फिलहाल आरोपियों को जेल नहीं भेजने का निर्देश
महाराष्ट्र सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही, सभी 12 आरोपियों को नोटिस जारी
नई दिल्ली, 25 जुलाई — सुप्रीम कोर्ट ने 2006 के मुंबई ट्रेन बम विस्फोट मामले में सभी 12 दोषियों को बरी करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। हालांकि शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अभी किसी आरोपी को दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि इस मामले में कानून के जटिल सवाल शामिल हैं। सॉलिसिटर जनरल की ओर से पेश तर्कों को देखते हुए कोर्ट ने यह कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को “मिसाल” नहीं माना जा सकता, इसलिए उस फैसले पर रोक लगाई जाती है।
हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक इन 12 आरोपियों को जेल भेजने का कोई औचित्य नहीं बनता।
क्या है मामला?
11 जुलाई 2006 को मुंबई में लोकल ट्रेनों में सिलसिलेवार 7 धमाके हुए थे, जिनमें 189 लोगों की मौत हो गई थी और 800 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह आतंकी हमला राज्य और देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरी चोट था।
विशेष अदालत ने 2015 में 12 लोगों को दोषी ठहराया था। लेकिन मई 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी और जांच में गंभीर खामियों का हवाला देते हुए सभी दोषियों को बरी कर दिया।
सरकार की दलील
महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। सरकार का कहना है कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य थे, जिन्हें हाईकोर्ट ने नजरअंदाज किया। उन्होंने यह भी कहा कि इतने बड़े आतंकी हमले में दोषियों का छूट जाना न्याय की विफलता होगा।
आगे की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। अगली सुनवाई की तारीख जल्द तय की जाएगी।


