
मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी में प्रस्तावित वाटर पार्क परियोजना को लेकर विवाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गहरा गया है। किसान आंदोलन के दौरान पिपराकोठी थाना में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह सहित कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद पिपराकोठी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के समीप सरकारी गैरमजरूआ भूमि पर प्रस्तावित वाटर पार्क परियोजना को लेकर है।
जिला प्रशासन का कहना है कि लगभग 14 एकड़ सरकारी भूमि में से करीब 3 एकड़ क्षेत्र में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी वाटर पार्क परियोजना विकसित की जानी है और यह पूरी तरह नियमानुसार की जा रही प्रक्रिया है।
वहीं स्थानीय किसानों का दावा है कि वे वर्षों से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए उन्हें भूमि से बेदखल नहीं किया जा सकता। किसानों की मांग है कि पहले उनकी स्थिति स्पष्ट की जाए, उसके बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाए।
आंदोलन में पहुंचे सांसद सुधाकर सिंह
3 जुलाई 2026 को आंदोलन ने राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब राजद सांसद सुधाकर सिंह धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए उनके समर्थन का भरोसा दिया। सभा के बाद वे किसानों के साथ विवादित स्थल पहुंचे और ट्रैक्टर पर बैठकर प्रतीकात्मक रूप से जमीन की जुताई की।
सांसद समेत कई लोगों पर एफआईआर
इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पिपराकोठी थाना में सांसद सुधाकर सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
एफआईआर में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। शिकायत निर्माण कार्य कर रही निजी एजेंसी की ओर से दर्ज कराई गई है।
निर्माण एजेंसी के आरोप
निर्माण एजेंसी का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने निर्माण कार्य रुकवाने के दौरान कर्मचारियों और मजदूरों के साथ मारपीट की।
शिकायत के अनुसार—
- जेसीबी चालक और खलासी के साथ मारपीट की गई,
- कार्यस्थल पर मौजूद कर्मचारियों को घायल किया गया,
- मोबाइल फोन, औजार और नकदी छीनने का भी आरोप लगाया गया है।
इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
राजनीतिक द्वेष का आरोप
राजद और किसान संगठनों ने एफआईआर को राजनीतिक कार्रवाई बताया है।
उनका कहना है कि किसानों के समर्थन में आवाज उठाने के कारण सांसद को निशाना बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि विपक्ष की आवाज दबाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है।
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की संभावना
सूत्रों के अनुसार सांसद सुधाकर सिंह 7 जुलाई को नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि वे अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी, किसान आंदोलन और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासन अपने फैसले पर कायम
जिला प्रशासन का कहना है कि जिस भूमि पर वाटर पार्क प्रस्तावित है, वह पूरी तरह सरकारी जमीन है और परियोजना जनहित में है। प्रशासन का दावा है कि विकास कार्य को किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होने दिया जाएगा।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
दूसरी ओर किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
फिलहाल पिपराकोठी वाटर पार्क परियोजना को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच टकराव जारी है। एक ओर सरकार विकास परियोजना को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर किसान अपनी जमीन और आजीविका की रक्षा की मांग पर अड़े हुए हैं। अब पूरे मामले में आगे क्या निर्णय होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।


