कटिहार में मोबाइल मदरबोर्ड के काले साम्राज्य का भंडाफोड़, एसटीएफ और यूपी पुलिस का साझा प्रहार

कटिहार। आधुनिक युग में जिसे हम ‘ई-वेस्ट’ या पुराना कचरा समझकर कबाड़ के हवाले कर देते हैं, वही कचरा हमारी निजी जानकारियों और देश की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है, इसका एक खौफनाक उदाहरण कटिहार के सुदूर इलाके में देखने को मिला है। बिहार एसटीएफ और उत्तर प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कटिहार जिले के रौतरा थाना क्षेत्र अंतर्गत हथिया दियारा, लैला चौक से एक ऐसे शातिर अपराधी को दबोचा है, जिसके तार सीमा पार बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े होने की प्रबल आशंका है। गिरफ्तार आरोपी इश्तियाक आलम ऊपर से तो एक साधारण प्लास्टिक सामान बेचने वाला दुकानदार नजर आता था, लेकिन उसकी दुकान के पीछे मोबाइल मदरबोर्ड की तस्करी का एक ऐसा खेल चल रहा था, जो भारतीय मोबाइल उपयोगकर्ताओं के डेटा को विदेशी हैकर्स की मेज तक परोस रहा था।

​आधी रात की दबिश और लैला चौक पर सन्नाटा

​कटिहार का रौतरा इलाका, जो आमतौर पर अपनी शांत ग्रामीण जीवनशैली और दियारा की खेती के लिए जाना जाता है, गुरुवार की देर रात अचानक पुलिस की सायरन और बूटों की आवाज से गूँज उठा। उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर सेल और बिहार एसटीएफ की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर लैला चौक स्थित इश्तियाक आलम के ठिकाने की घेराबंदी कर ली। स्थानीय पुलिस को भी इस ऑपरेशन में शामिल किया गया था, लेकिन इसकी गंभीरता को देखते हुए पूरी योजना को काफी गोपनीय रखा गया था।

​जैसे ही पुलिस टीम ने इश्तियाक के घर और दुकान की तलाशी शुरू की, वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। प्लास्टिक की बाल्टियों, मग और घरेलू सामानों के बीच छिपाकर रखे गए पुराने मोबाइल फोनों का ढेर और उनके खुले हुए मदरबोर्ड इस बात की गवाही दे रहे थे कि यहाँ किसी प्लास्टिक की नहीं, बल्कि ‘डिजिटल डेटा’ की मंडी सजी थी। पुलिस ने इश्तियाक आलम को हिरासत में लिया और उसके पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए।

​फेरीवालों से मदरबोर्ड तक: अपराध का अनूठा ‘बिजनेस मॉडल’

​पुलिसिया जांच में इश्तियाक आलम के काम करने का जो तरीका सामने आया है, वह काफी व्यवस्थित और डरावना है। इश्तियाक केवल एक दुकानदार नहीं था, बल्कि वह एक ‘कलेक्शन एजेंट’ के रूप में काम कर रहा था।

  • फेरीवालों का नेटवर्क: इश्तियाक ने इलाके के छोटे-छोटे फेरीवालों और कबाड़ चुनने वालों के साथ सांठगांठ कर रखी थी। ये फेरीवाले गांवों और मोहल्लों में पुराने कपड़ों या थोड़े पैसों के बदले लोगों के खराब और पुराने मोबाइल फोन खरीद लेते थे।
  • मदरबोर्ड की छंटनी: इन पुराने फोनों को इश्तियाक अपनी दुकान पर इकट्ठा करता था। इसके बाद वह बहुत ही पेशेवर तरीके से इन फोनों को तोड़कर उनके मदरबोर्ड (Motherboard) को अलग कर लेता था। बाकी का प्लास्टिक और कांच का हिस्सा कचरे में डाल दिया जाता था, लेकिन असली खजाना यानी ‘चिप और मदरबोर्ड’ को सुरक्षित पैक किया जाता था।
  • विदेशी कनेक्शन: आशंका जताई जा रही है कि ये मदरबोर्ड सड़क या कूरियर के रास्ते उत्तर प्रदेश और वहां से दिल्ली होते हुए देश के बाहर भेजे जाते थे। विदेशों में बैठे साइबर अपराधी इन मदरबोर्ड से अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए पुराना डेटा रिकवर करते थे।

​डेटा रिकवरी: आपकी पुरानी यादें और बैंक डिटेल्स अब सुरक्षित नहीं

​आम आदमी यह सोचता है कि फोन ‘रीसेट’ कर देने या फोन के खराब हो जाने के बाद उसका डेटा खत्म हो गया है। लेकिन साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल के मदरबोर्ड पर लगी फ्लैश मेमोरी और ईएमएमसी (eMMC) चिप्स में डेटा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।

साइबर अपराधी इन पुराने मदरबोर्ड को खरीदकर उनसे निजी तस्वीरें, वीडियो, पुराने पासवर्ड और बैंकिंग ट्रांजेक्शन के विवरण निकाल लेते हैं। इस डेटा का उपयोग न केवल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता है, बल्कि इसका इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी और नकली डिजिटल पहचान (Fake Identity) बनाने के लिए भी होता है। इश्तियाक आलम इसी चेन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी था, जो कच्चा माल (मदरबोर्ड) उपलब्ध करा रहा था।

​एसपी शिखर चौधरी का बयान: “बड़े नेटवर्क की ओर इशारा”

​कटिहार के पुलिस कप्तान शिखर चौधरी ने इस पूरी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए इसे एक बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

शिखर चौधरी ने मीडिया को बताया कि “जब्त किए गए मदरबोर्ड और मोबाइल उपकरणों के आधार पर हम इस संभावना से इनकार नहीं कर सकते कि यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश पुलिस के पास इस गिरोह के कुछ और सुराग थे, जिसके आधार पर यह संयुक्त छापेमारी की गई। हम अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि कटिहार में इश्तियाक के अलावा और कौन लोग इस धंधे में शामिल हैं और यह माल यहाँ से कहाँ भेजा जा रहा था।”

​प्लास्टिक की दुकान का तिलिस्म: स्थानीय लोग हैरान

​इश्तियाक आलम की गिरफ्तारी के बाद रौतरा और आसपास के इलाकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय निवासियों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं थी। उनके अनुसार, इश्तियाक पिछले कई समय से लैला चौक पर प्लास्टिक के सामान की दुकान चला रहा था। वह एक सीधा-सादा दुकानदार दिखता था जो अक्सर फेरीवालों से लेनदेन करता था।

ग्रामीणों ने बताया कि “हमने कभी नहीं सोचा था कि बाल्टियां और मग बेचने वाला इश्तियाक मोबाइल के जरिए ऐसा कोई काम कर रहा होगा। वह अक्सर पुरानी बैटरियां और फोन के पुर्जे इकट्ठा करता था, लेकिन हमें लगा कि यह शायद कबाड़ का सामान्य काम है।” इश्तियाक ने अपनी इस अवैध गतिविधि को जिस तरह से एक साधारण व्यापार की आड़ में छिपा रखा था, वह उसकी शातिर मानसिकता को दर्शाता है।

​उत्तर प्रदेश पुलिस का कटिहार आना: क्यों थी इतनी मुस्तैदी?

​सवाल यह उठता है कि यूपी पुलिस को कटिहार तक आने की जरूरत क्यों पड़ी? सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाजियाबाद इलाकों में हाल ही में हुए कुछ बड़े साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे डिजिटल सिग्नल मिले थे जो बिहार के सीमावर्ती जिलों की ओर इशारा कर रहे थे।

यूपी पुलिस ने पाया कि जिन ‘सर्वरों’ और ‘आईपीएस’ का उपयोग धोखाधड़ी के लिए हुआ था, उनके तार उन मोबाइल फोन से जुड़े थे जो कभी दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय थे लेकिन बाद में उनका मदरबोर्ड बिहार के रास्ते बाहर भेज दिया गया था। इसी कड़ी को जोड़ते हुए यूपी पुलिस कटिहार पहुँची और बिहार एसटीएफ के साथ मिलकर इस सटीक ऑपरेशन को अंजाम दिया।

​साइबर सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी

​कटिहार की यह घटना देश के हर मोबाइल उपयोगकर्ता के लिए एक चेतावनी है। हम अक्सर अपने पुराने फोन को किसी अनजान फेरीवाले को चंद रुपयों के लालच में बेच देते हैं, यह जाने बिना कि हमारा वह ‘खराब फोन’ किसी अपराधी के लिए सूचनाओं का भंडार हो सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि पुराने फोन को कभी भी असंगठित कबाड़ बाजार में न बेचें। यदि फोन खराब भी हो गया है, तो उसे अधिकृत रिसाइकिलिंग सेंटर को ही दें या उसके मदरबोर्ड को पूरी तरह नष्ट कर दें। इश्तियाक आलम जैसे लोग समाज की इसी अज्ञानता का फायदा उठाकर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं और देश के नागरिकों को डिजिटल खतरे में डाल रहे हैं।

​निष्कर्ष: जांच की आंच अब कहाँ तक?

​इश्तियाक आलम की गिरफ्तारी तो केवल शुरुआत है। बिहार एसटीएफ अब इस बात का पता लगा रही है कि कटिहार के दियारा इलाकों में ऐसे और कितने ‘कलेक्शन सेंटर’ चल रहे हैं। दियारा का इलाका अपनी दुर्गमता के कारण अक्सर ऐसे अवैध कामों के लिए सुरक्षित माना जाता है। उत्तर प्रदेश पुलिस अब इश्तियाक को ट्रांजिट रिमांड पर ले जाकर पूछताछ करेगी, जिससे यह साफ हो पाएगा कि इस नेटवर्क का असली ‘आका’ कौन है।

​शिखर चौधरी और उनकी टीम ने जिस मुस्तैदी से यूपी पुलिस का सहयोग किया, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार के अन्य जिलों में भी ऐसी गिरफ्तारियां देखने को मिल सकती हैं। फिलहाल, लैला चौक की वह प्लास्टिक की दुकान सील कर दी गई है, लेकिन उसके पीछे छिपे डिजिटल अपराध के रहस्य अब एक-एक कर खुलने लगे हैं। यह घटना याद दिलाती है कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में हमारी सुरक्षा केवल पासवर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे पुराने हार्डवेयर के डिस्पोजल पर भी निर्भर करती है।

कार्यवाही का संक्षेप:

  • आरोपी: इश्तियाक आलम (प्लास्टिक दुकानदार)।
  • स्थान: हथिया दियारा, लैला चौक, रौतरा, कटिहार।
  • जुर्म: पुराने मोबाइल मदरबोर्ड की तस्करी और डेटा दुरुपयोग की आशंका।
  • टीम: बिहार एसटीएफ और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त टीम।
  • नेतृत्व: शिखर चौधरी (एसपी, कटिहार) के मार्गदर्शन में स्थानीय सहयोग।
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