
भागलपुर/नवगछिया: नवगछिया पुलिस ने महिलाओं को आसान ऋण उपलब्ध कराने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरजिला गिरोह का पर्दाफाश कर बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक महिला समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह फर्जी फाइनेंस कंपनी चलाकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को कम समय में बड़ा ऋण दिलाने का लालच देता था और उनसे हजारों रुपये वसूल कर फरार हो जाता था।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने नवगछिया क्षेत्र की 100 से अधिक महिलाओं को अपना शिकार बनाया और लाखों रुपये की अवैध वसूली की। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने विशेष जांच अभियान चलाया और सहरसा तथा मधेपुरा जिले में छापेमारी कर गिरोह के प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।
शिकायत से खुला बड़े ठगी नेटवर्क का राज
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब नवगछिया क्षेत्र की एक महिला ने साइबर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि एक निजी फाइनेंस कंपनी महिलाओं को आसान शर्तों पर व्यवसायिक ऋण उपलब्ध कराने का दावा कर रही थी।
महिला ने बताया कि कंपनी के प्रतिनिधि यह दावा करते थे कि यदि कोई महिला 10 हजार रुपये जमा करती है तो उसे मात्र 12 घंटे के भीतर 2 लाख रुपये तक का व्यवसायिक ऋण उपलब्ध करा दिया जाएगा। इस आकर्षक प्रस्ताव को सुनकर कई महिलाओं ने कंपनी पर भरोसा कर लिया और निर्धारित राशि जमा कर दी।
जब तय समय सीमा के भीतर ऋण नहीं मिला और कंपनी के लोग टालमटोल करने लगे तो महिलाओं को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंची।
एनएच-31 के पास संचालित हो रही थी कथित कंपनी
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि नवगछिया थाना क्षेत्र में एनएच-31 स्थित संतोष धर्मकांटा के समीप एक अर्धनिर्मित भवन में कथित रूप से फाइनेंस कंपनी का संचालन किया जा रहा था।
कंपनी का नाम आईबीएल फाइनेंस लिमिटेड बताया जा रहा था। यहां महिलाओं को बुलाकर उन्हें आसान ऋण योजना के बारे में जानकारी दी जाती थी। कर्मचारियों द्वारा भरोसा दिलाया जाता था कि जमा राशि के बदले उन्हें शीघ्र ही बड़ी रकम का व्यवसायिक ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार कार्यालय का माहौल इस तरह तैयार किया गया था कि लोगों को यह एक वैध और पंजीकृत वित्तीय संस्था प्रतीत हो। इसी कारण बड़ी संख्या में महिलाएं झांसे में आ गईं।
22 महिलाओं से शुरू हुई जांच, 100 से अधिक पीड़ितों की आशंका
प्रारंभिक शिकायत में 22 महिलाओं द्वारा राशि जमा करने की बात सामने आई थी। हालांकि पुलिस जांच आगे बढ़ी तो यह संख्या कहीं अधिक निकलकर सामने आई।
जांच अधिकारियों का मानना है कि अब तक 100 से अधिक महिलाएं इस गिरोह की ठगी का शिकार हो चुकी हैं। कई महिलाओं ने ऋण पाने की उम्मीद में अपनी जमा पूंजी तक कंपनी के पास जमा कर दी थी।
पुलिस का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, नए पीड़ित सामने आ रहे हैं। इसलिए यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। अधिकारियों को आशंका है कि ठगी की कुल रकम लाखों रुपये में हो सकती है।
विशेष टीम बनाकर शुरू की गई कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक वैभव शर्मा ने विशेष जांच टीम का गठन किया। टीम को तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच करने का निर्देश दिया गया।
जांच के दौरान मोबाइल नंबर, बैंकिंग गतिविधियों और संदिग्ध संपर्कों का विश्लेषण किया गया। इसके बाद पुलिस को गिरोह के सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
पुलिस ने विभिन्न जिलों में उनके संभावित ठिकानों की पहचान की और समन्वित कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद सहरसा और मधेपुरा जिलों में एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की गई।
एक महिला समेत पांच आरोपी गिरफ्तार
पुलिस की कार्रवाई के दौरान पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपितों में एक महिला भी शामिल है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार लोगों में कटिहार जिले के फलका थाना क्षेत्र निवासी संतोष कुमार, मधेपुरा जिले के मुरलीगंज थाना क्षेत्र निवासी रतन कुमार, पूर्णिया के भट्ठा बाजार निवासी सुशांत कुमार, मधेपुरा जिले के भराही थाना क्षेत्र निवासी लक्की कुमार तथा उषा देवी शामिल हैं।
गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपितों से पूछताछ की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपितों ने महिलाओं से पैसे लेने और ऋण दिलाने के नाम पर काम करने की बात स्वीकार की है।
छापेमारी में मिले कई अहम सबूत
पुलिस ने आरोपितों के पास से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं। बरामद वस्तुओं में आठ मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड, एक स्कैनर, 10 हजार रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल और कई दस्तावेज शामिल हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि ये दस्तावेज गिरोह के संचालन और ठगी की प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत साबित हो सकते हैं। बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की भी तकनीकी जांच की जा रही है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह ने किन-किन क्षेत्रों में अपने नेटवर्क का विस्तार किया था और कितने लोगों को अपने जाल में फंसाया।
केवल आठ-नौ दिनों से सक्रिय था गिरोह
पूछताछ के दौरान आरोपितों ने बताया कि वे पिछले आठ से नौ दिनों से नवगछिया क्षेत्र में सक्रिय थे। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को व्यवसायिक ऋण का लालच देकर बड़ी संख्या में लोगों से पैसे जमा कराए।
जांच में सामने आया है कि गिरोह विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाता था। उन्हें कम समय में बड़ा ऋण मिलने का भरोसा दिलाया जाता था ताकि वे आसानी से झांसे में आ जाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे गिरोह अक्सर उन लोगों को निशाना बनाते हैं जिन्हें बैंकिंग प्रक्रिया और वित्तीय नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती।
साइबर थाना में दर्ज हुआ मामला
पूरे मामले में साइबर थाना नवगछिया में कांड संख्या 27/26 दर्ज किया गया है। पुलिस विभिन्न धाराओं के तहत आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर रही है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि गिरोह के कुछ सदस्य अभी भी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
इसके अलावा बैंक खातों, लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है ताकि ठगी की वास्तविक राशि और नेटवर्क की व्यापकता का पता लगाया जा सके।
एसपी ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
नवगछिया के पुलिस अधीक्षक वैभव शर्मा ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी वित्तीय संस्था, निवेश योजना या ऋण सुविधा में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता और पंजीकरण की पूरी जांच करनी चाहिए।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि यदि कोई संस्था कम समय में बड़ी राशि का ऋण देने या असामान्य लाभ का दावा करती है तो उसकी जानकारी संबंधित विभागों और पुलिस से सत्यापित अवश्य करें।
एसपी ने यह भी कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और लोगों को ठगी से बचाया जा सके।
महिलाओं को जागरूक करने की जरूरत
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आर्थिक रूप से कमजोर और वित्तीय जानकारी से वंचित लोगों को निशाना बनाकर ठगी करने वाले गिरोह लगातार सक्रिय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।
फिलहाल नवगछिया पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि जांच अभी जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि आगे की पड़ताल में इस फर्जी फाइनेंस नेटवर्क से जुड़े और भी कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।


