
मुजफ्फरपुर, 18 मई 2026: बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद अवैध शराब कारोबार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है। इसी बीच मुजफ्फरपुर जिले से नकली शराब के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जहां पोल्ट्री फार्म की आड़ में अवैध फैक्ट्री चलाकर नामी कंपनियों के ब्रांड की नकली शराब तैयार की जा रही थी। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए भारी मात्रा में स्प्रिट, हजारों खाली बोतलें, फर्जी रैपर, ढक्कन और पैकिंग मशीन बरामद की है। इस कार्रवाई के दौरान नेपाल के एक कारोबारी समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ स्थानीय स्तर का कारोबार नहीं बल्कि एक बड़ा संगठित नेटवर्क हो सकता है, जिसके तार बिहार से लेकर नेपाल तक जुड़े हुए हैं। मामले के सामने आने के बाद पुलिस और उत्पाद विभाग दोनों सतर्क हो गए हैं और अब पूरे गिरोह की गहराई से जांच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई मुजफ्फरपुर जिले के कथैया थाना क्षेत्र में की गई। पुलिस को लगातार सूचना मिल रही थी कि सिरसिया गांव स्थित एक पोल्ट्री फार्म में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। बताया जा रहा था कि पोल्ट्री व्यवसाय की आड़ में बड़े पैमाने पर नकली शराब तैयार की जा रही है और फिर उसे अलग-अलग इलाकों में सप्लाई किया जाता है।
सूचना मिलने के बाद एसडीपीओ वेस्ट वन सुचित्रा कुमारी के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। पुलिस ने गुप्त रूप से कई दिनों तक इलाके की निगरानी की और पुख्ता जानकारी मिलने के बाद अचानक छापेमारी कर दी। पुलिस टीम जैसे ही पोल्ट्री फार्म पहुंची, वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नेपाल के मोरांग जिला अंतर्गत रंगेली निवासी दिनेश कुमार और कथैया थाना क्षेत्र के टुनटुन कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी नकली शराब तैयार करने और उसकी सप्लाई में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन रौशन सिंह नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि रौशन सिंह ही इस पूरे धंधे का मुख्य संचालक माना जा रहा है।
पुलिस ने जब पोल्ट्री फार्म के अंदर जांच शुरू की तो वहां का दृश्य देखकर अधिकारी भी चौंक गए। मौके से लगभग 7000 खाली शराब की बोतलें बरामद की गईं। इसके अलावा विभिन्न नामी शराब कंपनियों के नकली रैपर, ढक्कन और पैकिंग सामग्री भी मिली। पुलिस ने बड़ी मात्रा में तैयार नकली शराब और करीब 30 लीटर कच्चा स्प्रिट भी जब्त किया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि पुलिस को वहां से आधुनिक पैकिंग और सीलिंग मशीन भी मिली, जिसका इस्तेमाल बोतलों को असली शराब की तरह पैक करने के लिए किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी नकली शराब को इस तरह तैयार करते थे कि आम लोग आसानी से असली और नकली में फर्क नहीं कर पाते थे।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस फैक्ट्री में तैयार शराब को बिहार के विभिन्न इलाकों के अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में भी भेजे जाने की आशंका है। नेपाल कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस अब इस पूरे मामले को अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के तौर पर देख रही है।
एसडीपीओ सुचित्रा कुमारी ने बताया कि बरामद सामान की जांच की जा रही है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई शराब माफियाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है और आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
उन्होंने बताया कि नकली शराब का कारोबार न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि लोगों की जान के लिए भी बड़ा खतरा है। कई बार जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत तक हो जाती है। इसलिए पुलिस इस तरह के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकली शराब बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल कहां से आता था और इसे किन-किन जिलों में सप्लाई किया जाता था।
पुलिस को आशंका है कि इस कारोबार में कुछ स्थानीय लोगों और सफेदपोशों की भी संलिप्तता हो सकती है। यही वजह है कि मामले की जांच को और व्यापक किया गया है। मोबाइल कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
इधर, इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें इस बात की भनक तक नहीं थी कि पोल्ट्री फार्म के भीतर इतने बड़े स्तर पर नकली शराब का कारोबार चल रहा है। कई ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इससे इलाके में अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी।
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से लगातार शराब तस्करी और नकली शराब के मामले सामने आते रहे हैं। पुलिस और उत्पाद विभाग समय-समय पर कार्रवाई भी करते हैं, लेकिन इसके बावजूद तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर कारोबार चला रहे हैं। कभी ट्रकों में छिपाकर शराब लाई जाती है तो कभी घर, गोदाम या अन्य व्यवसायों की आड़ में फैक्ट्री चलाई जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली शराब का नेटवर्क संगठित अपराध का हिस्सा बन चुका है। इसमें बड़े पैमाने पर पैसों का लेनदेन होता है और कई राज्यों तक इसका नेटवर्क फैला होता है। ऐसे मामलों में अंतरराज्यीय एजेंसियों के बीच समन्वय बेहद जरूरी हो जाता है।
फिलहाल पुलिस ने पोल्ट्री फार्म को पूरी तरह सील कर दिया है और बरामद सामान को जब्त कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं फरार मुख्य आरोपी रौशन सिंह और उसके अन्य सहयोगियों की तलाश तेज कर दी गई है।
पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि नकली शराब के इस कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे गिरोह को कानून के दायरे में लाया जाएगा।


