
गुरुग्राम: अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने बुधवार शाम गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से एक वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह स्पष्ट भरोसा दे दे कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई प्रतिशोधात्मक या दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तो वह आज ही अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं।
“25 दिन हो गए, लेकिन अभी भी जिंदा हूं”
वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा, “मेरे अनशन को 25 दिन हो चुके हैं, लेकिन मैं अभी भी जिंदा हूं। कई सांसद मुझसे मिलने आए और उन्होंने मुझसे भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। मैं भी जीना चाहता हूं, अपने छात्रों के बीच लौटना चाहता हूं, लेकिन युवाओं के भविष्य से समझौता करके ऐसा नहीं कर सकता।”
सरकार से मांगा स्पष्ट आश्वासन
सोनम वांगचुक ने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, उत्पीड़न या बदले की भावना से कोई कदम न उठाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस संबंध में स्पष्ट आश्वासन देती है, तो वह आंदोलन समाप्त करने के लिए तैयार हैं और स्वयं प्रदर्शनकारियों से भी धरना खत्म करने की अपील करेंगे।
जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को लिखा पत्र
इससे पहले वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को एक खुला पत्र भी भेजा। पत्र में उन्होंने लिखा कि 20 जुलाई को आयोजित “चलो संसद” मार्च के दौरान पुलिस की कथित सख्ती के बावजूद छात्रों ने लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि देश और दुनिया ने युवाओं के धैर्य और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता को देखा है और अब सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आंदोलन में शामिल युवाओं को किसी भी प्रकार की प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।
65 सांसदों ने की अनशन समाप्त करने की अपील
वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया है। कई सांसद व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलने भी पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि वह देश और शिक्षा के क्षेत्र में अपना काम जारी रखना चाहते हैं, लेकिन आंदोलन से जुड़े छात्रों के हितों की अनदेखी नहीं कर सकते।
“लोकतंत्र की असली परीक्षा युवाओं के साथ व्यवहार से होती है”
अपने संदेश के अंत में वांगचुक ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती इस बात से तय होती है कि वह असहमति रखने वाले नागरिकों, विशेषकर युवाओं, के साथ कैसा व्यवहार करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार संवाद का रास्ता अपनाएगी, पुलिस बल प्रयोग से बचेगी और छात्रों की चिंताओं का संवेदनशील समाधान निकालेगी।


