
9 मई 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देशानुसार बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार और जिला विधिक सेवा प्राधिकार, भागलपुर के तत्वावधान में किया जा रहा है। लोक अदालत का आयोजन शनिवार को पूर्वाह्न 10:30 बजे से व्यवहार न्यायालय भागलपुर, नवगछिया और कहलगांव के न्यायालय परिसरों में होगा। इस दौरान मुकदमा पूर्व (Pre-Litigation) और न्यायालयों में लंबित मामलों का आपसी सुलह और समझौते के आधार पर त्वरित निष्पादन किया जाएगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से लोगों से अधिक से अधिक संख्या में राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि लोक अदालत के माध्यम से लोगों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है और कम समय में विवादों का समाधान संभव हो पाता है। यही वजह है कि राष्ट्रीय लोक अदालत को न्याय व्यवस्था में वैकल्पिक और प्रभावी मंच माना जाता है।
इस लोक अदालत में कई प्रकार के मामलों का निपटारा किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शमनीय यानी कम्पाउंडेबल आपराधिक मामले, एन.आई. एक्ट की धारा 138 से संबंधित वाद, बैंक ऋण वसूली से जुड़े मामले, मोटर दुर्घटना दावा वाद, श्रम विवाद, बिजली और पानी बिल से संबंधित विवाद, वैवाहिक विवाद और भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले शामिल हैं।
इसके अलावा सेवा संबंधी विवाद जैसे वेतन, भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े मामलों का भी निष्पादन किया जाएगा। राजस्व संबंधी वे मामले जो जिला न्यायालय में लंबित हैं, उन्हें भी राष्ट्रीय लोक अदालत में रखा जाएगा। साथ ही किराया, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा, माप-तौल और संविदा निष्पादन जैसे अन्य दीवानी मामलों का भी आपसी सहमति से समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
बीएसएनएल से संबंधित मामलों को भी राष्ट्रीय लोक अदालत में शामिल किया गया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार का कहना है कि लोक अदालत के जरिए ऐसे विवादों को कम समय में सुलझाया जा सकता है, जिनमें वर्षों तक न्यायालय में सुनवाई चलती रहती है। इससे पक्षकारों को मानसिक, आर्थिक और समय की बचत होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रीय लोक अदालत न्यायिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। इसका मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करना और लोगों को सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से मामलों का समाधान किया जाता है, इसलिए इसमें फैसले को लेकर विवाद की संभावना भी कम रहती है।
कानूनी जानकार बताते हैं कि लोक अदालत में निपटाए गए मामलों का निर्णय न्यायालय के आदेश की तरह मान्य होता है। यदि किसी मामले का समझौते के आधार पर निपटारा हो जाता है तो उस पर किसी प्रकार की अतिरिक्त कोर्ट फीस नहीं लगती। कई मामलों में पहले से जमा कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है। यही कारण है कि लोग लोक अदालत को विवाद समाधान का आसान और प्रभावी तरीका मानते हैं।
भागलपुर, नवगछिया और कहलगांव में आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और संबंधित विभागों को मामलों की सूची तैयार करने और पक्षकारों को सूचना देने का निर्देश दिया गया है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने अधिवक्ताओं और आम लोगों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक शमनीय मामलों को लोक अदालत में लाकर आपसी सहमति से समाधान कराएं। अधिकारियों का कहना है कि यह मंच लोगों के बीच आपसी सौहार्द और विश्वास को भी मजबूत करता है।
लोक अदालत में बैंक ऋण वसूली के मामलों के निपटारे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कई बार छोटे ऋण संबंधी मामले वर्षों तक न्यायालयों में लंबित रहते हैं, जिससे बैंक और ग्राहक दोनों को परेशानी होती है। लोक अदालत के माध्यम से ऐसे मामलों का आपसी समझौते से समाधान संभव हो पाता है।
वैवाहिक विवादों के मामलों में भी लोक अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। परिवारिक मामलों में समझौता आधारित समाधान से रिश्तों में सुधार की संभावना बनी रहती है और लंबे कानूनी विवाद से बचाव होता है। इसी तरह मोटर दुर्घटना दावा वादों में पीड़ित पक्ष को शीघ्र राहत दिलाने में भी लोक अदालत कारगर साबित होती है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने लोगों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। अधिक जानकारी और सहायता के लिए लोग टॉल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा 0641-2401017 नंबर और ई-मेल [email protected] के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्यायिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम होती है और आम लोगों को सस्ता, सरल और त्वरित न्याय मिल पाता है। विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह व्यवस्था काफी लाभकारी मानी जाती है।
भागलपुर में होने वाली इस राष्ट्रीय लोक अदालत से बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार का मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोग इस अवसर का लाभ उठाते हैं तो कई पुराने विवादों का समाधान संभव हो सकेगा और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।
राष्ट्रीय लोक अदालत का यह आयोजन न केवल लंबित मामलों के निपटारे में मदद करेगा, बल्कि लोगों के बीच कानूनी जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार भी बड़ी संख्या में मामलों का सफल निष्पादन किया जाएगा और लोगों को त्वरित न्याय का लाभ मिलेगा।


