बिहार के प्रशासनिक बेड़े में शामिल होंगे 25 ‘नए सारथी’! 11 सीधी भर्ती और 14 प्रोन्नति से आएंगे IAS अधिकारी; फाइलों की रफ्तार होगी तेज, वर्कलोड से मिलेगी बड़ी राहत

न्यूज डायरी: सुशासन की नई खेप और सचिवालय का ‘पावर’ बैकअप

  • बड़ी खबर: बिहार में आईएएस (IAS) अधिकारियों की भारी कमी के बीच अच्छी खबर आई है। राज्य को जल्द ही 25 नए आईएएस अधिकारी मिलने जा रहे हैं.
  • दोहरा लाभ: इनमें 11 अधिकारी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सीधी भर्ती (2025 बैच) से आएंगे, जबकि 14 अधिकारी बिहार प्रशासनिक सेवा (BPSC) से पदोन्नत होकर आईएएस बनेंगे.
  • समय सीमा: सीधी भर्ती वाले अधिकारी 17 अप्रैल 2026 तक बिहार में अपना योगदान देंगे, जबकि प्रोन्नति वाले अधिकारी मई-जून तक सेवा में शामिल होंगे.
  • आंकड़ों का गणित: राज्य में कुल स्वीकृत पद 359 हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 280 अधिकारी ही जमीन पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
  • ट्रेनिंग अपडेट: 2025 बैच के 11 अधिकारी वर्तमान में मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में प्रशिक्षण ले रहे हैं.
  • VOB इनसाइट: बिहार में अक्सर एक अधिकारी के पास तीन से चार विभागों का अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) होता है, जिससे महत्वपूर्ण फाइलों के निस्तारण में देरी होती है। 25 नए अधिकारियों के आने से न केवल प्रशासनिक कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि जिलों में विकास योजनाओं की निगरानी भी बेहतर हो सकेगी। विशेष रूप से 2025 बैच के इन युवाओं में 4 अधिकारी मूल रूप से बिहार के ही हैं, जो राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को समझने में प्रशासन के लिए ‘एसेट’ साबित होंगे।

पटना | 30 मार्च, 2026

​बिहार की प्रशासनिक मशीनरी को नई ऊर्जा और युवा जोश मिलने वाला है। पिछले कुछ समय से अधिकारियों की कमी और अतिरिक्त प्रभार के बोझ तले दबे बिहार कैडर को अब 25 नए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों का सहारा मिलेगा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय के बाद इन नियुक्तियों और प्रोन्नति की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया गया है। यह बदलाव केवल पदों को भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार में सुशासन की गति को ‘टॉप गियर’ में डालने की एक सोची-समझी रणनीति है।

रिक्त पदों का संकट: 359 के मुकाबले केवल 280 का कंधा

​बिहार में प्रशासनिक कार्यों का बोझ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उस अनुपात में अधिकारियों की संख्या में हमेशा से कमी रही है। वर्तमान में बिहार कैडर में अधिकारियों की जो स्थिति है, वह चिंताजनक और राहत की उम्मीद के बीच झूल रही है।

बिहार कैडर: आईएएस अधिकारियों की वर्तमान स्थिति

पद की श्रेणी

संख्या (आंकड़ों में)

कुल स्वीकृत पद

359

बिहार कैडर के कुल अधिकारी

310

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात

30

बिहार में वर्तमान में कार्यरत

280

आंकड़े बताते हैं कि राज्य में स्वीकृत पदों के मुकाबले अभी भी करीब 79 अधिकारियों की कमी है। 280 अधिकारियों के भरोसे 13 करोड़ से अधिक की आबादी वाले राज्य का प्रशासन चलाना चुनौतीपूर्ण है। यही कारण है कि 25 नए अधिकारियों के आने को सचिवालय में ‘बूस्टर डोज’ के रूप में देखा जा रहा है।

11 ‘युवा तुर्क’: 2025 बैच के बिहार कैडर के जांबाज

​सीधी भर्ती से आने वाले 11 अधिकारी वर्तमान में मसूरी (LBSNAA) में अपनी ट्रेनिंग के अंतिम चरणों में हैं। इनमें से सबसे सुखद बात यह है कि 11 में से 4 अधिकारी (राजकृष्ण झा, कुमुद मिश्रा, प्रिंस राज और दीपक कुमार) मूल रूप से बिहार के ही रहने वाले हैं। शेष अधिकारी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों से हैं, जो बिहार के प्रशासनिक संस्कृति में विविधता लाएंगे।

2025 बैच के नए अधिकारियों की सूची और गृह राज्य:

  1. राजकृष्ण झा: बिहार
  2. कुमुद मिश्रा: बिहार
  3. प्रिंस राज: बिहार
  4. दीपक कुमार: बिहार
  5. सौरभ सिन्हा: दुमका, झारखंड
  6. फरखंदा कुरैशी: बालाघाट, मध्य प्रदेश
  7. केतन शुक्ला: उत्तराखंड
  8. निलेश गोयल: राजस्थान
  9. अमित मीणा: राजस्थान
  10. अंकुर त्रिपाठी: अमेठी, उत्तर प्रदेश
  11. दिल्ली से एक अन्य अधिकारी

​इन अधिकारियों का कार्यकाल 2056 से 2061 तक रहेगा, जिसका अर्थ है कि बिहार के विकास की लंबी अवधि की कमान इन युवाओं के हाथों में होगी। ये अधिकारी 17 अप्रैल तक बिहार पहुँचकर अपनी रिपोर्टिंग करेंगे, जिसके बाद उन्हें विभिन्न जिलों में सहायक समाहर्ता (Assistant Collector) के रूप में तैनात किया जाएगा।

प्रोन्नति का रास्ता: बिप्रसे से आईएएस बनने वाले 14 अधिकारी

​सीधी भर्ती के अलावा, बिहार प्रशासनिक सेवा (बिप्रसे) के 14 वरिष्ठ अधिकारियों को आईएएस (IAS) के रूप में प्रोन्नत किया जा रहा है। इन अधिकारियों के पास बिहार के प्रखंडों और अनुमंडलों में काम करने का लंबा अनुभव है। मई-जून 2026 तक इनकी प्रोन्नति की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।

​अनुभवी अधिकारियों को आईएएस रैंक मिलने से राज्य सरकार को वरिष्ठ पदों, जैसे अपर समाहर्ता या विभागों के संयुक्त सचिव के रूप में अनुभवी चेहरे मिलेंगे। यह ‘युवा जोश’ (सीधी भर्ती) और ‘अनुभव’ (प्रोन्नति) का एक बेहतरीन तालमेल होगा, जो बिहार के विकास कार्यों में संतुलन पैदा करेगा।

कार्यशैली पर प्रभाव: फाइलों का अंबार और ‘स्पीडी’ ट्रायल

​वर्तमान में बिहार के कई विभागों में सचिव और प्रधान सचिव स्तर के अधिकारियों के पास दो-दो या तीन-तीन विभागों का प्रभार है। इससे नीतिगत निर्णयों में देरी होती है। 25 नए अधिकारियों के आने से निम्नलिखित सुधारों की उम्मीद है:

  • त्वरित निर्णय: अतिरिक्त प्रभार हटने से अधिकारी अपने मूल विभाग पर अधिक ध्यान दे पाएंगे।
  • जिलों की निगरानी: जिलों में तैनात होने वाले नए अधिकारियों से सात निश्चय योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की ग्राउंड रिपोर्टिंग बेहतर होगी।
  • प्रशिक्षण और नवाचार: लावासना से नई तकनीक और डिजिटल गवर्नेंस की ट्रेनिंग लेकर आ रहे ये अधिकारी ब्लॉक लेवल के कामकाज को और अधिक ‘पारदर्शी’ बनाएंगे।

VOB का नजरिया: क्या 25 अधिकारी काफी हैं?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि 25 अधिकारियों का आना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसा ही है।

  1. रिटायरमेंट का चक्र: हर साल बिहार कैडर से कई वरिष्ठ अधिकारी सेवानिवृत्त होते हैं। यदि भर्ती की गति धीमी रही, तो रिक्तियों का आंकड़ा फिर से बढ़ सकता है।
  2. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का संतुलन: राज्य के 30 अधिकारी वर्तमान में केंद्र में हैं। बिहार सरकार को केंद्र से अधिक अधिकारियों की वापसी के लिए पैरवी करनी चाहिए ताकि राज्य के प्रशासनिक कार्यों में बाधा न आए।
  3. स्थानीय अनुभव बनाम बाहरी विजन: 11 में से 7 अधिकारी बाहरी राज्यों के हैं। उन्हें बिहार की भाषा, संस्कृति और ग्रामीण समस्याओं को समझने के लिए विशेष समय देना होगा ताकि वे प्रभावी निर्णय ले सकें।

निष्कर्ष: सुशासन के लिए नई सुबह

​बिहार कैडर में 25 नए आईएएस अधिकारियों का शामिल होना राज्य के उज्ज्वल भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है। अप्रैल से जून के बीच जब ये अधिकारी अपनी कुर्सियां संभालेंगे, तो आम जनता को उम्मीद होगी कि प्रखंड से लेकर सचिवालय तक भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचेगा। 17 अप्रैल वह तारीख होगी जब बिहार के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ेगा।

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) इन नए अधिकारियों की जिलों में होने वाली पहली तैनाती, प्रोन्नति की आधिकारिक अधिसूचना और बिहार कैडर में होने वाले आगामी बड़े फेरबदल की हर ताज़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।

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