भागलपुर, 28 मई 2025:बिहार सरकार की पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद रेणु कुशवाहा ने एक बार फिर राज्य की शराबबंदी नीति और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। भागलपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी पूरी तरह विफल हो चुकी है और शराब माफिया बेलगाम हो गए हैं।
मोजाहिदपुर कांड पर जताई कड़ी आपत्ति
रेणु कुशवाहा ने भागलपुर जिले के मोजाहिदपुर थाना क्षेत्र की एक घटना का हवाला देते हुए बताया कि सिकंदरपुर निवासी राजकुमार रंजन एक मामले में आरोपी है। पुलिस जब उसे पकड़ने उसके घर पहुंची, तो वह फरार था। इसी दौरान पुलिस को उसके घर से कुछ शराब की बोतलें मिलीं, जिसके आधार पर पुलिस ने उसकी पत्नी नंदिनी सत्यपति और चार साल के बेटे हर्ष को गिरफ्तार कर लिया।
रेणु कुशवाहा ने आरोप लगाया कि
“बिना किसी ठोस कानूनी आधार के महिला और मासूम बच्चे को पहले थाने के हाजत में रखा गया, फिर जेल भेज दिया गया, जो न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि मानवीय मूल्यों के भी विपरीत है।”
महिला पुलिस नहीं थी मौजूद, गिरफ्तारी पर उठे सवाल
उन्होंने यह भी बताया कि जब नंदिनी सत्यपति को गिरफ्तार किया गया, उस वक्त कोई महिला पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद नहीं थी। इसे उन्होंने गंभीर पुलिसीय लापरवाही और कानून का उल्लंघन बताया।
“अगर कोई सरकारी कर्मचारी कानून तोड़े, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ये केवल नारी सम्मान का अपमान नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला है,” उन्होंने कहा।
शराबबंदी पर पुलिस को ठहराया जिम्मेदार
पूर्व मंत्री ने सवाल उठाया कि जब राज्य में शराबबंदी लागू है, तो शराब कहां से और कैसे मिल रही है?
“अगर शराबबंदी के बावजूद शराब आसानी से मिल रही है तो इसके लिए पूरी तरह से पुलिस तंत्र जिम्मेदार है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि इस मामले में न्याय नहीं मिला, तो वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी और जन आंदोलन भी छेड़ेंगी।
जन सुराज पार्टी का भी सरकार पर हमला
इस मामले पर जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय कुमार सिंह ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,
“नीतीश कुमार के चेंबर से ही शराब की बोतलें निकलती हैं। अब इस सरकार की पोल खुल चुकी है।”
सरकार की योजनाओं पर सवाल
रेणु कुशवाहा ने सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं को भी आड़े हाथों लिया और कहा,
“नारी सम्मान के नाम पर योजनाएं बनाना एक बात है, लेकिन जमीन पर महिलाएं पुलिसिया प्रताड़ना झेल रही हैं। यदि सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।”


