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पटना | 5 नवंबर 2025: विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने आज फेसबुक लाइव के माध्यम से भावुक अंदाज़ में कहा कि वे अपने ‘आरक्षण नहीं तो वोट नहीं’ के संकल्प पर कायम हैं। सहनी ने अपने समर्थकों और निषाद समुदाय से मत एकजुट रखने की अपील की और कहा कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

भावनात्मक अपील — “हमारा वचन निभाओ”

फेसबुक लाइव में सहनी ने कहा कि वे 11 साल से इस संघर्ष में लगे हुए हैं और निषाद समुदाय के लिए अब तक जो काम कोई नहीं कर सका, वह उन्होंने किया। उन्होंने कहा,

“हम सभी ने गंगाजल लेकर ‘आरक्षण नहीं तो वोट नहीं’ का संकल्प लिया था। आज भी मैं अपने वचन पर कायम हूँ। अब आपको सोचना है कि आप अपने वचन को कितना निभा रहे हैं।”

सहनी ने यह भी कहा कि उनके पास विकल्प थे जो उन्हें सुख-सुविधा दे सकते थे, लेकिन उन्होंने समुदाय के लिए संघर्ष चुनना बेहतर समझा।

राजनीतिक स्थिति और टिकट-वितरण पर तीखे शब्द

सहनी ने आरोप लगाया कि एनडीए ने निषाद समुदाय को अपेक्षित रूप से पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया। उन्होंने कहा कि 14–15 सीटों में से नौ सीटें अति-पिछड़ा समाज को दी गईं जिनमें आठ निषाद शामिल हैं, जबकि एनडीए ने 243 में से कुछ सीटें निषाद को नहीं दीं। सहनी ने यह भी कहा कि इस चुनाव से यह साफ़ होगा कि क्या समुदाय आगे संघर्ष कर सकता है।

लक्ष्य और प्रतिज्ञा

सहनी ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई अभी जारी है और उनका उद्देश्य बिहार में बदलाव लाना तथा महागठबंधन को सत्ता में लाना है। उन्होंने कहा,

“मुझे प्रधानमंत्री, अमित शाह और नीतीश कुमार को हराना है — जब तक आप उन्हें नहीं हराएंगे, तब तक आरक्षण को सुनिश्चित न मानें।”

उन्होंने कहा कि वे इस लड़ाई को जीतने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं — “अगर जरूरत पड़ी तो जान भी दे देंगे।”

निजी और सामुदायिक पुश्तैनी भाव

भाषण में सहनी ने अपने निजी संघर्ष और परिवार की बात करते हुए समर्थकों से आह्वान किया कि वे निषाद वोटों में बिखराव न होने दें। उन्होंने कहा कि यह अंतिम रात है और अब निर्णायक कदम उठाने का समय है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से धन की तलाश में नहीं हैं, बल्कि अपने समुदाय के कल्याण और आगे बढ़ने के लिए लड़ रहे हैं।

मुकेश सहनी चार्टर्ड भूमिका में निषाद समुदाय के प्रभाव व प्रतिनिधित्व पर लगातार चर्चा में रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जातीय समीकरण और आरक्षण जैसे मुद्दे कई पार्टियों के एजेंडे पर प्रमुखता से उभर रहे हैं। मतदान के पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को है और राजनीतिक दल आख़िरी क्षण तक मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयासों में लगे हुए हैं।


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