
पटना, 18 मई 2026: बिहार सरकार ने प्रशासनिक लापरवाही और लंबित फाइलों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सख्त निर्देश के बाद अब तय समय सीमा में काम नहीं करने वाले अधिकारियों पर सीधे कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में मुजफ्फरपुर जिले के एक राजस्व अधिकारी को कार्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में काम में देरी या जनता की समस्याओं को अनदेखा करने वाले अधिकारियों पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के इस कदम को प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही साफ कर चुके हैं कि अब सरकारी दफ्तरों में फाइलों को जानबूझकर लंबित रखने की संस्कृति खत्म की जाएगी और हर मामले का निपटारा तय समय सीमा के भीतर करना अनिवार्य होगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री दिलीप जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि मुजफ्फरपुर जिले के कुढनी में पदस्थापित राजस्व अधिकारी धर्मेंद्र कुमार को लगातार लापरवाही बरतने के कारण निलंबित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अब काम में कोताही किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि जनता से जुड़े मामलों में लापरवाही और भ्रष्टाचार की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। खासकर राजस्व विभाग को लेकर लोगों में काफी नाराजगी रही है। जमीन से जुड़े मामलों, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन और अन्य प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी के कारण आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। सरकार अब इन समस्याओं को खत्म करने के लिए सख्त कदम उठा रही है।
दिलीप जायसवाल ने कहा कि राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार की समस्या “कैंसर” की तरह फैल चुकी थी, लेकिन अब इसका इलाज शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार अब “एंटीबायोटिक” की तरह सख्त कार्रवाई कर रही है ताकि विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता लाई जा सके। मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले दिनों हुई लंबी हड़ताल के कारण कई काम प्रभावित हुए हैं, इसलिए अब अधिकारियों और कर्मचारियों को अतिरिक्त मेहनत करनी होगी।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के काम में अनावश्यक देरी करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई होगी। सरकार चाहती है कि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और हर काम तय समय पर पूरा हो।
दरअसल, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 मई को प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की घोषणा की थी। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि किसी भी फाइल का निपटारा अधिकतम 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो 31वें दिन संबंधित अधिकारी को स्वतः निलंबित माना जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि जनता की शिकायतों और फाइलों को लंबित रखने की प्रवृत्ति अब खत्म करनी होगी। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने “सहयोग पोर्टल” और हेल्पलाइन नंबर 1100 की शुरुआत की है। सरकार का दावा है कि इन व्यवस्थाओं के जरिए लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उनके मामलों की निगरानी ऑनलाइन की जाएगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को एक बार फिर अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि “फाइल अटकाओ और भटकाओ” वाली व्यवस्था अब नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों का काम जनता की समस्याओं का समाधान करना है, न कि लोगों को परेशान करना।
उन्होंने विशेष रूप से न्यायालय और प्रशासनिक मामलों को लेकर भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी मामले में अंतिम आदेश जारी करना संभव नहीं हो तो कम से कम अंतरिम आदेश जरूर जारी किया जाए ताकि लोगों को यह महसूस हो कि उनके मामले पर कार्रवाई हो रही है।
सरकार ने इसके लिए एक सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार किया है। जानकारी के अनुसार, यदि कोई मामला लंबित रहता है तो संबंधित अधिकारी को 10वें दिन पहली चेतावनी, 20वें दिन दूसरी चेतावनी और 25वें दिन अंतिम नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद भी यदि काम पूरा नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी पर स्वतः निलंबन की कार्रवाई मानी जाएगी।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस नीति को प्रभावी तरीके से लागू कर पाती है तो बिहार की सरकारी व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय से लोग सरकारी दफ्तरों में फाइलों के अटकने, रिश्वतखोरी और अनावश्यक देरी से परेशान रहे हैं। ऐसे में समयबद्ध सेवा और जवाबदेही तय होने से आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
हालांकि कुछ कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सिर्फ सस्पेंशन की धमकी से व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है। उनका तर्क है कि कई विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है और तकनीकी संसाधनों की भी समस्या है। इसलिए सरकार को कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और बुनियादी सुविधाएं सुधारने पर भी ध्यान देना चाहिए।
इधर, आम लोगों के बीच सरकार के इस फैसले को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि यदि अधिकारी समय पर काम करें और फाइलें लंबित न रखें तो भ्रष्टाचार में काफी कमी आ सकती है। खासकर जमीन और राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में लोग वर्षों तक परेशान होते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्रशासनिक सख्ती के जरिए जनता के बीच मजबूत संदेश देना चाहते हैं। सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह सुशासन और जवाबदेही को लेकर गंभीर है।
फिलहाल मुजफ्फरपुर में हुई कार्रवाई को सरकार की नई नीति की शुरुआत माना जा रहा है। अब सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी सतर्क हो गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में लंबित मामलों और शिकायतों की व्यापक समीक्षा की जाएगी और काम में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।


