अगले बरस तू जल्दी आना के जयकारों के साथ विदा हुईं मां दुर्गे; भागलपुर में विसर्जन घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब, नम आंखों से भक्तों ने दी विदाई

भागलपुर | 30 मार्च, 2026 – शक्ति की उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्र का रविवार को भावपूर्ण समापन हो गया। नौ दिनों तक श्रद्धा, भक्ति और अनुष्ठान के माहौल में डूबा रहने वाला भागलपुर शहर रविवार को विदाई की बेला में डूबा नजर आया। ‘अगले बरस तू जल्दी आना’ और ‘जय माता दी’ के गगनभेदी जयकारों के बीच मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन गंगा के विभिन्न घाटों पर संपन्न हुआ। विसर्जन यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह और मां से बिछड़ने का गम दोनों ही साफ देखे जा सकते थे। शहर की हवाओं में शंख की ध्वनि और ढाक की थाप ने एक ऐसा वातावरण बनाया कि हर भक्त की आंखें नम थीं।

भक्ति का महासंगम: विसर्जन यात्रा में उमड़ी भारी भीड़

​रविवार सुबह से ही शहर के विभिन्न दुर्गा मंदिरों और पूजा पंडालों में विसर्जन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। चैत्र नवरात्र के समापन पर दशमी तिथि के दिन मां दुर्गा की विदाई का विधान है। भागलपुर के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों से निकलने वाली विसर्जन यात्राओं ने पूरे शहर को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। तिलकामांझी चौक से लेकर इशाकचक और अलीगंज तक की सड़कें श्रद्धालुओं से पटी हुई थीं।

​विसर्जन जुलूस में युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी शामिल थे। पारंपरिक गीतों और वाद्य यंत्रों के बीच मां की प्रतिमाओं को फूलों से सजी गाड़ियों पर सवार कर विसर्जन घाटों की ओर ले जाया गया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने मां की आरती उतारी और सुख-समृद्धि की कामना की। विसर्जन यात्रा के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।

प्रमुख विसर्जन स्थल: तिलकामांझी से अलीगंज तक गूँजी जयकार

​शहर के हर मोहल्ले में स्थापित मां की प्रतिमाओं को उनके निर्धारित रूटों से होते हुए गंगा तट पर लाया गया।

  1. तिलकामांझी और जवारीपुर: शहर के केंद्र कहे जाने वाले तिलकामांझी चौक और जवारीपुर क्षेत्र में विसर्जन का दृश्य अत्यंत मनोरम था। यहाँ की प्रतिमाओं की भव्यता देखते ही बन रही थी। श्रद्धालुओं ने मां को विदा करने से पहले सिंदूर खेल और पारंपरिक अनुष्ठान किए।
  2. बड़ी खंजरपुर और खिरनी घाट: गंगा के तट के करीब होने के कारण इन क्षेत्रों में विसर्जन की प्रक्रिया काफी पहले शुरू हो गई थी। खिरनी घाट पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा रहा, जहाँ विधि-विधान के साथ प्रतिमाओं को जल में प्रवाहित किया गया।
  3. मानिकपुर और इशाकचक: इन क्षेत्रों की विसर्जन यात्रा में स्थानीय युवाओं का जोश देखने लायक था। भजन-कीर्तनों के साथ मां की सवारी घाटों की ओर बढ़ी।
  4. अलीगंज और बाल्टी कारखाना: अलीगंज और बाल्टी कारखाना क्षेत्र के मंदिरों से निकली शोभायात्राओं ने मुख्य मार्ग पर भव्य नजारा पेश किया। यहाँ की प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक विदाई गीत गाए, जिससे माहौल काफी भावुक हो गया।

धार्मिक अनुष्ठान: सिंदूर उत्सव और मां की अंतिम आरती

​विसर्जन से पहले मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। महिलाओं ने मां को खोइछा दिया और सुहाग की लंबी उम्र की कामना करते हुए एक-दूसरे को सिंदूर लगाया। यह सिंदूर उत्सव शहर के कई मंदिरों में आकर्षण का केंद्र रहा। पंडितों के अनुसार, दशमी के दिन मां दुर्गा अपने ससुराल से वापस कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान करती हैं, इसलिए उन्हें एक बेटी की तरह विदा करने की परंपरा है।

​विदाई से पहले मां की ‘महाआरती’ की गई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। अगरबत्ती और कपूर की खुशबू से पूरा परिसर महक उठा। विसर्जन यात्रा में शामिल भक्तों का कहना था कि नौ दिनों की ऊर्जा और सकारात्मकता उन्हें आने वाले पूरे वर्ष के लिए प्रेरित करेगी।

प्रशासनिक सतर्कता: विसर्जन घाटों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध

​चैत्र नवरात्र विसर्जन को लेकर भागलपुर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।

  • ड्रोन से निगरानी: विसर्जन यात्रा के रूट और गंगा घाटों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने ड्रोन कैमरों का उपयोग किया।
  • NDRF और SDRF की तैनाती: गंगा में विसर्जन के दौरान किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीमों को अलर्ट पर रखा गया था।
  • बैरिकेडिंग और प्रकाश व्यवस्था: घाटों पर पर्याप्त रोशनी और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से प्रतिमाओं को प्रवाहित कर सकें।
  • ट्रैफिक डायवर्जन: शहर के मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया था ताकि एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं को कोई परेशानी न हो।

​पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी खुद क्षेत्र में भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और दंडाधिकारियों की नियुक्ति की गई थी।

पर्यावरण संरक्षण: गंगा को स्वच्छ रखने का संकल्प

​इस वर्ष के विसर्जन में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी देखने को मिली। प्रशासन और कई सामाजिक संस्थाओं ने अपील की थी कि प्रतिमाओं में केवल प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग किया जाए। विसर्जन के बाद गंगा में अवशेषों को निकालने के लिए विशेष सफाई अभियान चलाने की भी योजना बनाई गई है। नगर निगम के कर्मचारियों को घाटों पर तैनात किया गया था ताकि विसर्जन के तुरंत बाद सामग्री को इकट्ठा किया जा सके और नदी के जल को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।

चैत्र नवरात्र का महत्व: भक्ति और शक्ति का संगम

​चैत्र नवरात्र, जिसे वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता है, का विशेष धार्मिक महत्व है। शरद नवरात्र की तरह इसमें भी मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। भागलपुर में इस बार चैत्र नवरात्र को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। शहर के प्राचीन मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नौ दिनों तक लगी रहीं। अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन अनुष्ठानों में पूरा शहर रमा रहा।

भावुक क्षण: जब विदा हुईं ‘मां’

​जैसे ही मां की प्रतिमा गंगा की लहरों में समाहित हुई, किनारे खड़े हजारों श्रद्धालुओं की आंखें भर आईं। भक्तों ने जल स्पर्श कर मां से अपने अपराधों की क्षमा मांगी और अगले वर्ष फिर से आने का निमंत्रण दिया। विसर्जन के बाद घाटों पर सन्नाटा पसर गया, लेकिन भक्तों के दिलों में मां की छवि और उनके आशीर्वाद की गूँज बनी रही।

​भागलपुर के तिलकामांझी चौक, जवारीपुर, बड़ी खंजरपुर, खिरनी घाट, मानिकपुर, इशाकचक, अलीगंज और बाल्टी कारखाना समेत सभी प्रमुख स्थलों पर विसर्जन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। अब शहर को मां के अगले आगमन का इंतजार रहेगा।

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