बिहार के डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा देने की तैयारी, नंदकिशोर राम ने संभाला विभागीय जिम्मा

बिहार में नई सरकार के गठन के बाद विभागों में नए मंत्रियों के पदभार ग्रहण करने का दौर जारी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को नंदकिशोर राम ने पटना स्थित विकास भवन में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग का विधिवत कार्यभार संभाल लिया। उनके पदभार ग्रहण के साथ ही विभाग में नई उम्मीदों और नई योजनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लाखों लोगों की आजीविका से सीधे जुड़े इस विभाग को राज्य के विकास की दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। ऐसे में नंदकिशोर राम की नियुक्ति को सरकार के महत्वपूर्ण फैसलों में गिना जा रहा है।

विकास भवन में आयोजित पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। विभाग की सचिव शृष्त कपिल अशोक ने मंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट किया। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि नए नेतृत्व में विभाग की योजनाओं को और गति मिलेगी तथा पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में नई पहल देखने को मिलेगी।

पदभार संभालने के बाद नंदकिशोर राम ने विभागीय अधिकारियों के साथ प्रारंभिक बैठक भी की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि उनकी प्राथमिकता विभागीय योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की होगी। उन्होंने कहा कि बिहार की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और वहां पशुपालन तथा मत्स्य पालन लोगों की आय का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि इन क्षेत्रों को मजबूत बनाकर लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर की जाए।

उन्होंने कहा कि डेयरी और पशुपालन केवल पारंपरिक रोजगार नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं। बिहार में लाखों परिवार गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशुओं के पालन से अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे में विभाग का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि पशुपालकों की आय बढ़ाने और उन्हें आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी होना चाहिए।

मंत्री ने संकेत दिया कि आने वाले समय में पशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में विशेष काम किया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में पशु चिकित्सालयों की स्थिति सुधारने, टीकाकरण अभियान तेज करने और बीमारियों की रोकथाम के लिए नई योजनाएं तैयार की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि पशुधन की सुरक्षा और स्वास्थ्य बेहतर होने से सीधे तौर पर किसानों और पशुपालकों को लाभ मिलेगा।

इसके अलावा नस्ल सुधार को लेकर भी विभाग विशेष ध्यान दे सकता है। अधिकारियों के अनुसार राज्य में कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं के विस्तार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर पहले से काम चल रहा है। अब नई सरकार के नेतृत्व में इसे और व्यापक स्तर पर लागू किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर नस्ल के पशुओं से दूध उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय भी बढ़ेगी।

डेयरी क्षेत्र को लेकर भी मंत्री ने सकारात्मक संकेत दिए। बिहार में सुधा ब्रांड पहले से ही मजबूत पहचान बना चुका है। अब सरकार का लक्ष्य इसे और विस्तार देने का हो सकता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार ग्रामीण युवाओं को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, सब्सिडी योजनाएं और आसान ऋण सुविधा जैसी पहल पर जोर दिया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डेयरी क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था से जोड़ा जाए तो बिहार देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

मत्स्य क्षेत्र को लेकर भी सरकार की योजनाओं पर सबकी नजर है। बिहार में पिछले कुछ वर्षों में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अभी भी राज्य को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की चुनौती बनी हुई है। नंदकिशोर राम ने संकेत दिए कि विभाग आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगा ताकि छोटे मछुआरे भी बेहतर उत्पादन कर सकें।

बायोफ्लॉक तकनीक, केज कल्चर और वैज्ञानिक मत्स्य पालन जैसे आधुनिक तरीकों को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा सकता है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि यदि नई तकनीकों का सही उपयोग किया जाए तो कम जगह और कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है। इससे मछुआरों की आय में भी वृद्धि हो सकती है।

मंत्री ने यह भी कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मछुआरों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिलना भी जरूरी है। इसके लिए बाजार व्यवस्था को मजबूत करने और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी काम किया जा सकता है। राज्य में आधुनिक फिश मार्केट विकसित करने की योजनाओं पर भी चर्चा होने की संभावना है।

पदभार ग्रहण के तुरंत बाद मंत्री और विभागीय सचिव शृष्त कपिल अशोक के बीच विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में विभाग की मौजूदा योजनाओं, बजट, लंबित परियोजनाओं और भविष्य की रणनीति पर विचार किया गया। सचिव ने मंत्री को विभाग की वर्तमान स्थिति और चल रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासनिक टीम सरकार की प्राथमिकताओं को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने विभागीय कार्यों की नियमित समीक्षा करने की भी बात कही।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस नियुक्ति को अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुपालन का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि सरकार इस क्षेत्र में प्रभावी सुधार लागू करती है तो इसका सकारात्मक असर ग्रामीण विकास और रोजगार पर पड़ सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी नई सरकार से काफी उम्मीदें हैं। पशुपालकों और मछुआरों का कहना है कि यदि उन्हें आधुनिक सुविधाएं, प्रशिक्षण और बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए तो उनकी आय में बड़ा बदलाव आ सकता है। कई लोगों को उम्मीद है कि नई नीतियों के जरिए छोटे किसानों और मछुआरों को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकेगा।

फिलहाल विभाग में नए नेतृत्व के साथ नई कार्यशैली की शुरुआत होती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में सरकार कौन-कौन सी नई योजनाएं लेकर आती है और उनका असर जमीनी स्तर पर कितना दिखता है, इस पर सबकी नजर बनी रहेगी। लेकिन इतना जरूर है कि नंदकिशोर राम के पदभार संभालने के बाद बिहार के डेयरी, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र को लेकर नई उम्मीदें पैदा हो गई हैं।

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