
भागलपुर, भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को लेकर सियासत गरमा गई है। बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने विश्वविद्यालय के कुलपति पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “महाघोटाला” करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में नियुक्तियों और ठेकों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और भाई-भतीजावाद हो रहा है।
बेटी की नियुक्ति और वेतन वृद्धि पर सवाल
सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि कुलपति ने अपनी बेटी को विश्वविद्यालय के बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर में नियमों के विरुद्ध नियुक्त किया।
उन्होंने दावा किया कि उनकी बेटी का वेतन 30 हजार रुपये से बढ़ाकर करीब सवा लाख रुपये कर दिया गया, जबकि उनकी उपस्थिति बेहद कम रहती है।
सुधाकर सिंह ने कहा कि अगर इन आरोपों पर संदेह है, तो विश्वविद्यालय के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जा सकती है।
आउटसोर्सिंग में भी गड़बड़ी का आरोप
सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि कुलपति के पुत्र से जुड़ी एक कंपनी को विश्वविद्यालय के आउटसोर्सिंग कार्यों का ठेका दिया गया है। उन्होंने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
नियमों की अनदेखी का आरोप
सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार में विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए, जिसमें बिहार लोक सेवा आयोग या अधिकृत संस्थाओं की भूमिका होती है।
इसके बावजूद विश्वविद्यालय में सीधे नियुक्तियां की जा रही हैं, जो नियमों के विपरीत है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा नियुक्तियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद इन्हें नजरअंदाज किया गया।
अतिरिक्त नियुक्ति का भी आरोप
सांसद ने कृषि विज्ञान केंद्र में नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए।
उनके अनुसार, जहां सात पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, वहां नियमों की अनदेखी कर आठवें व्यक्ति को भी प्रोफेसर के पद पर नियुक्त कर दिया गया।
स्थानीय युवाओं की अनदेखी का मुद्दा
सुधाकर सिंह ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में स्थानीय युवाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। उनका आरोप है कि यहां पढ़ने और पढ़ाने वाले अधिकांश लोग बाहरी राज्यों से हैं, जिससे बिहार के प्रतिभाशाली युवाओं को नुकसान हो रहा है।
राज्यपाल से करेंगे शिकायत, कोर्ट जाने की चेतावनी
सांसद ने साफ किया कि वह इस पूरे मामले की शिकायत राज्यपाल से करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो वे न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
जांच की मांग तेज
इस मामले के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस पर क्या कदम उठाते हैं।
फिलहाल, इन आरोपों ने सबौर कृषि विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज होने की संभावना है।


