
गुरुग्राम: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे विपक्षी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को बुधवार को हरियाणा पुलिस ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में प्रवेश करने से रोक दिया। इसके बाद अस्पताल के मुख्य द्वार पर विपक्षी सांसदों और पुलिस के बीच तीखी बहस हुई, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), समाजवादी पार्टी (SP) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सांसद वहीं धरने पर बैठ गए।
“जेपी नड्डा मिल सकते हैं, तो विपक्ष क्यों नहीं?” – संजय सिंह
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
उन्होंने कहा, “हम 55 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र लेकर आए थे, जिसमें सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने का आग्रह किया गया है। अगर कल केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह उनसे मिल सकते हैं, तो विपक्षी सांसदों को क्यों रोका जा रहा है?”
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के साथ अलग और सत्ता पक्ष के नेताओं के साथ अलग व्यवहार कर रही है।
अस्पताल गेट पर विपक्ष का धरना
पुलिस द्वारा रोकने के बाद विपक्षी सांसद अस्पताल परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए। RJD सांसद संजय यादव ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल के नेताओं को अस्पताल में प्रवेश दिया गया, जबकि विपक्षी सांसदों को रोक दिया गया।
समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज ने कहा कि जब तक उन्हें सोनम वांगचुक से मिलने की अनुमति नहीं मिलेगी, तब तक वे वहां से नहीं जाएंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मेडिकल प्रोटोकॉल का हवाला दिया जा रहा है, तो वही नियम पहले अन्य नेताओं पर क्यों लागू नहीं किए गए।
पत्नी ने उठाए सवाल
इस बीच, सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि अंगमो भी अस्पताल से बाहर आईं और उन्होंने पुलिस की मौजूदगी पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सोनम वांगचुक पुलिस हिरासत में नहीं हैं और उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ऐसे में सांसदों को उनसे मिलने से रोकना उचित नहीं है।
डॉ. अंगमो ने कहा कि देशभर के 55 सांसद वांगचुक से उनका अनशन समाप्त करने का आग्रह करने आए हैं, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा।
लिखित आश्वासन पर अड़े वांगचुक
डॉ. गीतांजलि अंगमो ने कहा कि सोनम वांगचुक का रुख स्पष्ट है। उनका कहना है कि यदि सरकार आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और संभावित कार्रवाई पर स्पष्ट लिखित आश्वासन देती है, तभी वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
मेदांता अस्पताल के बाहर जारी इस घटनाक्रम ने आंदोलन और राजनीतिक विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। विपक्ष ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।


