
मुजफ्फरपुर: जिले के गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव में हुए जगवीर राय हत्याकांड मामले में पुलिस प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) कांतेश कुमार मिश्रा ने कर्तव्य में लापरवाही और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी राजा सिंह सहित छापेमारी में शामिल पूरी पुलिस टीम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
दरअसल, यह मामला पॉक्सो एक्ट के एक आरोपी की गिरफ्तारी के लिए की गई पुलिस छापेमारी से जुड़ा है। छापेमारी के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प हो गई थी। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा। वहीं, गोली लगने से जगवीर राय की मौत हो गई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तत्कालीन थाना प्रभारी ने जगवीर राय को गोली मार दी, जबकि पुलिस का कहना है कि भीड़ के हमले से बचने के लिए आत्मरक्षा में गोली चलाई गई थी।
घटना के बाद मामला तूल पकड़ गया और राजनीतिक माहौल भी गरमा गया। कई नेताओं ने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। बढ़ते दबाव और जनाक्रोश के बीच पहले थाना प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया था, लेकिन अब प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें और पूरी टीम को निलंबित कर दिया गया है।
इसके साथ ही, थाना प्रभारी राजा सिंह को मिलने वाले प्रतिष्ठित ‘वीर पशुपति नाथ मेडल’ और प्रशस्ति पत्र पर भी रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने तक ऐसे सम्मान स्थगित रहेंगे।
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है, जो मजिस्ट्रेट की निगरानी में पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। एफएसएल टीम ने भी मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए हैं।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


