नवगछिया में पुलिस पर वसूली और ब्लैकमेलिंग का आरोप, ट्रक चालक की शिकायत के बाद दरोगा निलंबित

भागलपुर जिले के नवगछिया पुलिस क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ट्रक चालक द्वारा पुलिस गश्ती दल पर अवैध वसूली, धमकी और ब्लैकमेलिंग के आरोप लगाए जाने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की शिकायत सीधे नवगछिया पुलिस अधीक्षक तक पहुंचने के बाद तत्काल कार्रवाई की गई, जिसमें एक पुलिस पदाधिकारी को निलंबित कर दिया गया जबकि ड्यूटी पर मौजूद कई अन्य कर्मियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है। यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच पुलिस जवाबदेही को लेकर बहस छिड़ गई है।

मामला नवगछिया पुलिस जिले के रंगरा थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। आरोप लगाने वाले ट्रक चालक की पहचान हरियाणा निवासी सुरेंद्र यादव के रूप में हुई है। चालक का कहना है कि वह अपने ट्रक से सामान लेकर नवगछिया की ओर जा रहा था। इसी दौरान देर रात रंगरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक पुलिस गश्ती टीम ने उसके वाहन को रोक लिया। शुरुआत में उसे सामान्य जांच की बात कही गई, लेकिन बाद में स्थिति पूरी तरह बदल गई और घटनाक्रम ने गंभीर आरोपों का रूप ले लिया।

ट्रक चालक के अनुसार वाहन रोकने के बाद पुलिसकर्मियों ने उससे पैसे की मांग की। जब उसने कथित रूप से पैसे देने से इनकार किया तो उसे विभिन्न तरीकों से डराने और दबाव बनाने की कोशिश की गई। चालक का आरोप है कि पुलिस टीम ने उसे यह कहकर भयभीत करने का प्रयास किया कि किसी दुर्घटना या अन्य मामले में उसका नाम जोड़ा जा सकता है। उसने दावा किया कि बाद में उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी गई।

सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया कि पुलिसकर्मियों ने एक युवती को वहां लाकर चालक के साथ वीडियो बनाना शुरू कर दिया। चालक का कहना है कि वह उस युवती को जानता तक नहीं था, लेकिन उसके साथ वीडियो बनाकर उसे बदनाम करने और कानूनी कार्रवाई में फंसाने की धमकी दी गई। आरोप है कि इसी दबाव के जरिए उससे बड़ी रकम की मांग की गई।

शिकायत के अनुसार कथित सौदेबाजी की शुरुआत 30 हजार रुपये से हुई थी। ट्रक चालक का कहना है कि लगातार दबाव और धमकी के बीच आखिरकार रकम कम की गई और 18,500 रुपये देने की बात तय हुई। आरोप है कि पुलिसकर्मी उसे एक पेट्रोल पंप तक ले गए और वहां ऑनलाइन भुगतान करने के लिए कहा गया। जब तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं हो सका तो उसके मोबाइल में उपलब्ध राशि की जांच कर उससे नकद पैसे लिए गए।

चालक ने यह भी आरोप लगाया कि उससे लगभग 18,300 रुपये नकद ले लिए गए और इसके अलावा पुलिस वाहन में डीजल भी भरवाया गया। शिकायत में कहा गया कि पूरी घटना के दौरान उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और भय का माहौल बनाकर पैसे वसूले गए। ट्रक चालक ने बाद में इस पूरे मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से की।

मामले की जानकारी मिलते ही नवगछिया पुलिस अधीक्षक वैभव शर्मा ने इसे गंभीरता से लिया। शिकायत प्राप्त होने के बाद उन्होंने तत्काल जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर रंगरा थाना में पदस्थापित दरोगा धर्मेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा उस समय ड्यूटी पर मौजूद तीन होमगार्ड जवानों को छह महीने के लिए हटाने की कार्रवाई की गई। मामले में शामिल बताए जा रहे एक निजी चालक के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है।

पुलिस अधीक्षक द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई को विभागीय जवाबदेही के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आमतौर पर पुलिसकर्मियों पर लगे आरोपों की जांच में समय लग जाता है, लेकिन इस मामले में शिकायत सामने आने के बाद तुरंत कदम उठाए गए। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी भी जारी है और यदि आगे और तथ्य सामने आते हैं तो अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जिन लोगों के कंधों पर होती है, उन्हीं पर यदि अवैध वसूली और ब्लैकमेलिंग जैसे आरोप लगते हैं तो आम जनता का विश्वास प्रभावित होता है। यही कारण है कि इस मामले को लेकर क्षेत्र में व्यापक चर्चा हो रही है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव होता है। यदि किसी व्यक्ति के साथ गलत व्यवहार हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इस मामले में विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई किया जाना यह दर्शाता है कि पुलिस प्रशासन अपनी छवि को लेकर गंभीर है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक पुलिस व्यवस्था में केवल अपराध नियंत्रण ही नहीं बल्कि जनता के साथ विश्वासपूर्ण संबंध बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार की शिकायत को गंभीरता से लेकर त्वरित जांच करना इसी दिशा में एक आवश्यक कदम माना जाता है। इससे यह संदेश जाता है कि कानून सभी के लिए समान है और वर्दी की आड़ में किसी भी प्रकार की मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।

घटना के बाद पुलिस विभाग ने भी स्पष्ट संकेत दिया है कि अनुशासनहीनता और भ्रष्ट आचरण के मामलों में सख्ती बरती जाएगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इससे पुलिस बल के भीतर जवाबदेही की भावना को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और पुलिस विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। ट्रक चालक के आरोप, संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। हालांकि प्रारंभिक कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और विभाग इस मामले में कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

नवगछिया में सामने आई यह घटना केवल एक शिकायत भर नहीं है, बल्कि यह पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास से जुड़े बड़े सवालों को भी सामने लाती है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।

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