नवादा के बिरनामां में शराब माफिया का खूनी खेल: छापेमारी करने गई पुलिस टीम पर पत्थरों और लाठियों से हमला, तीन दारोगा समेत छह पुलिसकर्मी लहूलुहान

नवादा/काशीचक। बिहार में पूर्ण शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए जुटी पुलिस टीम को एक बार फिर उपद्रवियों और धंधेबाजों के भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है। नवादा जिले के काशीचक थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था और अपराधियों के बीच सीधी भिड़ंत की एक खौफनाक तस्वीर सामने आई है। बीती बुधवार की देर शाम, जब पुलिस की एक विशेष टीम अवैध शराब के अड्डों को ध्वस्त करने और धंधेबाजों को दबोचने के लिए बिरनामां गांव पहुँची, तो वहां पहले से घात लगाए बैठे माफिया और उनके समर्थकों ने पुलिस बल पर जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में पुलिस की गाड़ी को निशाना बनाने के साथ-साथ जवानों पर ईंट-पत्थर, लाठी और डंडों से ताबड़तोड़ प्रहार किए गए। इस हिंसक झड़प में तीन सब इंस्पेक्टर (दारोगा) समेत कुल छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। अचानक हुए इस हमले से एक बार के लिए पुलिस टीम को पीछे हटना पड़ा, लेकिन जल्द ही अतिरिक्त पुलिस बल ने मोर्चा संभाला और गांव को चारों तरफ से घेरकर एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। पुलिस की इस जवाबी कार्रवाई में महिलाओं समेत कुल 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना ने नवादा सहित पूरे प्रदेश में शराब माफिया के बढ़ते दुस्साहस और पुलिस की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

आधी रात को रणक्षेत्र बना बिरनामां गाँव

​नवादा जिले का काशीचक थाना क्षेत्र बुधवार की शाम तक सामान्य था, लेकिन जैसे ही सूरज ढला, बिरनामां गांव की गलियां चीख-पुकार और पथराव की आवाजों से गूंज उठीं। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के एक हिस्से में बड़े पैमाने पर अवैध शराब का निर्माण और भंडारण किया जा रहा है। इसी सूचना के आधार पर काशीचक थाना की एक टीम दलबल के साथ छापेमारी के लिए रवाना हुई। पुलिस को उम्मीद थी कि वे धंधेबाजों को रंगे हाथ दबोच लेंगे, लेकिन माफिया का खुफिया तंत्र इतना मजबूत था कि उन्हें पुलिस के आने की भनक पहले ही लग चुकी थी।

​जैसे ही पुलिस की गाड़ियां गांव की सीमा में दाखिल हुईं, अंधेरे का फायदा उठाकर उपद्रवियों ने चारों तरफ से घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छतों और गलियों के मोर्चों से पुलिस पर भारी पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। पुलिसकर्मी जब तक अपनी पोजीशन संभाल पाते, तब तक लाठी-डंडों से लैस भीड़ ने उन पर हमला बोल दिया। इस हमले का मुख्य उद्देश्य पुलिस को डराकर भगाना और हिरासत में लिए जाने वाले संभावित धंधेबाजों को बचाना था। पुलिस की गाड़ियों के शीशे चकनाचूर हो गए और कई जवान जमीन पर गिरकर तड़पने लगे।

खून से लथपथ हुए कानून के रखवाले: 3 दारोगा घायल

​इस हिंसक हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सुरक्षा मानकों के बावजूद पुलिसकर्मी खुद को चोटिल होने से नहीं बचा सके। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस हमले में कुल छह पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें तीन सब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी शामिल हैं। घायलों के सिर, हाथ और पीठ पर गंभीर चोटें आई हैं। ईंट और पत्थरों के सीधे प्रहार से दारोगा स्तर के अधिकारियों के शरीर से खून बहने लगा, जिसके बाद स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई।

​घायलों को तत्काल घटनास्थल से निकालकर काशीचक बौरी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष टीम ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ पुलिसकर्मियों को अंदरूनी चोटें भी आई हैं, जिनका बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है। इस हमले ने यह साबित कर दिया कि शराबबंदी कानून को लागू करने के लिए पुलिस को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। घायल पुलिसकर्मियों का मनोबल बनाए रखने के लिए जिले के वरीय अधिकारी भी अस्पताल पहुँचे और उनकी स्थिति का जायजा लिया।

अतिरिक्त बल का धावा: महिलाओं समेत 11 गिरफ्तार

​हमले की खबर मिलते ही नवादा जिला मुख्यालय में हड़कंप मच गया। वरीय पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर तत्काल कई थानों की पुलिस और अतिरिक्त सुरक्षा बलों को बिरनामां गांव के लिए रवाना किया गया। भारी संख्या में पुलिस बल के पहुँचते ही उपद्रवियों के हौसले पस्त होने लगे। पुलिस ने पूरे गांव की घेराबंदी कर दी और एक-एक घर की तलाशी शुरू की।

​इस सघन छापेमारी के दौरान पुलिस ने उन चेहरों को चिन्हित किया जिन्होंने हमले की अगुवाई की थी। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए कुल 11 आरोपितों को धर दबोचा है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि महिलाओं को इसलिए आगे किया गया था ताकि पुलिस कार्रवाई करने में हिचकिचाए, लेकिन कानून पर हमले को देखते हुए पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सके। पुलिस अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है जो मौके से फरार होने में सफल रहे।

शराबबंदी और पुलिस की चुनौतियां

​नवादा की यह घटना कोई इकलौती वारदात नहीं है, बल्कि बिहार के विभिन्न जिलों से अक्सर ऐसी खबरें आती रहती हैं जहाँ शराब माफिया पुलिस पर हमला करते हैं। बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से ही माफिया ने अपने नेटवर्क को और अधिक हिंसक बना लिया है। वे अब न केवल तस्करी के नए तरीके अपना रहे हैं, बल्कि पकड़े जाने के डर से सुरक्षा बलों पर जानलेवा हमले करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।

​बिरनामां गांव में हुई यह वारदात यह भी दर्शाती है कि स्थानीय स्तर पर माफिया को कुछ ग्रामीणों का समर्थन प्राप्त है, जिसका उपयोग वे ढाल के रूप में करते हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के हमलों से उनका मनोबल टूटने वाला नहीं है, बल्कि वे और अधिक मजबूती से इन अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाएंगे। प्रशासन अब बिरनामां गांव के उन घरों की भी पहचान कर रहा है जहाँ से पत्थरबाजी की गई थी, ताकि उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।

गांव में तनाव, पुलिस का फ्लैग मार्च

​घटना के बाद से बिरनामां गांव में भारी तनाव का माहौल है। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है और अधिकांश पुरुष गिरफ्तारी के डर से घर छोड़कर फरार हैं। पुलिस ने इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करने के लिए फ्लैग मार्च निकाला है। वरीय पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस पर हमला करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

​सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती घायल पुलिसकर्मियों की स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन इस घटना के घाव नवादा पुलिस के जेहन में लंबे समय तक रहेंगे। पुलिस ने 11 गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ हत्या के प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा डालने और मद्यनिषेध कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में शराब माफिया के खिलाफ और भी बड़े अभियान चलाए जाने की संभावना है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे अपराधियों का साथ न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

​नवादा की यह धरती एक बार फिर गवाह बनी है कि कैसे शराब की एक बूंद को रोकने के लिए पुलिसकर्मियों को अपना खून बहाना पड़ता है। बिरनामां की यह हिंसक शाम बिहार के सामाजिक और प्रशासनिक संघर्ष की एक कड़वी सच्चाई को बयां करती है।

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