राजगीर जू और नेचर सफारी पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी: सिंह शावक का नाम रखा ‘लक्ष्मी’, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित फिल्म ‘द वाइल्ड कॉल’ को सराहा

राजगीर/पटना, 17 मई 2026। बिहार के नालंदा जिले के ऐतिहासिक और प्राकृतिक प्रक्षेत्र राजगीर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने के उद्देश्य से प्रशासनिक कवायद तेज कर दी गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को राजगीर स्थित जू-सफारी और नेचर सफारी का विस्तृत भौतिक भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने संपूर्ण परिसर की व्यवस्थाओं, वन्य जीवों के रख-रखाव और वहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों की विधिक सुविधाओं की गहन समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि राजगीर की पहचान यहां के प्राकृतिक वातावरण से है, इसलिए जू-सफारी और नेचर सफारी दोनों के रख-रखाव (मेंटेनेंस) में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने वन्य जीवों को पूरी तरह से प्राकृतिक और तनावमुक्त माहौल प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि वे भी अपनी प्राकृतिक दुनिया में आनंदित रह सकें। इस भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने वन्य जीव अस्पताल की सुविधाओं को परखा और एक नन्हे सिंह शावक (शेर के बच्चे) का विधिक नामकरण करते हुए उसका नाम ‘लक्ष्मी’ रखा।

दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल में चमका राजगीर: ‘द वाइल्ड कॉल’ को सर्टिफिकेट ऑफ एक्सिलेंस

​मुख्यमंत्री के इस राजगीर दौरे की एक सबसे बड़ी और गौरवशाली कड़ी जू-सफारी के भीतर संचालित अत्याधुनिक 180 डिग्री थिएटर से जुड़ी रही। मुख्यमंत्री ने इस विशेष थिएटर में जाकर एनिमेटेड फिल्म ‘द वाइल्ड कॉल’ का अवलोकन किया। इस तकनीकी रूप से उन्नत फिल्म में विभिन्न वन्य जीवों के दैनिक कार्यकलापों, उनके रहन-सहन, शिकार की पद्धतियों और उनकी अनजानी दुनिया को बेहद सजीव तरीके से प्रदर्शित किया गया है। यह फिल्म मुख्य रूप से एक शेर और एक बाघ के शावकों की यात्रा के माध्यम से भारत की समृद्ध जैव-विविधता और वर्तमान समय की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती यानी जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) जैसे अत्यंत संवेदनशील विषयों को आम जनता के सामने उजागर करती है।

​इस एनिमेटेड विलेख के भीतर भारतीय हाथी, गंभीर रूप से संकटग्रस्त ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सहित कुल 23 प्रकार की दुर्लभ वन्य जीव प्रजातियों को ग्राफिक्स के माध्यम से समाहित किया गया है। राजगीर जू सफारी की इस तकनीकी और रचनात्मक उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी विधिक पहचान मिली है। इस शॉर्ट एनिमेटेड फिल्म ‘द वाइल्ड कॉल’ को प्रतिष्ठित 16वें दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल में ‘बेस्ट एनिमेशन’ श्रेणी के तहत ‘सर्टिफिकेट ऑफ एक्सिलेंस’ (उत्कृष्टता प्रमाण पत्र) से सम्मानित किया गया है। भ्रमण के दौरान वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह राष्ट्रीय गौरव का प्रमाण पत्र मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को विधिवत सौंपा, जिस पर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पूरी तकनीकी टीम को बधाई दी।

ग्लास ब्रिज पर प्रकृति का आनंद और बंद गाड़ियों में वन्य जीवों का दीदार

​अपनी विधिक यात्रा के अगले चरण में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजगीर के घने जंगलों और वादियों के बीच स्थित नेचर सफारी का रुख किया। वे वहां के सबसे लोकप्रिय आकर्षण यानी ‘ग्लास ब्रिज’ (शीशे का पुल) पर गए। शीशे के इस पारदर्शी पुल पर चहलकदमी करते हुए उन्होंने राजगीर की पहाड़ियों की रमणीय और विहंगम छटा का अवलोकन किया और क्षेत्र में पर्यावरण पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं पर संतोष व्यक्त किया। इसके बाद, मुख्यमंत्री ने वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और बंद गाड़ी (सुरक्षात्मक वाहन) के माध्यम से जू-सफारी के घने जंगलों का भ्रमण किया।

​इस सफारी ड्राइव के दौरान मुख्यमंत्री ने खुले वातावरण में स्वच्छंद विचरण कर रहे शेर, बाघ, चीते और अन्य हिंसक व शाकाहारी वन्य जीवों की गतिविधियों को बेहद करीब से देखा। उन्होंने नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) का भी औचक निरीक्षण किया, जहां से पूरे सफारी परिसर के भीतर लगे हाई-टेक सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा उपकरणों की चौबीसों घंटे सर्विलांस की जाती है। मुख्यमंत्री ने व्याख्या केंद्र (इंटरप्रिटेशन सेंटर) का भी रुख किया, जहां प्राचीन काल की दुर्लभ वन्य जीव प्रजातियों के अवशेषों, कंकालों और उनके ऐतिहासिक विभावों की प्रदर्शनी लगाई गई है, जो छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए ज्ञान का एक मुख्य केंद्र है।

वन्य जीव अस्पताल की समीक्षा और सिंह शावक ‘लक्ष्मी’ का नामकरण

​सफारी परिसर के भीतर वन्य जीवों के स्वास्थ्य और उनकी विधिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री सीधे परिसर में स्थापित आधुनिक वन्य जीव अस्पताल (वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल) पहुंचे। वहां उन्होंने बीमार, घायल या नवजात वन्य जीवों के वैज्ञानिक इलाज के लिए उपलब्ध कराई गई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, सर्जिकल ऑपरेशनों के उपकरणों और आपातकालीन विंग की गहन जानकारी ली। अस्पताल के मुख्य पशु चिकित्सकों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जानवरों की डाइट, उनके नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और औषधियों की उपलब्धता में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

​इसी अस्पताल परिसर के भीतर रखे गए एक स्वस्थ और नन्हे सिंह शावक (शेर के बच्चे) को देखकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त किया और सनातन परंपरा व सौभाग्य के संप्रतीक के रूप में उस सिंह शावक का आधिकारिक नामकरण करते हुए उसका नाम ‘लक्ष्मी’ रखा। उन्होंने कहा कि सफारी के भीतर नए शावकों का जन्म इस बात का प्रत्यक्ष विधिक साक्ष्य है कि यहां का पर्यावरण वन्य जीवों के वंश संवर्द्धन के लिए पूरी तरह अनुकूल है। मुख्यमंत्री ने विभागीय सचिवों को हुक्म दिया कि राजगीर आने वाले पर्यटकों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणालियों, पेयजल व्यवस्था, गाइडों के व्यवहार और परिवहन के साधनों को और अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाया जाए ताकि बिहार के पर्यटन राजस्व में लगातार सकारात्मक वृद्धि दर्ज की जा सके।

प्रशासनिक जवाबदेही: दौरे में उपस्थित रहे मंत्रियों और आला अधिकारियों की विवरणी

​इस उच्चस्तरीय और महत्वपूर्ण समीक्षा भ्रमण के दौरान राज्य सरकार के कई कैबिनेट मंत्री, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रमंडल व जिला स्तर के शीर्ष प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी विधिक रूप से उपस्थित रहे, जिनकी विवरणी नीचे दी गई तालिका के माध्यम से Scannable रूप में देखी जा सकती है:

क्र.सं.

उपस्थित मंत्रियों/जनप्रतिनिधियों के नाम

प्रतिनियुक्त आला अधिकारियों के नाम एवं पदनाम

01

उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी

मुख्यमंत्री के सचिव सजय कुमार सिंह

02

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार

मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी डॉ० गोपाल सिंह

03

पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता

पटना प्रमंडल के आयुक्त मयंक वरवड़े

04

सांसद कौशलेंद्र कुमार

पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक जितेंद्र राणा

05

विधायक कौशल किशोर

नालंदा के जिला समाहर्ता (डीएम) कुंदन कुमार

06

नालंदा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) संकेत कुमार

मुख्यमंत्री ने दौरे के अंत में सभी उपस्थित अधिकारियों को एक स्पष्ट गाइडलाइन जारी करते हुए कहा कि राजगीर जू-सफारी और नेचर सफारी न केवल बिहार बल्कि पूरे देश की एक अनमोल धरोहर हैं। इसकी सुरक्षा, स्वच्छता और वैश्विक छवि को बनाए रखना स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की सामूहिक विधिक जिम्मेदारी है। व्यवस्थाओं को इस प्रकार संधारित किया जाए कि यहां आने वाला प्रत्येक पर्यटक एक सुखद और सुरक्षित संदेश लेकर वापस लौटे।

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