यिक संगम: पटना से भागलपुर तक के विद्वानों ने डाला प्रकाश

​कार्यक्रम में बिहार और बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों ने निराला जी के बहुआयामी व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की।

  • प्रमुख वक्ता: साहेबगंज से श्री सुधीर कुमार श्रीवास्तव, श्री पुरुषोत्तम गुप्ता, श्री श्याम लोचन एवं श्री अमन कुमार होली; पटना से श्री विनय कुमार झा ‘विमल’; बड़हरवा से सुश्री इंद्राणी; भागलपुर से श्री सच्चिदानंद किरण तथा स्थानीय स्तर से श्री जितेंद्र कुमार सिंह ने अपने विचार रखे।
  • प्रमुख विचार: वक्ताओं ने कहा कि निराला जी केवल एक कवि नहीं, बल्कि एक निर्भीक पत्रकार और अद्वितीय साहित्यकार थे। उनकी रचनाएं समाज के वंचित वर्ग की आवाज हैं और ‘वर्तमान परिवेश’ में उनकी प्रासंगिकता और बढ़ गई है।

उत्सवमय वातावरण: फागुन और होली की काव्य फुहारें

​चूंकि होली का त्योहार नजदीक है, इस साहित्यिक बैठक में उत्सव का रंग भी देखने को मिला। उपस्थित कवियों ने ‘फागुन’ और ‘होली’ विषयक कविताओं का पाठ किया।

“स्टेशन परिसर में जब फागुन की बयार और निराला जी की ओजपूर्ण पंक्तियाँ गूंजीं, तो वहाँ मौजूद यात्री और रेल कर्मचारी भी मंत्रमुग्ध हो उठे। कवियों ने अपनी रचनाओं से पूरे वातावरण को साहित्यिक और उत्सवमय बना दिया।”

 

सफल संचालन और भागीदारी

​कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ अनुवादक श्री विद्यासागर राम ने अपनी प्रभावी शैली में किया। अंत में कनिष्ठ अनुवादक श्री इंद्र ज्योति राय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर स्टेराकास (STERAKAS), न्यू फरक्का के सचिव श्री निर्मल ठाकुर सहित बड़ी संख्या में रेल अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

VOB का नजरिया: रेल परिसर में ‘सांस्कृतिक’ चेतना

​भागदौड़ भरी रेल प्रणाली के बीच ऐसे साहित्यिक आयोजनों का होना सराहनीय है। यह न केवल कर्मचारियों के बीच राजभाषा हिंदी के प्रति प्रेम बढ़ाता है, बल्कि रेल परिसरों में एक स्वस्थ सांस्कृतिक चेतना का भी निर्माण करता है। न्यू फरक्का स्टेशन पर निराला जी की जयंती मनाना उन लाखों यात्रियों के लिए भी एक सुखद अनुभव रहा, जो उस वक्त वहाँ से गुजर रहे थे।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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